प.पू. डॉक्टरजी द्वारा निर्मित रामनाथी आश्रम का महर्षि द्वारा विविध उपमा देकर किया गया वर्णन

रामनाथी आश्रम साक्षात श्रीमत् नारायण का वैकुंठ लोक है; क्योंकि अवतार लीला करनेवाले भगवान श्रीकृष्ण यहां प्रत्यक्ष विराजमान हैं । 

वाहिनी पर प्रदर्शित होनेवाली धार्मिक मालिकाओं के संगीत में सात्त्विकता तथा पंडित जसराज द्वारा गाए आलापों के संदर्भ में साधक को प्राप्त ज्ञान !

लगभग ४-५ वर्ष पूर्व मैंने ‘देवों के देव महादेव’ नामक धारावाहिक की कुछ कडियां देखी थीं । उसमें बीच-बीच में पंडित जसराज के विशेषता से परिपूर्ण आलाप सुने । तत्पश्चात् मुझे उसका विस्मरण हुआ था;किंतु ४ माह पूर्व मुझे नींद में पंडित जसराज के आलाप लगातार सुनाई देने लगे ।

सनातन आश्रम में दत्तमाला के मंत्र जपते समय आश्रम परिसर में हुआ वैशिष्ट्यपूर्ण प्राकृतिक परिवर्तन

दत्तमाला मंत्र’ का पाठ प्रारंभ करने पर सनातन आश्रम के परिसर में गूलर के ५८ पौधे उगना और ये पौधे अर्थात प.पू. डॉक्टरजी के आसपास सुरक्षा-कवच निर्माण होने का द्योतक है, ऐसा योगतज्ञ दादाजी वैशंपायनजी ने बताया

सनातनचे प्रसारसेवक श्री. नीलेश सिंगबाळ (आयु ५१ वर्ष) सनातन के ७२ वे समष्टी संतपद पर विराजमान !

पूर्व उत्तरप्रदेश, झारखंड, बंगाल तथा ओडिशा इन राज्यों के सनातन के प्रसारसेवक तथा सद्गुरु (श्रीमती ) बिंदा सिंगबाळ के पति श्री. नीलेश सिंगबाळ (आयु ५१ वर्ष) १८ दिसम्बर को सनातन के ७२ वे समष्टी संतपद पर विराजमान हुए ।

रामनाथी आश्रम परिसर में एक संत के कक्ष के सामने गूलर वृक्ष को आए पत्ते अधिक हरे-भरे दिखाई देना !

अन्य वृक्षों की तुलना में अधिक हरे-भरे दिखाई देनेवाले गूलर (उदुंबर) वृक्ष की पत्ते

देवद (पनवेल) के सनातन के आश्रम में शिवगिरी महाराज की पादुका तथा दत्तपालकी का चैतन्यमय वातावरण में आगमन !

शिवगिरी महाराज की पादुका तथा दत्तगुरु के छायाचित्र का पूजन सनातन के ६३ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त हुए साधक श्री. अनिल कुलकर्णी ने किया, तो धर्मध्वज तथा धर्मदंड का पूजन ६१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त हुए श्री. अविनाश गिरकर ने किया ।

निरपेक्ष प्रेम देकर अतिथियों को अपनी ओर आकर्षित करनेवाला रामनाथी (गोवा) का सनातन आश्रम

सनातन आश्रम में प्रवेश करते ही हंसकर स्वागत होता है । बिना बताए ही सामान कक्ष में रखने हेतु सहायता की जाती है । साधक यह सर्व इतने प्रेम, सहजता और शीघ्र गति से करते हैं, कि आनेवाला देखते ही रह जाता है । कुछ पूछना नहीं पडता न ही कुछ मांगना पडता है ।

भारतीय शास्त्रीय संगीत के कलाकारों की दयनीय स्थिति

सद्गुरु (सौ.) अंजली गाडगील काकूने बताया संगीत साधना में बैखरी वाणी की अपेक्षा अंतर्मन में नादब्रह्म जागृत करने का महत्त्व है । नहीं तो संपूर्ण जीवन ऐसे ही गाने में व्यर्थ जाएगा ।

सनातन की ७० वी संत पू. (श्रीमती) उमाक्का की साधनायात्रा !

गुरुदर्शन के पश्चात् पूरा जीवन गुरुचरणी समर्पित करनेवाली तथा अंतर्मन में कृष्णभक्ति के रस में रंगकर साधकों को भी कृष्णानंद में डुबोनेवाली सनातनकी ७० वी संत पू. (श्रीमती) उमा रविचंद्रन् की साधनायात्रा !

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के अमृत महोत्सव समारोह के समय तुला का यू.टी.एस. (यूनिवर्सल थर्मो स्कैनर) उपकरण से महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय द्वारा किया वैज्ञानिक परीक्षण !

अत्युच्च स्तर के संत ईश्‍वर के सगुण रूप होते हैं । उनकी देह सात्त्विकता का स्रोत होती है । इसलिए संतों के संपर्क में आने पर चराचर इस सात्त्विकता से भारित हो जाता है और उसमें विविध सकारात्मक परिवर्तन होते हैं ।

Donating to Sanatan Sanstha’s extensive work for nation building & protection of Dharma will be considered as

“Satpatre daanam”