निर्माण-कार्य की सेवा करते समय डॉ. भोसले को परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी से सीखने के लिए मिले अनमोल सूत्र !

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी प्रतिदिन सवेरे ७ बजे निर्माण-कार्य का निरीक्षण करने आते थे ।

प्रीति के अथाह सागर परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के विषय में साधक के मन में संग्रहित भावमोति !

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी आरंभ में अध्यात्मप्रसार हेतु गोवा आते थे । उस समय गोवा में ५ स्थानों पर सार्वजनिक सभा का नियोजन था ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का आदर्श जीवन

प.पू. डॉक्टरजी की अलौकिकता का शब्दों में वर्णन करना असंभव है’, ऐसा महर्षि बताते हैं और साधकों ने प्रत्यक्ष में यह अनुभव भी किया है । मैं पिछले १६ वर्ष से प.पू. डॉक्टरजी के सान्निध्य में साधना कर रहा हूं । इस कालखंड में उनके संदर्भ में अनेक अनुभूतियां मुझे भी हुई हैं ।

योगतज्ञ दादाजी वैशंपायन

२५.७.२०१० को योगतज्ञ दादाजी वैशंपायन सत्कर्म सेवा सोसाइटी की ओर से परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी को सम्मानपत्र और पंद्रह सहस्र रुपए देकर योगतज्ञ दादाजी वैशंपायन गुणगौरव पुरस्कार प्रदान किया गया ।

गुरुकुल समान आश्रमोंका निर्माण !

साधकों को पूर्णकालीन साधना के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध हो, इसलिए परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी ने गुरुकुल समान आश्रमों की निर्मिति की है ।

विविध संतों द्वारा किया गया परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का सम्मान !

संत ही संतों को पहचान सकते हैं और वे ही अन्य संतों के कार्य का महत्त्व समझ सकते है । परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के आध्यात्मिक कार्य का महत्त्व ज्ञात होने से अनेक संतों ने परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी को सम्मानित एवं पुरस्कार देकर गौरवान्वित किया ।

आश्रम के रसोईघर का रूपांतर आदर्श अन्नपूर्णा कक्ष में करते समय परम पूज्य डॉक्टरजी का अथक परिश्रम और सब स्तरों पर सुनियोजन तथा फलोत्पत्ति बढाने हेतु मार्गदर्शन !

प.पू. डॉक्टरजी ने अन्नपूर्णाकक्ष को सुव्यवस्थित करने के लिए अथक प्रयास किया । आरंभ के दिनों में छोटी-छोटी बातों से अन्नपूर्णाकक्ष की बडी योजनाआें तक उन्होंने व्यक्तिगत रूप से ध्यान दिया और रसोईघर को अन्नपूर्णा-कक्ष बनाया ।

विविध संतों से मार्गदर्शन प्राप्त कर, अध्यात्मशास्त्र का अध्ययन और वैसा आचरण करनेवाले परम पूज्य डॉक्टरजी !

‘डहाणू के एक संत परम पूज्य (प.पू.) अण्णा करंदीकर आयुर्वेदीय चिकित्सालय में रोगियों को देखने प्रत्येक महीने ३ दिन दादर (मुंबई) आते थे । उस समय प.पू. (डॉ.) आठवलेजी अध्यात्म का प्रायोगिक दृष्टि से अध्ययन कर रहे थे ।

भारत मोर्चा के संस्थापक तथा पूर्व सांसद श्री. वैकुंठलाल शर्मा उपाख्य प्रेमसिंह शेर ने प्राप्त किया ६३ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर

अखंड भारत मोर्चा के संस्थापक, साथ ही देहली के पूर्व सांसद श्री. वैकुंठलाल शर्मा उपाख्य प्रेमसिंह शेर का १७ दिसंबर को ८७ वां जन्मदिवस मनाया गया, साथ ही अखंड भारत मोर्चा का १८ वां स्थापना दिवस भी मनाया गया ।

प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ नियतकालिक सनातन प्रभातके माध्यमसे पत्रकारिताका कार्य

हिन्दू राष्ट्र स्थापना का संदेश प्रसारित करने के लिए (परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवलेजी ने सनातन प्रभात नियतकालिक आरंभ किए । वे सनातन प्रभात समूह के संस्थापक संपादक हैं । २८ अप्रैल १९९८ से १९ अप्रैल २०००, इस कालखंड में वे संपादक रहे ।