श्रीरामतत्त्व आकर्षित करनेवाली रंगोलियां

संवत्सरारंभ, श्रीरामनवमी, आदित्यपूजन, दशहरा (विजयादशमी) एवं मकरसंक्रांति तिथी पर श्रीरामतत्त्व की रंगोलियां बनाएं ।

श्रीकृष्णतत्त्व आकर्षित करनेवाली रंगोलियां

सनातन हिंदू धर्म में अनेक त्यौहार हैं । उस दिन वातावरण में त्यौहार से संबंधित विशिष्ट देवता का तत्त्व प्रचुर मात्रा में कार्यरत रहता है । इस तत्त्व का लाभ अधिक से अधिक होने हेतु प्रयास किए जाते हैं ।

दत्तात्रेय-तत्त्व आकर्षित और प्रक्षेपित करनेवाली कुछ रंगोलियां

भगवान दत्तात्रेय की पूजा से पूर्व तथा दत्त जयंती के दिन घर पर अथवा देवालय में दत्तात्रेय-तत्त्व आकर्षित और प्रक्षेपित करने वाली सात्त्विक रंगोलियां बनानी चाहिए ।

लक्ष्मीदेवीतत्त्व आकर्षित करनेवाली रंगोलियां

मंगलवार, शुक्रवार, कोजागरी पूर्णिमा, धनत्रयोदशी, यमदीपदान, देवदीपावली एवं श्री लक्ष्मीपूजनके शुभ प्रसंगमें लक्ष्मीतत्त्व की रंगोलियां बनाएं ।

श्री दुर्गादेवीतत्त्व आकर्षित करनेवाली सात्त्विक रंगोलियां

विशेषकर मंगलवार एवं शुक्रवारके दिन देवीपूजनसे पूर्व तथा नवरात्रिकी कालावधिमें घर अथवा देवालयोंमें देवीतत्त्व आकृष्ट  एवं प्रक्षेपित करनेवाली सात्त्विक रंगोलियां बनाएं ।

संगीताभ्यास कैसे करना चाहिए ?

ऐसा कहा जाता है कि संगीत एक ईश्‍वरीय देन है और जिसपर ईश्‍वर की कृपा है, वह गा सकता है; परंतु ईश्‍वर ने सभी को स्वयं के क्रियमाण के आधारपर अपना स्वप्न साकार करने की शक्ति दी है ।

भूमिपर सद्गुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी के पदचिन्ह अंकित होनेपर उनमें विविध शुभचिन्ह दिखाई देना

१०.३.२०१८ को रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रम में आयोजित सौरयाग के दिन भूमिपर सद्गुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी के पदचिन्ह अंकित हुए तथा उनमें विविध शुभचिन्ह दिखाई दे रहे थे ।

गाने का अभ्यास करते समय सद्गुरु (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी द्वारा किया गया मार्गदर्शन

जब हम आरती गाना आरंभ करते हैं, उसके पश्चात उस देवता का सगुण तत्त्व कार्यरत होता है तथश आरती की पंक्तियों में से अंतिम अक्षर का उच्चारण कर रुकनेपर पुनः निर्गुण तत्त्व कार्यरत होता है ।

गोमय से बनी अशास्त्रीय गणेशमूर्ति उपासक को आध्यात्मिक दृष्टि से लाभदायक न होकर धर्मशास्त्रानुसार बनी सनातन-निर्मित शास्त्रीय गणेशमूर्ति आध्यात्मिक दृष्टि से लाभदायक होना

गोमय से बनी अशास्त्रीय गणेशमूर्ति एवं मिट्टि से बनी शास्त्रीय गणेशमूर्ति इनसे प्रक्षेपित होनेवाले स्पंदनों का विज्ञान की सहायता से अध्ययन करने हेतु ९.३.२०१८ के दिन रामनाथी, गोवा स्थित सनातन के आश्रम में ‘महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय’ की ओर से एक प्रयोग किया गया ।