संस्था पर प्रतिबंध लगाने की मांग के विरोध में ‘राष्ट्रीय हिन्दू आंदोलन’ !

नालासोपारा विस्फोटक प्रकरण में बंदी बनाए गए निर्दोेष हिन्दुत्वनिष्ठों के समर्थन में एवं सनातन संस्था पर प्रतिबंध की, की जा रही मांग के विरोध में ३० सितंबर को राष्ट्रीय हिन्दू आंदोलन किया गया।

रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम में सवत्स गौं का पूजन !

२५ सितंबर २०१८ को यहां के सनातन आश्रम में सवत्स गाय का (जिस गौ ने ७ दिन के अंदर के बछडे को जन्म दिया है ) पूजन सनातन की सद्गुरु श्रीमती बिंदा सिंगबाळ एवं सद्गुरु श्रीमती अंजली गाडगीळ के शुभहाथों किया गया ।

आनंदप्राप्ति की इच्छा क्यों होती है ?

आनंद जीव का एवं विश्व का स्थायीभाव, स्वभाव, स्वधर्म है । इसलिए अपने मूल स्वरूप को पाना, अर्थात आनंद प्राप्त करना एवं मूल स्वरूप को पाकर होनेवाली आनंद की अनुभूति को बनाए रखना ही जीव की स्वाभाविक प्रवृत्ति है ।

खरा सुख कैसे  प्राप्त करें ?

मनुष्य सुख के लिए निरंतर प्रयत्नशील रहता है, फिर भी वह दिनोदिन अधिकाधिक दुःखी हो रहा है । थोडा-बहुत तो खरा सुख मिले, इसके लिए आगे कुछ उपाय बताए गए हैं ।

कौन अधिक सुखी रहता है ?

आत्मदर्शन के ध्येय से प्रेरित व्यक्तियों को अपने सांसारिक सुख-दुःख ही क्या, प्राणिमात्र के सुख-दुःख के संबंध में भी कुछ नहीं लगता । इसके विपरीत, जो केवल परिवार का अथवा अपना ही विचार करता है, वह अधिकांशतः आजीवन दुःखी रहता है ।

सुख-दुःख के क्या कारण हैं ?

सुख की इच्छा ही दुःख का कारण है । दुःख के बंधनों से छूटने का एक ही मार्ग है और वह है ऐहिक सुख की कामना को नष्ट करना; क्योंकि सुख की इच्छा से ही मनुष्य पुण्य करने जाता है, परंतु साथ ही पाप भी कर बैठता है और जन्म-मृत्यु का यह कालचक्र चलता रहता है ।

सुख – दुःख की परिभाषा और उनका महत्त्व क्या है ?

केवल मनुष्य की ही नहीं, अपितु अन्य प्राणि की भागदौड भी अधिकाधिक सुखप्राप्ति के लिए ही होती है । इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति पंचज्ञानेंद्रिय, मन एवं बुद्धि द्वारा विषय सुख भोगने का प्रयत्न करता है; परंतु विषय सुख तात्कालिक एवं निम्न श्रेणी का होता है, तो दूसरी ओर आत्मसुख, अर्थात आनंद चिरकालीन एवं सर्वोच्च श्रेणी का होता है ।

देवी की मूर्ति गिरने पर तथा भग्न होने पर क्या करें ?

मूर्ति भग्न हो जाना, यह आगामी संकट की सूचना होती है । इसलिए शास्त्र में घर तथा देवालय में विद्यमान भग्न मूर्ति का विसर्जन कर वहां नई मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा करने से पहले अघोर होम, तत्त्वोत्तारण विधि (भग्न मूर्ति में विद्यमान तत्त्व को निकालकर उसे नई मूर्ति में प्रस्थापित करना) इत्यादि विधियां करने के लिए कहा गया है ।

सनातन संस्था का विचारकों की हत्याओं में सहभाग नहीं ! – दीपक ढवळीकर, अध्यक्ष, मगोप, गोवा

सनातन संस्था अच्छा कार्य कर रही है । सनातन अध्यात्म का प्रसार करती है तथा यह शिक्षा आज का राष्ट्र और संपूर्ण विश्व के लिए अत्यंत आवश्यक है ।