भविष्य में सनातन का कार्य प्रखर सूर्य की भांति प्रकाशमान होगा ! – महामंडलेश्‍वर १००८ श्री स्वामी स्वरूपानंद गिरी महाराज

मध्य प्रदेश के उज्जैन के पंचायती अखाडा श्री निरंजनी पीठाधीश्‍वर तथा श्री चारधाम मंदिर के महामंडलेश्‍वर १००८ श्री स्वामी शांती स्वरूपानंद गिरी महाराज ने ३० जनवरी को सनातन के प्रयागराज में लगाई गई धर्मशिक्षा प्रदर्शनी का अवलोकन किया ।

गर्भाधान (ऋतुशान्ति) संस्कार (प्रथम संस्कार)

इस संस्कार में विशिष्ट मंत्र एवं होमहवन से देह की शुद्धि कर, अध्यात्मशास्त्रीय दृष्टिकोण एवं आरोग्य की दृष्टि से समागम करना चाहिए, यह मंत्रों द्वारा सिखाया जाता है ।

प्रयागराज (कुंभनगरी) में सनातन संस्था द्वारा आयोजित की गई ग्रंथप्रदर्शनी को श्री अभिषेक महाराज की सदिच्छा भेट

दरबार श्री पिंडोंरी धाम के श्री अभिषेक महाराज ने २७ जनवरी को यहां के कुंभमेले में सनातन संस्था द्वारा आयोजित की गई ग्रंथप्रदर्शनी को सदिच्छा भेंट दी ।

सनातन के कार्य को मैं भी सहकार्य करूंगा ! – श्री महंत कृष्णदास महाराज, राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय श्री पंच दिगंबर अग्नि अखाडा

२८ जनवरी को अखिल भारतीय श्री पंच दिगंबर अग्नि अखाडा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री महंत कृष्णदास महाराज ने सनातन की ग्रंथप्रदर्शनी को भेंट दी ।

नामकरण

जिसप्रकार बच्चे का लिंग गर्भाशय में ही निश्चित होता है, उस प्रकार बच्चे का नाम भी पूर्वनिश्चित ही होता है । शब्द, स्पर्श, रूप, रस एवं गंध, ये घटक एकत्रित रहते हैं; इसीलिए बच्चे का जो रूप है उसके अनुसार उसका नाम भी होता है ।

सनातन का कार्य अच्छा है ! – श्री श्री १०८ श्री महंत घनश्यामदास बापू

सनातन की ग्रंथप्रदर्शनी उत्कृष्ट है और सनातन का कार्य भी अच्छा है । गुजरात राज्य के राजकोट के अखिल भारतीय वैष्णव विरक्त संत महामंडल के श्री श्री १०८ घनश्यामदास महाराज ने २७ जनवरी को ऐसा प्रतिपादित किया ।

‘सनातन की सीख का अनुभव कर साधना करने से साधक अध्यात्म के परमशिखरतक पहुंचेंगे !’

महाराष्ट्र के रत्नागिरी जनपद के नाणीज के जगद्गुरु नरेंद्राचार्य महाराज संस्थान के स्वीय साहायक श्री. सुनील ठाकुर तथा कार्यकर्ता श्री. राजन बोडेकर ने यहां की सनातन की ग्रंथप्रदर्शनी का अवलोकन किया ।

सनातन की ग्रंथप्रदर्शनी देखकर यहां से कहीं भी जाने का मन नहीं करता ! – महंत श्री देवनारायणदास वेदांताचार्य महाराज, कानपुर, उत्तरप्रदेश

२७ जनवरी को कानपुर जनपद के गोरियापुर गांव के अखिल भारतीय श्रीपंचबारामाई दाडीया संस्थान के (खालसा के) महंत श्री देवनारायणदास वेदांताचार्य महाराज प्रदर्शनी देखने आए थे ।

तीसरा संस्कार : सीमंतोन्नयन

सीमंतोन्नयन शब्द सीमंत (मांग की रेखा) एवं उन्नयन (केश ऊपर से पीछे की ओर करना), इन दो शब्दों से बना है । सीमंतोन्नयन अर्थात पत्नी के सिर के केश ऊपर से पीछे की ओर कर मांग निकालना ।

प्रयागराज कुंभमेले के माध्यम से ‘सनातन संस्था’ का व्यापक धर्मप्रचार !

कुंभक्षेत्र की सीमा २५ किमी. है । इसके हृदयस्थान संगमक्षेत्र के समीप स्थित मोरी मार्ग के पास ‘सनातन संस्था’ को स्थान मिलना, केवल गुरुकृपा थी । कुंभक्षेत्र में आनेवाले श्रद्धालुओं में ३० प्रतिशत लोगों को इस क्षेत्र से जाना पडता है ।