सनातन-निर्मित सात्त्विक श्री गणेश मूर्ति

सनातन-निर्मित श्री गणेश मूर्ति के नाप

स्पंदनशास्त्रानुसार प्रत्येक आकृतिके स्पंदन, उसमें विद्यमान सत्त्व, रज एवं तम इन त्रिगुणोंके कारण पृथक होते हैं । आकृतिमें परिवर्तन होनेपर उसमें विद्यमान त्रिगुणाोंका अनुपात भी परिवर्तित होता है । देवताकी मूर्तिके संदर्भमें भी ऐसा ही है । श्री गणपतिके हाथकी लंबाई, मोटाई, आकार अथवा मुकुटकी कलाकृतियोंमें थोडा भी परिवर्तन करनेपर पूरे स्पंदन परिवर्तित हो जाते हैं । ऐसा न हो, इसके लिए मूर्तिके प्रत्येक अवयवका निर्माण करते समय सूक्ष्म-स्तरीय स्पंदनोंको भलीभांति समझकर, उसे ऐसे स्पंदनोंसे युक्त बनाना पडता है कि वे मूल तत्त्वसे मिलते-जुलते हों । सनातनके साधक-मूर्तिकारोंने ऐसे सूक्ष्म स्पंदनोंका अभ्यास कर सात्विक मूर्ति बनाई है । आगे इस गणेशमूर्तिके चित्र उसके नापके साथ दे रहे हैं । चित्रमें दिखाए अनुसार ३४.५ सें.मी. ऊंची गणेशमूर्ति एक आदर्शके (नमूनेके) रूपमें दी गई है । श्रद्धालुको जिस आकारकी मूर्ति बनवानी हो, उस आकारके अनुसार मूर्तिके नापमें परिवर्तन होगा ।

आकृतिके क्रमांकोंका विवरण

१ – पीढेके नीचेसे श्री गणपतिके मुकुटपर बने कलशका ऊपरी छोर = ३४.५ सें.मी.

२ – पीढेकी लंबाई = २४.५ ’’

३ – पीढेकी चौडाई = २२.५ ’’

४ – पीढेकी मोटाई = २.५ ’’

५ – मुकुटकी लंबाई = ७.८ ’’

६ – मुकुटकी चौडाई = ९.० ’’

७ – मुकुटकी ऊंचाई = ७.३ ’’

८ – मुकुटके पिछले भागके रिंगकी लंबाई = १०.१ ’’

९ – दोनों नेत्रोंमें अंतर = ३.० ’’

१० – पिछले दोनों हाथोंमें अंतर = २७.५ ’’

११ – श्री गणपतिके पेटकी चौडाई = १०.४ ’’

१२ – दोनों घुटनोंमें अंतर = २०.७ ’’

१३ – श्री गणपतिके पीढे(चौकी)की लंबाई = २२.०० ’’

१४ – श्री गणपतिके पीढेकी चौडाई = १४.५ ’’

१५ – श्री गणपतिके पीढेकी ऊंचाई = ४.५ ’’

संदर्भ :सनातनका ग्रंथ- श्री गणेशमूर्ति धर्मशास्त्रानुसार हो !