योगतज्ञ दादाजी वैशंपायन द्वारा दी गई संस्कारित दत्तमूर्ति का परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी द्वारा आध्यात्मिक उपचारों के लिए उपयोग करने पर उस दत्तात्रेय मूर्ति पर हुआ परिणाम

‘परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी विश्वकल्याण हेतु सत्त्वगुणी लोगों का ईश्वरी राज्य स्थापित करने हेतु प्रयासरत हैं । ज्योतिषशास्त्रानुसार वर्ष १९८९ से उनके जीवन में अनेक बार महामृत्युयोग आए हैं ।

समष्टि कल्याण हेतु लाखों कि.मी. की दैवीय यात्रा करनेवाली सद्गुरु (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी !

सद्गुुरु (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी ने विगत ७ वर्षों में भारत के २९ राज्यों में से २४ राज्य तथा ७ केंद्रशासित प्रदेशों में से ४ प्रदेशों की यात्रा की हैं ।

सनातन के संतों की पंक्ति में जयपुर (राजस्थान) की श्रीमती गीतादेवी खेमका (आयु ७६ वर्ष) ८३वें संतरत्न के रूप में विराजमान !

झारखंड राज्य के धर्मप्रसारसेवक पू. प्रदीप खेमकाजी की माताजी श्रीमती गीतादेवी खेमका (आयु ७६ वर्ष) सनातन के ८३वें संतपदपर विराजमान हुईं ।

रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम में स्थित ध्यानमंदिर की देवताएं जागृत होकर उनके संदर्भ में विविध अनुभूतियां प्राप्त होना तथा उसका शास्त्र !

रामनाथी, गोवा के सनातन के आश्रम में विद्यमान देवताआें की मूर्तियां तथा प्रतिमाएं पहले की अपेक्षा बडी मात्रा में जागृत हुई हैं ।

सनातन के रामनाथी, गोवा के आश्रम के ध्यानमंदिर में दीपों की विशेषतापूर्ण सजावट

संतश्रेष्ठ ज्ञानेश्वरजी के कथनानुसार दीप चाहे जितना भी छोटा हो; परंतु उसमें संपूर्ण कक्ष को प्रकाशमान करने का सामर्थ्य होता है ।

साक्षीभाव, स्थिरता तथा नम्रता, इन गुणों से युक्त सनातन के आश्रम में रहनेवाले बलभीम येळेगाकर दादाजी ८२वें संत के रूप में संतपदपर विराजमान !

संत पू. (श्रीमती) अश्विनी पवारजी ने आश्रम के साधक श्री. बलभीम येळेगावकर (आयु ८४ वर्ष) संतपदपर विराजमान होने की घोषणा की ।

आयु का बंधन तोडकर परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का आज्ञापालन करनेवाले छत्तीसगढ स्थित दुर्ग के सनातन के १८ वें संतरत्न पू. चत्तरसिंह इंगळे (आयु ८८ वर्ष) !

‘छत्तीसगढ के दुर्ग में मार्गदर्शन के लिए कोई नहीं है, तब भी पू. चत्तरसिंह इंगळेजी ने साधना कर संतपद प्राप्त किया तथा उनकी आगे की उन्नति भी हो ही रही है ।

विद्युत दीप से युक्त प्लास्टिक का दीया और मोम का दीया जलाने से वातावरण में नकारात्मक स्पंदन प्रक्षेपित होते हैं, जबकि तिल का तेल और कपास की बाती लगे मिट्टी के पारंपरिक दीये से सकारात्मक स्पंदन प्रक्षेपित होते हैं !

भाईयो और बहनो, दीवाली में विद्युत चीनी दीये और मोम के दीयों को दूर रखें, तिल का तेल और कपास की बाती डालकर मिट्टी के पारंपरिक दीये लगाकर उनका आध्यात्मिक स्तर पर लाभ उठाएं !’ 

गुरुदेवजी के प्रति अचल श्रद्धा रखनेवाले सनातन के ७वें संत पू. पद्माकर होनपजी (आयु ७० वर्ष) की साधनायात्रा

मेरा बचपन गांव में बीत गया । मैं जब ७-८ वर्ष का था, तभी मेरे पिताजी का देहांत हुआ । मां, दादी, ३ बडे भाई, मैं और बहन इतने लोग नान्नज के घर में रहते थे । हमने ७वीं कक्षातक की पढाई वहीं पूर्ण की ।

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“Satpatre daanam”