प्रदर्शनी से भारतीय संस्कृति की वास्तविक जानकारी मिलते देखकर प्रसन्नता प्रतीत हुई ! – महामंडलेश्‍वर डॉ. स्वामी प्रेमानंद महाराज

इस प्रदर्शनी में भारतीय संस्कृति की वास्तविक जानकारी दिए जाने का देखकर मुझे बहुत प्रसन्नता लग रही है । संत नामःभारत साधु समाज के राष्ट्रीय संगठनमंत्री महामंडलेश्‍वर डॉ. स्वामी प्रेमानंद महाराज ने २४ जनवरी को ऐसा प्रतिपादित किया ।

प्रयागराज में गणतंत्र दिवस पर लगाई गई क्रांतिकारियों के छायाचित्रों की प्रदर्शनी को जनता का उत्स्फूर्त प्रत्युत्तर !

गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में २६ जनवरी को सायंकाल ५ बजे अक्षयवट एवं बडे हनुमान मार्गपर हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से क्रांतिकारी एवं राष्ट्रपुरुषों के छायाचित्रों की प्रदर्शनी लगाई गई ।

शिशू के जन्म उपरांत कौनसे संस्कार करें ? (चौथा, पांचवां, छठा एवं सातवां संस्कार)

जातकर्म विधि के उद्देश्य हैं – उदकप्राशनादि से गर्भसंबंधी दोषों का निवारण हो एवं पुत्रमुख देखने से पुत्र का पिता ऋणत्रयी से (पितृऋण, ऋषिऋण, देवऋण से) तथा समाजऋण से मुक्त हो ।

सनातन संस्था साधुओं से भी श्रेष्ठ कार्य कर रही है ! – पू. फरशीवालेबाबा

सनातन की प्रदर्शनी बहुत ही सुंदर है । आप तो साधुओं से भी श्रेष्ठ कार्य कर रहे हैं । सभी साधुओं ने यदि इस पद्धति से धर्मकार्य किया, तो हिन्दू राष्ट्र स्थापना में विलंब नहीं लगेगा । कई लोक अपना संप्रदाय और पंथ को बढाने हेतु कार्य करते हैं; किंतु आप (सनातन) केवल हिन्दू धर्म के लिए कार्य कर रहे हैं ।

संपूर्ण विश्‍व में सनातन संस्था जैसे अध्यात्म विश्‍वविद्यालय की आवश्यकता है ! – वृंदावन आचार्य नित्यानंद गिरी महाराज

संपूर्ण विश्‍व में सनातन संस्था जैसे अध्यात्म विश्‍वविद्यालय की आवश्यकता है; क्योंकि आज विश्‍व बम, बारूद और क्षेपणास्त्रों की कगार पर खडा है । आज शांति की ओर कोई अग्रसर नहीं है, अपितु सर्वत्र उत्पात के प्रयास किए जा रहे हैं ।

आठवां संस्कार : चौलकर्म ( चूडाकर्म, चोटी रखना )

चूडा अर्थात पुरुष की शिखा (चोटी) । यह शिखा सिर पर सहस्रारचक्र के स्थान पर रखी जाती है । इस स्थान पर स्थित केश छोडकर शेष केश कटवाने की क्रिया को चौलकर्म अथवा चूडाकर्म कहते हैं ।

नौवां संस्कार : उपनयन (व्रतबंध, मुंज अथवा जनेऊ )

उपनयन का अर्थ है, गायत्री मंत्र सीखने हेतु गुरु के (शिक्षक के) पास ले जाना । नयन शब्द का अर्थ आंख भी है । उपनयन अर्थात अंतःचक्षु । जिस विधि से अंतःचक्षु खुलने लगते हैं अथवा खुलने में सहायता होती है, उसे उपनयन कहते हैं ।

गंगास्नान के विषय में भ्रम फैलाने का हिन्दूद्वेषियों का षड्यंत्र सफल न होने दें ! – सनातन संस्था

कुंभपर्व के उपलक्ष्य में करोडों श्रद्धालु गंगानदी में डुबकी लगाकर अपने पापों का क्षालन करते है । ऐसे श्रद्धायुक्त कुंभपर्व में कुछ हिन्दूद्वेषियों की ओर से विदेशी शक्तियों की सहायता लेकर गंगास्नान के प्रति भ्रम फैलाया जा रहा है ।

श्री क्षेत्र आप्पाचीवाडी-कुरली (कर्नाटक) के श्री हालसिद्धनाथ देवता तथा श्री बिरदेवजी का भक्तोंसहित रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रम में शुभागमन !

आनेवाले भीषण संकटकाल में साधकों की रक्षा हेतु तथा हिन्दू राष्ट्र स्थापना हेतु साधकों को आशीर्वाद प्रदान करने हेतु श्री क्षेत्र आप्पाचीवाडी-कुरली (तहसील निपाणी, जनपद बेळगाव, कर्नाटक) के श्री हालसिद्धनाथ देव तथा श्री बिरदेवजी का २५ जनवरी की सुबह १०.३० बजे सनातन के रामनाथी आश्रम में मंगलमय वातावरण में शुभागमन हुआ ।

दसवां संस्कार : मेधाजनन

इस विधि में पलाश के छडी पर ‘सुश्रव’ यह मंत्र पाठ करते हुए ब्रह्मचारी को (बटु) (ब्रह्मवृक्ष की) डाली के चारों ओर सर्व जल छोडते हुए उसकी तीन बार परिक्रमा करनी पडती है ।