सुख-दुःख के क्या कारण हैं ?

सुख की इच्छा ही दुःख का कारण है । दुःख के बंधनों से छूटने का एक ही मार्ग है और वह है ऐहिक सुख की कामना को नष्ट करना; क्योंकि सुख की इच्छा से ही मनुष्य पुण्य करने जाता है, परंतु साथ ही पाप भी कर बैठता है और जन्म-मृत्यु का यह कालचक्र चलता रहता है ।

सुख – दुःख की परिभाषा और उनका महत्त्व क्या है ?

केवल मनुष्य की ही नहीं, अपितु अन्य प्राणि की भागदौड भी अधिकाधिक सुखप्राप्ति के लिए ही होती है । इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति पंचज्ञानेंद्रिय, मन एवं बुद्धि द्वारा विषय सुख भोगने का प्रयत्न करता है; परंतु विषय सुख तात्कालिक एवं निम्न श्रेणी का होता है, तो दूसरी ओर आत्मसुख, अर्थात आनंद चिरकालीन एवं सर्वोच्च श्रेणी का होता है ।

देवी की मूर्ति गिरने पर तथा भग्न होने पर क्या करें ?

मूर्ति भग्न हो जाना, यह आगामी संकट की सूचना होती है । इसलिए शास्त्र में घर तथा देवालय में विद्यमान भग्न मूर्ति का विसर्जन कर वहां नई मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा करने से पहले अघोर होम, तत्त्वोत्तारण विधि (भग्न मूर्ति में विद्यमान तत्त्व को निकालकर उसे नई मूर्ति में प्रस्थापित करना) इत्यादि विधियां करने के लिए कहा गया है ।

सनातन संस्था का विचारकों की हत्याओं में सहभाग नहीं ! – दीपक ढवळीकर, अध्यक्ष, मगोप, गोवा

सनातन संस्था अच्छा कार्य कर रही है । सनातन अध्यात्म का प्रसार करती है तथा यह शिक्षा आज का राष्ट्र और संपूर्ण विश्व के लिए अत्यंत आवश्यक है ।

सनातन संस्था पर संभावित प्रतिबंध एवं हिन्दुत्वनिष्ठों पर अन्यायकारी कार्रवाई के विरोध में वाराणसी में ज्ञापन

हिन्दू जनजागृति समिति, सनातन संस्था एवं अन्य समविचारी हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों को झूठे प्रकरण में फंसाकर उनके निरपराध कार्यकर्ताआें की गिरफ्तारी, इन संगठनों पर प्रतिबंध की मांग के विरोध में; केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के नाम से यहां जिला प्रशासन को हिन्दुत्वनिष्ठ संगठन एवं अधिवक्ताआें ने हाल ही में निवेदन दिया ।

हिन्दू धर्म में छोटे बच्चों का श्राद्धकर्म न करने के कारण

यहां छोटे बच्चे वे होते हैं, जिनके दांत नहीं आए हों, साथ ही जिन में हड्डियां बनने की प्रक्रिया पूर्ण न हुई हो और उनकी मृत्यु हुई हो, तो उनका श्राद्ध नहीं किया जाता ।

हिन्दू राष्ट्र की स्थापना में आनेवाली अडचनें दूर होने के लिए रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम में कार्तिकेय यज्ञ संपन्न !

सनातन आश्रम में २९ सितंबर को कार्तिकेय यज्ञ संपन्न हुआ । सनातन की सद्गुरु (श्रीमती) अंजली गाडगीळ एवं सद्गुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळ ने यज्ञ का संकल्प किया ।

(कहते हैंं) हिंसावादी सनातन संस्था पर प्रतिबंध क्योंं नहीं लगाया जाता ?

अब पुरोगामी विचारकों की हत्याओं के लिए उत्त्तरदायी अपराधियों का रहस्य स्फोट हो रहा है । सनातन संस्था से उनकी सांठगाठ सिद्ध हो रही है ।

(कहते हैंं), कहीें ऐसा तो नहीं कि सनातनवालों ने चूहे एवं घूसों को नहर में छोडा हो

सनातन का इस विषय से कोई संबंध न रहते हुए भी टीवी-९ के प्रतिनिधि ने कहा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि ये चूहे, घूस एवं खेकडे पाकिस्तान से आए हो ।