छत्रपति शिवाजी महाराजजी की प्रेरक शक्ति : राजमाता जिजाऊ !

वर्ष १५९५ में विदर्भ के सिंदखेडराजा नामक स्थान पर जीजाबाईका जन्म हुआ । उन्हें रामायण-महाभारत और पुराण की कथाएं अत्यंत प्रिय थीं । महाराष्ट्र तथा संपूर्ण भारत में मुगल और विजापूर के सुलतान ने कोहराम मचा रखा था । तब जीजाबाई ने भवानीदेवी से प्रार्थना की राष्ट्ररक्षा के लिए सुपुत्र दीजिए ।

आध्यात्मिक स्तर की तथा मनुष्य जीवन के विविध अंगों को स्पर्श करनेवाले विचारों से संबंधित अर्थपूर्ण बाटिक नक्काशीवाले विविध देशों के विशेषतापूर्ण वस्रप्रावरण !

इंडोनेशिया के लोग विविध प्रकार की विशेषतापूर्ण बाटिक नक्काशीवाले कपडों में घूमते हुए दिखाई देते हैं । इस विषय में अधिक जानकारी लेते समय यह ध्यान में आया कि प्रत्येक प्रकार की नक्काशी का एक अलग अर्थ तथा अलग महत्त्व होता है ।

विश्‍वगुरु भारत द्वारा संपूर्ण संसार को दी गई अद्भुत अविष्कारों की देन !

जबतक इस भारतभूमि पर ब्रह्मज्ञानी संतों का अवतरण होता रहेगा, तब तक भारत तथा उसकी संस्कृति की महिमा पुनःपुन प्रकट होती रहेगी । इसका प्रत्यक्षरूप से प्रमाण यह है कि लाखों हिन्दू, जो लोभवश अथवा विदेशी चमक-दमक से प्रभावित होकर भारतीय संस्कृति से दूर जा रहे थे, अब वे पुनः सहयोग, उपदेश तथा दीक्षा से स्वस्थ सहायक, स्नेही और सुखमय जीवन की ओर अग्रसर हो रहे हैं ।

रिफ्लेक्सॉलॉजी

संत-महात्माओं, ज्योतिषियों आदि के कथनानुसार आगामी काल भीषण आपदाओं से भरा होगा, जिसका सामना समाज को करना पडेगा । ऐसे काल में अपने और अपने परिजनों के स्वास्थ्य की रक्षा करना बडी चुनौती होगी ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में महाराष्ट्र में हिन्दू राष्ट्रजागृति अभियान के अंतर्गत चलाए गए विविध उपक्रम

धर्मप्रेमी तथा साधकों ने बोईसर के श्री हनुमान मंदिर की स्वच्छता की । इस अवसरपर मंदिर के न्यासियों ने मंदिर में मनौती मांगने के लिए अनुमति दी । कोपरखैरणे के श्री चिकानेश्‍वर शिव मंदिर की भी स्वच्छता की गई ।

हिन्दू देवताओं के चित्रवाले विदेशी पोस्ट के टिकट, पोस्टकार्ड और चलन के नोट !

विश्‍व में ऐसे अनेक देश हैं, जिनके पोस्ट के टिकटों पर, चलन के नोटों पर, हिन्दू देवताओं के चित्र हमें देखने मिलते हैं । श्रीलंका, थाइलैंड, इंडोनेशियाआदि देशोंं में आज भी हमें रामायण से संबंधित हिन्दू देवताओं पर आधारित चित्रवाले पोस्ट के टिकट, पोस्टकार्ड दिखाई देते हैं ।

परात्पर गुरु डॉ. जयंत बाळाजी आठवले के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में मुंबई में स्वच्छता अभियान का आयोजन !

१ मई को दत्तवाडी के धर्मप्रेमी तथा साधकों ने दत्त मंदिर की स्वच्छता की । श्री. संजय नारखेडे तथा श्री. कोल्हे ने इस कार्य के लिए सहकार्य किया । उस समय ११ तथा १२ वर्ष के दो लडके भी सम्मिलीत हुए । उसमें से एक लडके ने बताया कि, ‘‘साधकों के साथ मंदिर की स्वच्छता करने से हमें पुण्य प्राप्त होगा ।’’

चतुर्थी तिथि का महत्त्व तथा गणेशजी के विविध अवतारों के नाम एवं उनका कार्य

‘चतुर्थी’ तिथि के देवता श्री गणेशजी हैं; क्योंकि वे विघ्न दूर करनेवाले हैं । हमारी संस्कृति में श्रीगणेश एवं श्रीसरस्वती, इन दोनों देवताओं का बुद्धिदाता देवता के रूप में वर्णन है; परंतु इन दोनों देवताओं के कार्य भिन्न हैं ।

थाईलैंड का प्राचीन नगर – अयुद्धया

प्राचीन काल में जिसे श्याम देश कहा जाता था, वह भूभाग है, आज का थाईलैंड देश ! इस भूभागपर अभीतक अनेक हिन्दू तथा बौद्ध राजाआें ने राज्य किया । यहां की संस्कृति हिन्दू धर्मपर आधारित थी; परंतु कालांतर से बौद्धों के सांस्कृतिक आक्रमण के कारण इस स्थानपर बौद्ध धर्म प्रचालित हुआ ।

रामनाथी (गोवा) के सनातन के आश्रम में भावपूर्ण वातावरण में राजमातंगी यज्ञ संपन्न !

वैशाख कृष्ण पक्ष सप्तमी अर्थात ७ मई २०१८ को परात्पर गुुरु डॉ. जयंत आठवलेजी का ७६वां जन्मोत्सव समारोह संपन्न हुआ । परात्पर गुुरु डॉ. आठवलेजी की जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में रामनाथी (गोवा) के सनातन के आश्रम में विविध यज्ञ संपन्न हुए ।