श्री समर्थ रामदासस्वामी के पदस्पर्श से पावन हुए ‘जांब’ क्षेत्र की जानकारी और कभी भी न रिक्त होनेवाले घी के गागर की विस्मयकारक कथा

समर्थ रामदासस्वामी के चरित्र में उल्लेखित घी की गागर श्रीक्षेत्र जांब के श्रीराम मंदिर में हमें देखने मिलती है । जिससे आज भी घी निकलता है ।

श्रीक्षेत्र नीरा-नृसिंहपुर की महिमा

पुणे जनपद के पूर्व-दक्षिण कोण की दिशा में नीरा और भीमा नदियों के संगम तट पर श्रीक्षेत्र नीरा-नृसिंहपुर बसा है । जिनके कुलदेवता ‘नृसिंह’ हैं, वे इस तीर्थक्षेत्र में जाकर श्री नृसिंह के दर्शन करें ।

उत्तम स्वास्थ्य हेतु भोजन निश्‍चित समय पर करना आवश्यक !

एक आहार पचने के बाद ही दूसरा आहार करना चाहिए, यह भोजन का सबसे सरल सिद्धांत है । आयुर्वेद के अनुसार निश्चित समय पर भोजन करने से पाचनक्रिया ठीक रहती है । इस लेख में, आयुर्वेद के अनुसार भोजन करने का उचित समय बताया गया है ।

हिमाचल प्रदेश में ‘भलेई माता मंदिर’

शिमला, हिमाचल प्रदेश में स्थित ‘भलेई माता मंदिर’ के विषय में वहां के भक्तों की श्रद्धा है कि यहां की देवी की मूर्ति से जब पसीना निकलता है, तब पूजक की मनोकामना पूर्ण होती है ।

५१ शक्तिपीठों में से एक बांगलादेश के सीताकुंड गांव के (जि. चितगाव) भवानीदेवी का मंदिर !

चितगांव जिले में निसर्गरम्य स्थान पर पहाडी की तलहटी में बसे सीताकुंड नामक गांव में एक शक्तिपीठ है । यहां की दुर्गादेवी को भवानी देवी कहते हैं । सीताकुंड में माता सती का दायां हाथ गिरा था ।

कोरोना विषाणुओं के विरुद्ध स्‍वयं में प्रतिरोध शक्‍ति बढाने के लिए आध्‍यात्मिक बल प्राप्‍त हो, इसके लिए ईश्‍वर द्वारा सुझाया नामजप !

कोरोना विषाणुओं के विरुद्ध स्वयं में प्रतिरोधक शक्ति बढाने के लिए चिकित्सकीय सुझाव और चिकित्सा के साथ ही ईश्वर द्वारा सुझाए गए इन ३ देवतातत्त्वों के अनुपात के अनुसार निम्नांकित नामजप तैयार हुआ ।

पुण्यनदी गोदावरी

पुण्यनदी गोदावरी, हिन्दू संस्कृति की एक ऐतिहासिक और समृद्ध धरोहर है ! इस पुण्यसलिला के तट पर सनातन धर्म की संस्कृति का विकास हुआ ।गोदावरी का इतिहास, उत्तर भारतीय और दक्षिण भारतीय संस्कृतियों के संगम का इतिहास है ।

ग्रंथराज दासबोध

समर्थ रामदास स्वामी ने ग्रंथ दासबोध का लेखन उनके शिष्य कल्याण स्वामी ने किया था । दासबोध का प्रत्येक समास ऐसा लगता है, जैसे वह प्रत्येक मनुष्यजन्म के अनुभवों की गठरी हो, इतना उसमें जीवनसंदेश ओतप्रोत भरा है ।

श्रीक्षेत्र राक्षसभुवन के पांचालेश्‍वर मंदिर का इतिहास एवं महिमा

महाराष्ट्र के बीड जनपद के गेवराई तहसील में स्थित श्रीक्षेत्र राक्षसभुवन में गोदावरी में श्री पांचालेश्वर मंदिर है ।

अध्यात्मप्रसार

समाज की सात्त्विकता बढाने के लिए आज सहस्रों साधक संस्था के मार्गदर्शन में तन, मन, धन का त्याग कर समाज में अध्यात्मशास्त्र का प्रसार कर रहे हैं ।