संपूर्ण विश्‍व में सनातन संस्था जैसे अध्यात्म विश्‍वविद्यालय की आवश्यकता है ! – वृंदावन आचार्य नित्यानंद गिरी महाराज

संपूर्ण विश्‍व में सनातन संस्था जैसे अध्यात्म विश्‍वविद्यालय की आवश्यकता है; क्योंकि आज विश्‍व बम, बारूद और क्षेपणास्त्रों की कगार पर खडा है । आज शांति की ओर कोई अग्रसर नहीं है, अपितु सर्वत्र उत्पात के प्रयास किए जा रहे हैं ।

आठवां संस्कार : चौलकर्म ( चूडाकर्म, चोटी रखना )

चूडा अर्थात पुरुष की शिखा (चोटी) । यह शिखा सिर पर सहस्रारचक्र के स्थान पर रखी जाती है । इस स्थान पर स्थित केश छोडकर शेष केश कटवाने की क्रिया को चौलकर्म अथवा चूडाकर्म कहते हैं ।

नौवां संस्कार : उपनयन (व्रतबंध, मुंज अथवा जनेऊ )

उपनयन का अर्थ है, गायत्री मंत्र सीखने हेतु गुरु के (शिक्षक के) पास ले जाना । नयन शब्द का अर्थ आंख भी है । उपनयन अर्थात अंतःचक्षु । जिस विधि से अंतःचक्षु खुलने लगते हैं अथवा खुलने में सहायता होती है, उसे उपनयन कहते हैं ।

गंगास्नान के विषय में भ्रम फैलाने का हिन्दूद्वेषियों का षड्यंत्र सफल न होने दें ! – सनातन संस्था

कुंभपर्व के उपलक्ष्य में करोडों श्रद्धालु गंगानदी में डुबकी लगाकर अपने पापों का क्षालन करते है । ऐसे श्रद्धायुक्त कुंभपर्व में कुछ हिन्दूद्वेषियों की ओर से विदेशी शक्तियों की सहायता लेकर गंगास्नान के प्रति भ्रम फैलाया जा रहा है ।

श्री क्षेत्र आप्पाचीवाडी-कुरली (कर्नाटक) के श्री हालसिद्धनाथ देवता तथा श्री बिरदेवजी का भक्तोंसहित रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रम में शुभागमन !

आनेवाले भीषण संकटकाल में साधकों की रक्षा हेतु तथा हिन्दू राष्ट्र स्थापना हेतु साधकों को आशीर्वाद प्रदान करने हेतु श्री क्षेत्र आप्पाचीवाडी-कुरली (तहसील निपाणी, जनपद बेळगाव, कर्नाटक) के श्री हालसिद्धनाथ देव तथा श्री बिरदेवजी का २५ जनवरी की सुबह १०.३० बजे सनातन के रामनाथी आश्रम में मंगलमय वातावरण में शुभागमन हुआ ।

दसवां संस्कार : मेधाजनन

इस विधि में पलाश के छडी पर ‘सुश्रव’ यह मंत्र पाठ करते हुए ब्रह्मचारी को (बटु) (ब्रह्मवृक्ष की) डाली के चारों ओर सर्व जल छोडते हुए उसकी तीन बार परिक्रमा करनी पडती है ।

कुंभपर्व की तिसरी गंगा ‘सरस्वती नदी’ सनातन की ग्रंथप्रदर्शनी के रूप में बह रही है ! – श्री प्रभु नारायण करपात्री

संत श्री. प्रभु नारायण करपात्री ने कहा, ईशान्य भारत के मिजोरम, मेघालय, असम, त्रिपुरा और मणिपुर में लाखों हिन्दुओं ने धर्मांतरण कर ईसाई पंथ को अपनाया है । वहां हिन्दुओं को पैसों के लालच देकर धर्मांतरित किया गया है ।

कुंभपर्व मे सनातन की धर्मशिक्षा एवं राष्ट्र-धर्मरक्षा से संबंधित फलक प्रदर्शनी का जिज्ञासु, साधु-संत-महंतों द्वारा उत्स्फूर्त प्रत्युत्तर !

मुझे सनातन की ग्रंथप्रदर्शनी बहुत अच्छी लगी । इस प्रदर्शनी को देखकर हम निशब्द हो गए हैं । संपूर्ण कुंभपर्व में ऐसा धर्मज्ञान कहां होगा, ऐसा हमें नहीं लगता ।

महानाम्नीव्रत, महाव्रत, उपनिषद्व्रत, गोदानव्रत (ग्यारहवां, बारहवां, तेरहवां एवं चौदहवां संस्कार )

ग्यारहवें संस्कार से लेकर चौदहवां संस्कार, इन चार व्रतों को चतुर्वेदव्रत कहते हैं । ये व्रत ब्रह्मचर्याश्रम में आचार्य करवाते हैं ।

रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम में श्री चामुंडादेवी याग संपन्न

सद्गुुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी ने २८ दिसंबर २०१८ को संपन्न याग का संकल्प लिया । उसके पश्‍चात गणेशपूजन के पश्‍चात सद्गुुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी ने चामुंडादेवी याग, पूर्णाहुति, कुष्मांड बली और उसके पश्‍चात महाआरती उतारी गई ।