थाईलैंड की राजकुमारी महाचक्री श्रींदोर्ण को विश्व संस्कृत पुरस्कार

संस्कृतभाषा के अध्ययन, प्रचार और अनुसंधान के लिए उत्कृष्ट योगदान के लिए थाईलैंड की राजकुमारी महाचक्री श्रींदोर्ण और अमेरिका के पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के जार्ज कारडोना को विश्व संस्कृत पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

देशपर मंडरा रहे इस्लामिक स्टेट के संकट को रोकने हेतु कश्मीरी हिन्दुओं का पुनर्वास आवश्यक ! – श्री. आनंद जाखोटिया, सनातन संस्था

हिमालय, कैलास जैसे संस्कृत नाम होनेवाले स्थान बार-बार वह भूमी हिन्दुओं की ही होना सिद्ध करते हैं। अतः कश्मीर के स्वतंत्रता की घोषणा करनेवालों को यह ध्यान में लेना चाहिए कि, अब इन ४ लाख ५० सहस्र विस्थापितों के साथ देशभर की १०० करोड हिन्दू जनता है।

सनातन के कार्यकर्ताओं ने ली तिबेट के भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री. रिनपोछे से भेंट !

यहां मध्यप्रदेश शासन की ओर से ‘लोकमंथन’ : देश-काल-स्थिति’ इस विषय पर विचारक एवं कार्यकर्ताओं का एक सम्मेलन संपन्न हुआ। इस अवसर पर देश-विदेश के विचारक इसमें सम्मिलित हुए थे। इसमें हिन्दू जनजागृति समिति के कार्यकर्ता एवं सनातन के साधक भी सम्मिलित हुए थे।

इस मुस्लिम देश में सदियों से जल रही मां भगवती की अखंड ज्योति !

वैष्णो देवी से लेकर कन्या कुमारी तक भारत में मां दुर्गा के बहुत से मंदिर हैं किंतु यदि किसी मुस्लिम देश में मंदिर मौजूद हो तो यह किसी आश्चर्य से कम नहीं है। रूस और ईरान के बीच में स्थित मुस्लिम देश अजरबैजान में सुराखानी नामक स्थान पर माँ भगवती का एक प्राचीन मंदिर स्थित है।

१००० वर्ष पहले बने थे यहां २६ मंदिर, अब ऐसे वीरान पडे हैं ध्वंस अवशेष !

आशापुरी स्थित मंदिर देखने में भले ही छोटे हों, परंतु इनको बनाने में २०० साल लगे हैं। इन ऐतिहासिक मंदिरों से जुड़ी जानकारी एसपीएस भोपाल और ब्रिटेन की कार्डिफ विश्वविद्यालय के वेल्स स्कूल ऑफ वास्तु-विद्या की समूह के अध्ययन में सामने आई है।

प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ नियतकालिक सनातन प्रभातके माध्यमसे पत्रकारिताका कार्य

हिन्दू राष्ट्र स्थापना का संदेश प्रसारित करने के लिए (परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवलेजी ने सनातन प्रभात नियतकालिक आरंभ किए । वे सनातन प्रभात समूह के संस्थापक संपादक हैं । २८ अप्रैल १९९८ से १९ अप्रैल २०००, इस कालखंड में वे संपादक रहे ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी को हुई गुरुप्राप्ति और उनके द्वारा किया अध्यात्मप्रसार !

सम्मोहन उपचारों से ठीक न हुए मनोरोगी, संतों द्वारा बताई साधना करने पर ठीक होते हैं, यह ध्यान में आने पर परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने वर्ष १९८३ से वर्ष १९८७ की अवधि में अध्यात्म के अधिकारी लगभग ३० संतों के पास जाकर अध्यात्म का अध्ययन किया और अध्यात्मशास्त्र की श्रेष्ठता का भान होने पर स्वयं साधना आरंभ की ।

विविध माध्यमों से राष्ट्र और धर्म संबंधी कार्य करनेवाले परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी !

हिन्दू राष्ट्र की स्थापना का कार्य परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी हिन्दू राष्ट्र के प्रखर समर्थक हैं । उनके द्वारा संकलित ईश्‍वरीय राज्य की स्थापना नामक मराठी ग्रंथ १८ मार्च १९९९ को प्रकाशित हुआ । इसमें उन्होंने ऐसा विचार प्रस्तुत किया कि भारत में ईश्‍वरीय राज्य की (हिन्दू राष्ट्र की) स्थापना करना, यही हिन्दुआें की सामाजिक, … Read more

साधना की दृष्टि से १४ विद्या और ६४ कलाआें की शिक्षा का बीजारोपण करनेवाले परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी !

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के मार्गदर्शनानुसार ‘ईश्‍वरप्राप्ति हेतु कला’ यह ध्येय सामने रखकर अनेक साधक चित्रकला, मूर्तिकला, संगीत, नृत्यकला, वास्तुविद्या आदि कलाआें के माध्यम से साधना कर रहे हैं ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजीका जन्म और उनका आध्यात्मिक वृत्तिसम्पन्न परिवार

होनहार बिरवान के, होत चीकने पात इस उक्ति के अनुसार परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी का जन्म ६ मई १९४२ को श्री. बाळाजी वासुदेव आठवलेजी और श्रीमती नलिनी बाळाजी आठवलेजी के परिवार में हुआ । आगे वे दोनों संतपद पर विराजित हुए ।