बेंगलुरू के ‘प्रथम कन्नड साहित्य सम्मेलन’ में सनातन के ग्रंथों की प्रदर्शनी

राजराजेश्वरी नगर में ३० सितंबर को ‘प्रथम कन्नड साहित्य सम्मेलन’ आयोजित किया गया था । इस सम्मेलन में सनातन संस्था की ओर से ग्रंथप्रदर्शनी लगाई गई ।

सनातन संस्था की सहायता के लिए सदैव सिद्ध हूं ! – श्री. प्रशांत सातव, भाजपा

सनातन का कार्य अच्छा है । आप को कभी भी सहायता की आवश्यकता पडी, तो मैं सहायता के लिए सदैव सिद्ध हूं । भाजपा के श्री. प्रशांत सातव ने ऐसा प्रतिपादित किया ।

सनातन संस्था धर्मशास्त्र बताकर समाज का उद्बोधन करती है ! – श्रीमती नयना भगत, सनातन संस्था

सनातन संस्था ‘आदर्श गणेशोत्सव कैसे मनाएं ?’, साथ ही शास्त्र के अनुसार श्री गणेशपूजन तथा विसर्जन कैसे करना चाहिए ?, इस विषय में उद्बोधन करती है । श्री गणेशजी की मूर्ति प्लास्टर ऑफ पैरिस की न होकर शाडू मिट्टी की होनी चाहिए, यह हमारा मत है ।

गुरुदेवजी के प्रति अचल श्रद्धा रखनेवाले सनातन के ७वें संत पू. पद्माकर होनपजी (आयु ७० वर्ष) की साधनायात्रा

मेरा बचपन गांव में बीत गया । मैं जब ७-८ वर्ष का था, तभी मेरे पिताजी का देहांत हुआ । मां, दादी, ३ बडे भाई, मैं और बहन इतने लोग नान्नज के घर में रहते थे । हमने ७वीं कक्षातक की पढाई वहीं पूर्ण की ।

संस्था पर प्रतिबंध लगाने की मांग के विरोध में ‘राष्ट्रीय हिन्दू आंदोलन’ !

नालासोपारा विस्फोटक प्रकरण में बंदी बनाए गए निर्दोेष हिन्दुत्वनिष्ठों के समर्थन में एवं सनातन संस्था पर प्रतिबंध की, की जा रही मांग के विरोध में ३० सितंबर को राष्ट्रीय हिन्दू आंदोलन किया गया।

रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम में सवत्स गौं का पूजन !

२५ सितंबर २०१८ को यहां के सनातन आश्रम में सवत्स गाय का (जिस गौ ने ७ दिन के अंदर के बछडे को जन्म दिया है ) पूजन सनातन की सद्गुरु श्रीमती बिंदा सिंगबाळ एवं सद्गुरु श्रीमती अंजली गाडगीळ के शुभहाथों किया गया ।

आनंदप्राप्ति की इच्छा क्यों होती है ?

आनंद जीव का एवं विश्व का स्थायीभाव, स्वभाव, स्वधर्म है । इसलिए अपने मूल स्वरूप को पाना, अर्थात आनंद प्राप्त करना एवं मूल स्वरूप को पाकर होनेवाली आनंद की अनुभूति को बनाए रखना ही जीव की स्वाभाविक प्रवृत्ति है ।

खरा सुख कैसे  प्राप्त करें ?

मनुष्य सुख के लिए निरंतर प्रयत्नशील रहता है, फिर भी वह दिनोदिन अधिकाधिक दुःखी हो रहा है । थोडा-बहुत तो खरा सुख मिले, इसके लिए आगे कुछ उपाय बताए गए हैं ।

कौन अधिक सुखी रहता है ?

आत्मदर्शन के ध्येय से प्रेरित व्यक्तियों को अपने सांसारिक सुख-दुःख ही क्या, प्राणिमात्र के सुख-दुःख के संबंध में भी कुछ नहीं लगता । इसके विपरीत, जो केवल परिवार का अथवा अपना ही विचार करता है, वह अधिकांशतः आजीवन दुःखी रहता है ।