वर्तमान की ‘धर्मनिरपेक्ष’ लोकशाही व्यवस्था में हिन्दुओं का कल्याण असंभव ! – चेतन राजहंस, राष्ट्रीय प्रवक्ता, सनातन संस्था

विद्यमान धर्मनिरपेक्ष लोकशाही की रचना ही मूल हिन्दूविरोधी तथा अल्पसंख्यकप्रेमी है । भारतीय राज्यघटना द्वारा अल्पसंख्यंकों को सुरक्षा दी गई है ।

अच्छा कार्य करनेवालों को ही कष्ट सहन करना पडता है ! – सांसद अनिल शिरोळे, भाजपा

सनातन संस्था पर प्रतिबंध लगाने के षड्यंत्र का विरोध करने के लिए तथा इस प्रकार का प्रस्ताव खारिज करने की मांग करते हुए भाजपा के सांसद अनिल शिरोळे को निवेदन दिया गया ।

संस्था पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास कर हिन्दुत्व का गला घोंटने का षड्यंत्र कदापि सफल नहीं होने देंगे !

सनातन संस्था पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास कर हिन्दुत्व का गला घोंटने का यह षड्यंत्र हम सफल नहीं होने देंगे, एेसी चेतावनी सनातन संस्था के समर्थन में मार्ग पर उतरे हिन्दुत्वनिष्ठों ने दी ।

कहीं कुछ भी घटने पर, उसका संबंध सीधे सनातन से जोडना अयोग्य है ! – भाजपा विधायक शिवाजीराव नाईक

शिराळा मतदारसंघ के भाजपा विधायक श्री. शिवाजीराव नाईक ने मत व्यक्त करते हुए कहा कि कहीं कुछ भी घटने पर उसका संबंध सीधे सनातन से जोडना अयोग्य है । सनातन संस्था का कार्य अच्छा है ।

धर्मनिरपेक्ष शब्द की व्याख्या भारतीय संविधान में नहीं है ! – चेतन राजहंस, प्रवक्ता, सनातन संस्था

श्री. राजहंस पुढे म्हणाले, धर्मनिरपेक्ष हा ख्रिस्ती विचार आहे. भारतात तो अनावश्यक आहे. वर्ष १९७६ मध्ये आणीबाणीच्या वेळी विरोधी पक्षांच्या नेत्यांना कारागृहात डांबून काँग्रेसने ४२ वी घटनादुरुस्ती करून राज्यघटनेच्या प्रास्ताविकामध्ये धर्मनिरपेक्ष शब्द घातला होता.

प.पू. गुरुदेव की अपार कृपा से संत देखने गया एवं संत ही बन गया, एेसी अनुभूति लेनेवाले सनातन के १९ वें संत पू. रमेश गडकरीजी

सनातन संस्था में आने से पूर्व के प्रसंग तथा जानकारी लिखते समय गुरुदेव ने मुझे किस प्रकार संभाला है, इसका भान होकर मेरा कृतज्ञताभाव बढ गया ।

सनातन संस्था अध्यात्मप्रचार करती है, हिंसाचार नहीं ! – श्री. चेतन राजहंस, सनातन संस्था

महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दल ने पिछले कुछ दिनों में कुछ हिन्दुत्वनिष्ठों को बंदी बनाया । ये सभी सनातन के साधक हैं, ऐसा दुष्प्रचार कुछ आधुनिकतावादी व्यक्ति, संगठन, तथा कांग्रेस आदि दलों के राजनेता जानबूझकर कर रहे हैं । इस संदर्भ में समय-समय पर सनातन संस्था ने अपनी भूमिका स्पष्ट की है; वह हम आज फिर स्पष्ट कर रहे है …

तुकाराम बीज के दिन ही देहू स्थित नांदुरकी वृक्ष क्यों हिलता है ?

आज भी तुकाराम बीज के दिन नांदुरकी वृक्ष दोपहर को ठीक १२:०२ पर संत तुकाराम ने वैकुंठगमन के समय प्रत्यक्ष हिलता है और हजारों भक्तगण इसकी अनुभूति लेते हैं ।

ईश्‍वरनिष्ठ, राष्ट्रप्रेमी तथा धर्मप्रेमी सनातन संस्था को सभी हिन्दुत्वनिष्ठों का जोरदार समर्थन !

समाज के संत, वारकरी संप्रदाय, सनातन के पाठक, हितचिंतक विज्ञापनदाता, जिज्ञासु, धर्मप्रेमी तथा हिन्दुत्वनिष्ठ सनातन के साथ दृढता के साथ खडे हैं ।

साधकों को साधना के लिए प्रेम एवं लगन से मार्गदर्शन करनेवाले नाशिक निवासी सनातन के ४३ वें संत पू. महेंद्र क्षत्रिय !

पू. काकाजी का प्रत्येक साधक की आेर ध्यान रहता है । वे प्रत्येक साधक की साधना की पूछताछ करते हैं तथा उन्हें मार्गदर्शन कर ध्येय का स्मरण करवाते हैं ।