कुंभपर्व की तिसरी गंगा ‘सरस्वती नदी’ सनातन की ग्रंथप्रदर्शनी के रूप में बह रही है ! – श्री प्रभु नारायण करपात्री

संत श्री. प्रभु नारायण करपात्री ने कहा, ईशान्य भारत के मिजोरम, मेघालय, असम, त्रिपुरा और मणिपुर में लाखों हिन्दुओं ने धर्मांतरण कर ईसाई पंथ को अपनाया है । वहां हिन्दुओं को पैसों के लालच देकर धर्मांतरित किया गया है ।

कुंभपर्व मे सनातन की धर्मशिक्षा एवं राष्ट्र-धर्मरक्षा से संबंधित फलक प्रदर्शनी का जिज्ञासु, साधु-संत-महंतों द्वारा उत्स्फूर्त प्रत्युत्तर !

मुझे सनातन की ग्रंथप्रदर्शनी बहुत अच्छी लगी । इस प्रदर्शनी को देखकर हम निशब्द हो गए हैं । संपूर्ण कुंभपर्व में ऐसा धर्मज्ञान कहां होगा, ऐसा हमें नहीं लगता ।

महानाम्नीव्रत, महाव्रत, उपनिषद्व्रत, गोदानव्रत (ग्यारहवां, बारहवां, तेरहवां एवं चौदहवां संस्कार )

ग्यारहवें संस्कार से लेकर चौदहवां संस्कार, इन चार व्रतों को चतुर्वेदव्रत कहते हैं । ये व्रत ब्रह्मचर्याश्रम में आचार्य करवाते हैं ।

रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम में श्री चामुंडादेवी याग संपन्न

सद्गुुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी ने २८ दिसंबर २०१८ को संपन्न याग का संकल्प लिया । उसके पश्‍चात गणेशपूजन के पश्‍चात सद्गुुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी ने चामुंडादेवी याग, पूर्णाहुति, कुष्मांड बली और उसके पश्‍चात महाआरती उतारी गई ।

पंद्रहवां संस्कार : समावर्तन संस्कार 

समावर्तन संस्कार के समय आगे दी गई बातें मंत्रपूर्वक करते हैं – वस्त्रधारण, काजलधारण, कुंडलधारण, पुष्पमालाधारण, पादत्राणधारण, छत्रधारण, दंडधारण, स्वर्णमणिधारण । अब पुत्र गृहस्थाश्रम में लौटनेवाला है, अतः उसे इस विधि द्वारा गृहस्थाश्रम में रहना सिखाया जाता है ।

अखिल भारतवर्ष के कुंभपर्व का धार्मिक महत्त्व !

कुंभपर्व अत्यंत पुण्यकारी होने के कारण इस पर्व में प्रयाग, हरद्वार (हरिद्वार), उज्जैन एवं त्र्यंबकेश्‍वर-नासिक में स्नान करने से अनंत पुण्यलाभ मिलता है । इसीलिए करोडों श्रद्धालु और साधु-संत यहां एकत्रित होते हैं ।

विदेशी नागरिकों के लिए श्रद्धा और आकर्षण का केंद्र बना कुंभपर्व !

कुंभपर्व केवल हिन्दुओं के लिए ही नहीं, अपितु विदेशी नागरिकों के लिए भी श्रद्धा का परमोच्च शिखर है । अखिल मनुष्यजाति का उद्धार करनेवाले इस कुंभपर्व में सहभागी होना सौभाग्य है !

सनातन के साधकों के संतसेवा में लीन होने से उनके मुखमंडलपर संतसंगती का आनंद झलकता है ! – श्री श्री १००८ श्री महामंडलेश्‍वर महंत रघुवीरदास महात्यागी महाराज

सनातन के सभी साधकों की ओर देखकर बहुत प्रसन्न लगता है । उसके कारण यह है कि वे संतसेवा में लीन हैं; इसलिए संतसंगती का आनंद उनके मुखपर झलकता है ।

सनातन संस्था का धर्मजागृति का महान कार्य देखकर मन को संतोष हुआ ! – लक्ष्मण बेहरे, संघचालक, गोवा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गोवा संघचालक ने १८ जनवरी को सनातन के रामनाथी आश्रम का अवलोकन किया ।

जोधपुर (राजस्थान में) सनातन संस्था की ग्रंथप्रदर्शनी का अच्छा प्रत्युत्तर !

जोधपुर के पोलो प्रांगणपर हाल ही में अंतराष्ट्रीय माहेश्‍वरी महाअधिवेशन का आयोजन किया गया था ।