सनातन संस्था अध्यात्मप्रचार करती है, हिंसाचार नहीं ! – श्री. चेतन राजहंस, सनातन संस्था

बंदी बनाए गए हिन्दुत्वनिष्ठों को सनातन के साधक घोषित कर सनातन पर प्रतिबंध लगाने का हिन्दुविरोधियों का षड्यंत्र !

(बार्इं ओर से) हिन्दू जनजागृति समिति के मुंबई समन्वयक श्री. सागर चोपदार, सनातन संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस तथा हिन्दू जनजागृति समितीि के महाराष्ट्र एवं छत्तीसगड राज्यों के संगठक श्री. सुनील घनवट

मुंबई – महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दल ने पिछले कुछ दिनों में कुछ हिन्दुत्वनिष्ठों को बंदी बनाया । ये सभी सनातन के साधक हैं, ऐसा दुष्प्रचार कुछ आधुनिकतावादी व्यक्ति, संगठन, तथा कांग्रेस आदि दलों के राजनेता जानबूझकर कर रहे हैं । इस संदर्भ में समय-समय पर सनातन संस्था ने अपनी भूमिका स्पष्ट की है; वही हम आज भी स्पष्ट करना चाहते हैं । बंदी बनाए गए लोगों में से एक भी सनातन का साधक नहीं है । इनमें से कळसकर, अंदुरे, सुरळे बंधु, रेगे आदी पांच नाम तो हमने पहली बार ही सुने हैं । इसलिए उनसे सनातन का कोई भी संबंध न जोडा जाए । सनातन संस्था समाज में संवैधानिक मार्ग से अध्यात्म का प्रचार करती है और सनातन की कोई भी सीख हिंसा की दिशा में नहीं है । बंदी बनाए गए लोगों में से कुछ हिन्दुत्वनिष्ठ कार्यकर्ता, हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा आयोजित हिन्दू संगठन के विविध उपक्रमों में भले ही स्थानीय स्तर पर सहभागी होते थे, तथापि उनका अन्य विविध संगठनों के माध्यम से कार्य चल रहा था । इसलिए उन्हें गिरफ्तार कर यह कहना उपहासात्मक है कि सनातन पर प्रतिबंध लगाओ अथवा सनातन के प्रमुख को गिरफ्तार करो । ये बिलकुल वैसा ही है, जैसे कांग्रेस का समर्थन करनेवाले किसी दल के नेता की गिरफ्तारी पर कांग्रेस पर प्रतिबंध लगाओ अथवा राहुल गांधी को गिरफ्तार करो, यह कहना । इसमें अध्यात्मप्रचार करनेवाली छोटी-सी सनातन संस्था को सभी आधुनिकतावादी नेता लक्ष्य बना रहे हैं, फिर भी उनका वास्तविक उद्देश्य आगामी चुनावों को देखते हुए हिन्दू आतंकवाद के नाम से भाजपा सरकार को बदनाम करना है ।

सनातन संस्था पर लगाए जा रहे सभी आरोप एटीएस और सीबीआई इन जांच संस्थाआें से अनधिकृत रूप से प्राप्त जानकारी के आधार पर अर्थात सूत्रों से प्राप्त जानकारी के आधार पर लगाए जा रहे हैं । वास्तव में महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दल ने पत्रकार परिषद लेकर स्पष्ट किया था कि, इस प्रकरण में किसी भी विशिष्ट संगठन का नाम नहीं लिया गया है । पुलिस जांच अब तक प्राथमिक अवस्था में है । इससे यह प्रश्‍न उत्पन्न होता है कि इन सब समाचारों के पीछे कौनसा सोर्स है ? इसमें से किसी भी संस्था ने अधिकृत रूप से यह नहीं कहा है कि सनातन का कोई संबंध है । ऐसे में सनातन संस्था की जो मानहानि की जा रही है, वह अत्यंत खेदजनक है । इससे सनातन के हजारों साधक, लाखों शुभचिंतकों की भी समाज में मानहानि हो रही है, यह ध्यान में रखकर समाचार दें, ऐसी विनती है । साथ ही यह मानहानि रोकने हेतु विवश होकर सनातन संस्था ने इस अनधिकृत जानकारी के आधार पर लगाए जानेवाले झूठे आरोपों के संदर्भ में न्यायालयीन अभियोग प्रविष्ट करने का निर्णय लिया है ।

पिछले २७ वर्षों से अविरत जारी तेजस्वी धर्मप्रचार का कार्य करनेवाली संस्था के रूप में आज तक सनातन संस्था पहचानी जाती है । अल्पावधि में मिला जनाधार और हुआ कार्य का विस्तार इसका प्रमाण है । आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ कि संस्था ने कोई भी उपक्रम बिना अनुमति के लिया, किसी भी कार्यक्रम में गडबड हुई, कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगडी । आज तक सनातन संस्था के विरुद्ध एक भी अपराध प्रविष्ट नहीं हुआ है । इसका कारण यह है कि हम संवैधानिक मार्ग, लोकतांत्रिक मूल्य, न्यायव्यवस्था और कानून व्यवस्था का केवल सम्मान ही नहीं करते, अपितु उसके अनुसार आचरण भी करते हैं । ऐसी एक आध्यात्मिक संस्था को इतने गंभीर प्रकरणों में बिना सबूतों के जिम्मेदार मानना, आश्‍चर्यजनक है । यह हम पर हुआ अन्याय है । यह अन्याय बंद किया जाए, ऐसी विनती मैं आप सभी से करता हूं ।

आज तक के किसी भी प्रकरण के (ठाणे विस्फोट, मडगाव विस्फोट, चारों हत्या प्रकरण) आरोप-पत्रों में कहीं भी सनातन संस्था का नाम नहीं है । कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि सनातन संस्था आरोपी है । कहीं भी ऐसा उल्लेख नहीं है कि सनातन संस्था ने देशद्रोही कृत्य किया है; तब भी सनातन संस्था पर प्रतिबंध की मांग करना, अनुचित और तथ्यहीन है ।

आतंकवाद विरोधी दल न्यायालय में इस प्रकरण में गिरफ्तार आरोपियों के उद्देश्य की जांच करने हेतु पुलिस कस्टडी की मांग करती है और यहां बाहर, जांच होने से पूर्व मराठा आंदोलन में विस्फोट करने का षड्यंत्र, बकरी ईद में खूनखराबे का षड्यंत्र, ५०० प्रशिक्षित कार्यकर्ताआें की सेना इत्यादि आरोप लगाए जा रहे हैं, सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें सर्वत्र फैलाया जा रहा है, ये सब राजनीतिक षड्यंत्र है । शासन को इस प्रकरण में प्रसारित किए जानेवाले जातिवाचक संदेशों की जांच भी करनी चाहिए और इसके पीछे निश्‍चित रूप से  कौन है, यह खोजना चाहिए ।

हिन्दुत्वनिष्ठ शासन सत्ता में है, इसलिए हिन्दुत्व को बदनाम कर राजनीतिक रोटियां सेंकने का और सनातन जैसी निर्दोष संस्था को समाप्त करने का यह एक प्रयास है । कुत्ते को पागल घोषित करो और मार डालो यह इन धर्मविरोधियों का षड्यंत्र है । इसलिए सूज्ञ पत्रकार इस षड्यंत्र की बलि न चढें, यह हमारी विनती है । ऐसा होते हुए भी सनातन संस्था का धर्मप्रसार का कार्य हम अधिक दृढता से, गति से और शक्ति से करने का प्रयास करेंगे, साथ ही सनातन संस्था पर थोपा जा रहा अघोषित प्रतिबंध कदापि सफल नहीं होने देंगे, ऐसा हमने निश्‍चय किया है । ऐसी भूमिका सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस ने मुंबई के मराठी पत्रकार संघ में आयोजित सनातन संस्था की पत्रकार परिषद में रखी । इस समय हि्न्दू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र एवं छत्तीसगड राज्यों के संगठक श्री. सुनील घनवट तथा हिन्दू जनजागृति समिति के मुंबई समन्वयक श्री. सागर चोपदार उपस्थित थे |

 

हिन्दू जनजागृति समिति का हिन्दू संगठन का कार्य रोकने का षड्यंत्र !

हिन्दू जनजागृति समिति समाज में धर्मशिक्षा देकर हिन्दू संगठन का कार्य करती है । इस कारण विविध विचारधाराएं, कार्यपद्धतियों से युक्त हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों को संगठित करने का कार्य समिति के माध्यम से किया जा रहा है । अतएव पूरे देश के संगठन इससे जुड रहे हैं । हिन्दुआें का प्रभावी संगठन, आज हिन्दुआें पर हो रहे अन्याय के विरुद्ध बडी संख्या में आंदोलन कर रहा है । इस कारण हिन्दूविरोधी शक्तियां इस कार्य को बंद करने के लिए हिन्दू जनजागृति समिति को लक्ष्य बना रही है । परंतु समिति का हिन्दू संगठन का कार्य हिन्दू समाज प्रत्यक्ष देख रहा है, इसलिए हमारा विश्‍वास है कि वह ऐसे षड्यंत्र की बलि नहीं चढेगा, ऐसा हिन्दू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र एवं छत्तीसगड राज्यों के संगठक श्री. सुनील घनवट ने इस समय बताया ।

– श्री. चेतन राजहंस, प्रवक्ता, सनातन संस्था.

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