दीपावली के मंगल दिनपर रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रम में भावपूर्ण वातावरण में श्री लक्ष्मी-कुबेर पूजन !

साधकों को ऐसा प्रतीत हुआ कि परात्पर गुरुदेवजी की कृपा से देवी स्वयं का ही पूजन कर रही हैं, इस अलौकिक चैतन्य समारोह का अनुभव हुआ ।

धनतेरस के उपलक्ष्य में धर्मप्रसार कार्य हेतु सत्पात्र दान देकर श्री लक्ष्मीजी की कृपा संपादन करें !

धर्मप्रसार करनेवाले संत, साथ ही राष्ट्र एवं धर्म की रक्षा हेतु कार्य करनेवाली संस्थाएं अथवा संगठनों के कार्य हेतु दान देना काल के अनुसार सर्वश्रेष्ठ दान है ।

दृष्टिहीन संत सूरदासजी की भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य भक्ति के दर्शन !

‘सूरदासजी ने प्रभु श्रीकृष्ण की नित्यनूतन पदों से शब्दपूजा करने का अपना नित्यक्रम जारी रखा । एक दिन पुजारी, अर्चनक (पूजा करनेवाला) और गोस्वामी के बच्चों में सूरदासजी की अद्भुत प्रतिभा के बारे में चर्चा प्रारंभ हुई ।

श्रीकृष्णतत्त्व आकर्षित करनेवाली रंगोलियां

सनातन हिंदू धर्म में अनेक त्यौहार हैं । उस दिन वातावरण में त्यौहार से संबंधित विशिष्ट देवता का तत्त्व प्रचुर मात्रा में कार्यरत रहता है । इस तत्त्व का लाभ अधिक से अधिक होने हेतु प्रयास किए जाते हैं ।

सनातन संस्था की सद्गुरु (कु.) अनुराधा वाडेकरजी की साधनायात्रा विशद करनेवाले चरित्र ग्रंथ का भावपूर्ण वातावरण में प्रकाशन

मुलुंड सेवासंघ में २१ अक्टूबर २०१९ को आयोजित भावसमारोह में डॉ. विजय जंगम के हस्तों मराठी चरित्रग्रंथ ‘सद्गुरु (कु.) अनुराधा वाडेकरजी यांचे साधनापूर्व जीवन आणि साधनाप्रवास (साधना की अंतर्मुखता एवं उन्नति हेतु किए गए प्रयासोंसहित)’ का भावपूर्ण वातावरण में लोकार्पण किया गया ।

गायन का सूर यदि अंतरंग के आनंदमय कोष से न आए तो श्रीकृष्ण के आने का मार्ग अवरुद्ध होता है ! – प.पू. देवबाबा, किन्नीगोळी, मंगळूरू

‘गायन का सुर अपने अंतरंग के आनंदमय कोष से आना चाहिए । सूर इस प्रकार से नहीं मिला, तो श्रीकृष्ण के आने का मार्ग अवरुद्ध हो जाता है ।

एक कलाकार की अहंकारी मानसिकता देखने पर परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने बताई स्वभावदोष और अहं के निर्मूलन की प्रक्रिया लागू करने का महत्त्व ध्यान में आना

समाज में ऐसे कई कलाकार होते हैं, जो जानते तो थोडा ही ; किन्तु अपनी बात से अपनी बढाई अधिक करते हैं । इस से ‘कलाकारों ने परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने बताई स्वभावदोष और अहं के निर्मूलन की प्रक्रिया का अवलंबन करना कितना महत्त्व का हैं’, यह ध्यान में आता हैं ।

दत्तात्रेय-तत्त्व आकर्षित और प्रक्षेपित करनेवाली कुछ रंगोलियां

भगवान दत्तात्रेय की पूजा से पूर्व तथा दत्त जयंती के दिन घर पर अथवा देवालय में दत्तात्रेय-तत्त्व आकर्षित और प्रक्षेपित करने वाली सात्त्विक रंगोलियां बनानी चाहिए ।

लक्ष्मीदेवीतत्त्व आकर्षित करनेवाली रंगोलियां

मंगलवार, शुक्रवार, कोजागरी पूर्णिमा, धनत्रयोदशी, यमदीपदान, देवदीपावली एवं श्री लक्ष्मीपूजनके शुभ प्रसंगमें लक्ष्मीतत्त्व की रंगोलियां बनाएं ।