परात्पर गुरु पांडे महाराज का छायाचित्रमय जीवनदर्शन

ईश्वर की कृपा से ही प.पू. बाबाजी के छायाचित्रों द्वारा दर्शाया गया यह अल्प परिचय उनके चरणों में सविनय अर्पण करते हैं !

भाव, आनंद, चैतन्य एवं ज्ञान का मूर्तिमंत रूप तथा ‘जैसा बोले वैसा चले, वंदनीय उसके चरण ।’ इस वचन को यथार्थ बनानेवाले एकमेवोद्वितीय महान तपस्वी परात्पर गुरु पांडे महाराज !

स्वयं ज्ञानी होते हुए भी परात्पर गुरु पांडे महाराज में कृतज्ञता एवं शरणागत भाव का अपूर्व संगम था । ऐसा तपोवृद्ध एवं ज्ञानवृद्ध महान व्यक्तित्व का अभाव हम सभी को नित्य प्रतीत होगा ।

यज्ञ का प्रथमावतार ‘अग्निहोत्र’के विषय में वैज्ञानिक शोध !

विज्ञान के माध्यम से अग्निहोत्र का वातावरणपर क्या परिणाम होता है ?, इसके अध्ययन हेतु महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय की ओर से एक परीक्षण किया गया । इस परीक्षण हेतु यू.टी.एस्. (युनिवर्सल थर्मो स्कैन) उपकरण का उपयोग किया गया ।

एक दिन यज्ञ करने से १०० यार्ड क्षेत्र में १ मासतक प्रदूषण नहीं हो सकता ! – अवकाश वैज्ञानिक डॉ. ओमप्रकाश पांडेय

बेंगलुरु की प्रयोगशाला में किए गए परीक्षण से यह प्रमाणित हुआ है कि हम हवन और यज्ञ कर स्वयं को रोगों से दूर रख सकते हैं । एक दिन यज्ञ करने से १०० यार्ड क्षेत्र में १ मासतक प्रदूषण नहीं हो सकता ।

सनातन की गुरुपरंपरा !

भृगु महर्षिजी ने जीवनाडीपट्टीवाचन में कहा, परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी स्वयं में विद्यमान गुरुशक्ति को संक्रमित कर उन्हें (सद्गुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी एवं सद्गुरु (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी) आध्यात्मिक उत्तराधिकारी’ घोषित करें’

योगतज्ञ दादाजी वैशंपायन द्वारा दी गई संस्कारित दत्तमूर्ति का परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी द्वारा आध्यात्मिक उपचारों के लिए उपयोग करने पर उस दत्तात्रेय मूर्ति पर हुआ परिणाम

‘परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी विश्वकल्याण हेतु सत्त्वगुणी लोगों का ईश्वरी राज्य स्थापित करने हेतु प्रयासरत हैं । ज्योतिषशास्त्रानुसार वर्ष १९८९ से उनके जीवन में अनेक बार महामृत्युयोग आए हैं ।

‘बॉम्बे’, ‘औरंगाबाद’ जैसे आक्रांताओ के नाम परिवर्तित कर ‘मुंबई’, ‘संभाजीनगर’ जैसे भाषा, राष्ट्र और धर्म का अभिमान रखनेवाले नाम नगरों को देने की आवश्यकता स्पष्ट करनेवाली वैज्ञानिक जांच

प्राचीन काल में नगरों के नाम वहां के ग्रामदेवता, पराक्रमी राजा इत्यादि के नामों पर आधारित होते थे । इसलिए नगरों के नाम सात्त्विक होते थे ।

समष्टि कल्याण हेतु लाखों कि.मी. की दैवीय यात्रा करनेवाली सद्गुरु (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी !

सद्गुुरु (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी ने विगत ७ वर्षों में भारत के २९ राज्यों में से २४ राज्य तथा ७ केंद्रशासित प्रदेशों में से ४ प्रदेशों की यात्रा की हैं ।

सनातन के संतों की पंक्ति में जयपुर (राजस्थान) की श्रीमती गीतादेवी खेमका (आयु ७६ वर्ष) ८३वें संतरत्न के रूप में विराजमान !

झारखंड राज्य के धर्मप्रसारसेवक पू. प्रदीप खेमकाजी की माताजी श्रीमती गीतादेवी खेमका (आयु ७६ वर्ष) सनातन के ८३वें संतपदपर विराजमान हुईं ।

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“Satpatre daanam”