‘कोरोना’ जैसे महासंकट और साधना
आज हम सभी जण ‘कोरोना’ नामक एक महासंकट का सामना कर रहे हैं । गत सदी में पोलियो, प्लेग, मलेरिया जैसी भयंकर महामारी के कारण लाखों लोगों की मृत्यु हुई थी, ऐसा हमने केवल सुना था ।
आज हम सभी जण ‘कोरोना’ नामक एक महासंकट का सामना कर रहे हैं । गत सदी में पोलियो, प्लेग, मलेरिया जैसी भयंकर महामारी के कारण लाखों लोगों की मृत्यु हुई थी, ऐसा हमने केवल सुना था ।
आजकल के स्पर्धा और भाग-दौड-भरे जीवन में सात्त्विकता बचाने के लिए छोटी-से-छोटी क्रिया शास्त्रानुसार करने से लाभ निश्चित होता है ।
ऐतिहासिकदृष्टि से देखने पर दक्षिण-पूर्व एशिया भाग पर प्राचीन भारतीय संस्कृति की पकड थी । इसलिए थायलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, फिलिपीन्स, कंबोडिया, व्हिएतनाम जैसे असंख्य अधिराज्य समृद्धशाली हुए ।
द्वितीय महायुद्ध के समय जर्मनी और ब्रिटन में युद्ध हुआ था । ब्रिटन में पहले ४ दिनों में ही १३ लाख लोगों को स्थलांतर करना पडा था । युद्धकाल में वे प्रकाशबंदी भी आरंभ हो गई ।
भारत में आनेवाले आपातकाल का सामना करने के लिए प्रशासन पर निर्भर न रहते हुए नागरिकों को अपने स्तर पर तैयारी करनी चाहिए ।
अर्थ न जानते हुए वेदमंत्र पढनेवाला बिना पत्ते, पुष्प और फलों के वृक्षसमान शुष्क है, केवल भारवाही तथा खंभे समान है ।
अध्यात्मप्रसार के साथ समाजसहायता, राष्ट्ररक्षण और धर्मजागृति के लिए ‘सनातन संस्था’ विविध उपक्रम आयोजित करती है ।
‘धर्मो रक्षति रक्षित:’, अर्थात जो धर्म का पालन करता है, उसकी रक्षा धर्म अर्थात ईश्वर करते हैं । धर्म का ही नाश हो गया, तो राष्ट्र पर संकट आने में अधिक समय नहीं लगेगा ।
रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम में सात्त्विक कलाकृतियों की सेवा के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी से युक्त संगणकों की आवश्यकता हैं !
इस वर्ष होनेवाले सर्व गुरुपुष्यामृत योगों में गुरु ग्रह मकर राशि में होगा । मकर राशि (नीच राशि) गुरु ग्रह के लिए अशुभ होती है । सुवर्ण खरीदी करने के लिए यह ‘गुरुपुष्यामृत योग’ बहुत लाभदायी नहीं ।