सोलापुर (महाराष्ट्र) की सनातन संस्था की ६६वीं संत पू. नंदिनी मंगळवेढेकरजी (आयु ७८ वर्ष) की साधनायात्रा !

विविधतापूर्ण सेवाएं करनेवाली तथा परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के निरंतर साथ होने की अनुभूति करनेवाली सनातन की संत पू. नंदिनी मंगळवेढेकर की साधनायात्रा को उन्हीं के शब्दों में जान लेते हैं ।

सादगीभरी जीवनशैली और उच्च विचारधारावाले निरासक्त कर्मयोगी बेळगाव (कर्नाटक) के ७१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त पू. (डॉ.) नीलकंठ अमृत दीक्षितजी (आयु ९० वर्ष) !

मेरे विवाह के पश्‍चात मेरे पति ने कर्नाटक राज्य के अनेक गांवों मे चिकित्सीय अधिकारी के रूप में काम किया; परंतु उन्होंने कभी अपने अधिकार का दुरुपयोग किया हो, ऐसा मैने कभी नहीं देखा ।

सनातन आश्रम में कोटा पटिया पर अपनेआप बने ॐ के चारों ओर श्‍वेत वलय निर्मित होना

साधना करने से व्यक्ति की आध्यात्मिक शक्ति जैसे-जैसे बढती है, वैसे-वैसे उसमें तथा उसके आसपास की वस्तुओं में भी, अनेक सकारात्मक परिवर्तन होने लगते हैं ।

प्रेमभाव एवं परात्पर गुरु डॉक्टरजी के प्रति अनन्य भाव आदि गुणों से युक्त शालिनी माईणकरदादीजी (आयु ९२ वर्ष) !

शालिनी माईणकरजी (आयु ९२ वर्ष) विगत २७ वर्षों से सनातन संस्था के मार्गदर्शन में साधना कर रही हैं । आजकल वे उनकी पुत्री श्रीमती मेधा विलास जोशीसहित नंदनगद्दा, कारवार, कर्नाटक में रहती हैं ।

परात्पर गुरु पांडे महाराज का छायाचित्रमय जीवनदर्शन

ईश्वर की कृपा से ही प.पू. बाबाजी के छायाचित्रों द्वारा दर्शाया गया यह अल्प परिचय उनके चरणों में सविनय अर्पण करते हैं !

भाव, आनंद, चैतन्य एवं ज्ञान का मूर्तिमंत रूप तथा ‘जैसा बोले वैसा चले, वंदनीय उसके चरण ।’ इस वचन को यथार्थ बनानेवाले एकमेवोद्वितीय महान तपस्वी परात्पर गुरु पांडे महाराज !

स्वयं ज्ञानी होते हुए भी परात्पर गुरु पांडे महाराज में कृतज्ञता एवं शरणागत भाव का अपूर्व संगम था । ऐसा तपोवृद्ध एवं ज्ञानवृद्ध महान व्यक्तित्व का अभाव हम सभी को नित्य प्रतीत होगा ।

यज्ञ का प्रथमावतार ‘अग्निहोत्र’के विषय में वैज्ञानिक शोध !

विज्ञान के माध्यम से अग्निहोत्र का वातावरणपर क्या परिणाम होता है ?, इसके अध्ययन हेतु महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय की ओर से एक परीक्षण किया गया । इस परीक्षण हेतु यू.टी.एस्. (युनिवर्सल थर्मो स्कैन) उपकरण का उपयोग किया गया ।

एक दिन यज्ञ करने से १०० यार्ड क्षेत्र में १ मासतक प्रदूषण नहीं हो सकता ! – अवकाश वैज्ञानिक डॉ. ओमप्रकाश पांडेय

बेंगलुरु की प्रयोगशाला में किए गए परीक्षण से यह प्रमाणित हुआ है कि हम हवन और यज्ञ कर स्वयं को रोगों से दूर रख सकते हैं । एक दिन यज्ञ करने से १०० यार्ड क्षेत्र में १ मासतक प्रदूषण नहीं हो सकता ।

सनातन के ४२ वें समष्टि संत पू. अशोक पात्रीकरजी द्वारा वर्णित ‘एक अभियंता’ से ‘संत’ बनने तक की साधना यात्रा !

पू. अशोक पात्रीकरजी यवतमाळ (महाराष्ट्र) में शासन के ‘जीवन प्राधिकरण’ विभाग में ‘शाखा अभियंता’ के पद पर कार्यरत थे, तब वर्ष १९९७ में उनका संपर्क सनातन संस्था से हुआ ।

सनातन की गुरुपरंपरा !

भृगु महर्षिजी ने जीवनाडीपट्टीवाचन में कहा, परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी स्वयं में विद्यमान गुरुशक्ति को संक्रमित कर उन्हें (सद्गुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी एवं सद्गुरु (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी) आध्यात्मिक उत्तराधिकारी’ घोषित करें’

Donating to Sanatan Sanstha’s extensive work for nation building & protection of Dharma will be considered as

“Satpatre daanam”