दंड (कानून) के भय से ही समाजव्यवस्था सुचारू रूप से चलती है ! – चेतन राजहंस, प्रवक्ता, सनातन संस्था

ज्ञानम् महोत्सव के पहले दिन ‘जनसंख्या नियंत्रण’ विषयपर विचारगोष्ठी का आयोजन

‘जनसंख्या नियंत्रण’ विचारगोष्ठी में सहभागी मान्यवर

जयपुर (राजस्थान) : दूरदर्शन पर ‘हम दो हमारे दो’ का सरकारी विज्ञापन विगत अनेक दशकों से दिखाया जा रहा है । जो सभ्य समाज होता है, वह केवल उद्बोधन से ही उचित आचरण करता है; परंतु जो समाज षड्यंत्रकारी होता है, उसका उद्बोधन विज्ञापनों के माध्यम से नहीं होगा । ऐसे लोगों के लिए कानून की ही आवश्यकता पडेगी । इसीलिए हमारे धर्मशास्त्रों में ‘दंड (कानून) के भय से ही समाजव्यवस्था सुचारू रूप से चलेगी’, ऐसा कहा गया है । सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस ने यहां के ज्ञानम् महोत्स के पहले दिन आयोजित ‘जनसंख्या नियंत्रण के लिए उद्बोधन अथवा कानून’में बोलते हुए ऐसा प्रतिपादित किया । इस विचारगोष्ठी में जनसंख्या समाधान फाऊंडेशन के अध्यक्ष श्री. अनिल चौधरी, ’जनसंख्या एवं विकास’ विषय के विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र कोठारी एवं कश्मीरी विस्थापित हिन्दू श्रीमती ममता सहगल सहभागी हुईं । निमित्तकेन संस्था के संयोजक श्री. जय आहुजा ने इस विचारगोष्ठी का संचालन किया ।

श्री. चेतन राजहंस ने इस विचारगोष्ठी में कहा,

१. भारत में १२४ करोड आधारकार्ड धारक हैं; इसका अर्थ इतने पंजीकृत नागरिक हैं । अभीतक २० प्रतिशत नागरिक विशेषरूप से छोटे बच्चे पंजीकृत नहीं हैं । देश में ५ से ७ करोड बांग्ला देशी एवं रोहिंग्या अवैधरूप से रह रहे हैं । इन सभी आंकडों को देखा जाए, तो देश की जनसंख्या १३० करोड नहीं, अपितु १५० करोड होती है, जो चीन से भी अधिक है । चीन में प्रतिमिनट ११ बच्चे जन्म लेते हैं, तो भारत में ३३ बच्चे जन्म लेते हैं । इसके कारण आनेवाले १-२ वर्षों में हम जनसंख्या के संदर्भ में चीन को पीछे ढकेल देंगे ।

२. भारत की भौगोलिक स्थिति ४० करोड जनसंख्या का अच्छे प्रकार से निर्वहन कर सकती है । आज असीमित जनसंख्या बढने से भारत को अन्न एवं प्राकृतिक संसाधन आयात करने पड रहे हैं, साथ ही देश में बेरोजगारी, निरक्षरता, निर्धनता, भूखमरी आदि समस्याएं भी बढ रही हैं ।

३. वर्ष २०११ की जनगणना के अनुसार हिन्दुओं का जननवृद्धिदर प्रतिवर्ष १.५५ करोड है, तो मुसलमानों का १.८ करोड है । अतः वर्ष २०१६ में प्रकाशित ब्यौरे के अनुसार भारत वर्ष २०६१

स्रोत : दैनिक सनातन प्रभात