श्री दुर्गादेवीतत्त्व आकर्षित करनेवाली सात्त्विक रंगोलियां

विशेषकर मंगलवार एवं शुक्रवारके दिन देवीपूजनसे पूर्व तथा नवरात्रिकी कालावधिमें घर अथवा देवालयोंमें देवीतत्त्व आकृष्ट  एवं प्रक्षेपित करनेवाली सात्त्विक रंगोलियां बनाएं ।

संगीताभ्यास कैसे करना चाहिए ?

ऐसा कहा जाता है कि संगीत एक ईश्‍वरीय देन है और जिसपर ईश्‍वर की कृपा है, वह गा सकता है; परंतु ईश्‍वर ने सभी को स्वयं के क्रियमाण के आधारपर अपना स्वप्न साकार करने की शक्ति दी है ।

भूमिपर सद्गुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी के पदचिन्ह अंकित होनेपर उनमें विविध शुभचिन्ह दिखाई देना

१०.३.२०१८ को रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रम में आयोजित सौरयाग के दिन भूमिपर सद्गुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी के पदचिन्ह अंकित हुए तथा उनमें विविध शुभचिन्ह दिखाई दे रहे थे ।

नामंसकीर्तन के माध्यम से ईश्‍वर के अनुसंधान में रहनेवाली चेन्नई की श्रीमती कांतीमती संतानम् (आयु ८१ वर्ष) संतपदपर विराजमान !

२५ अगस्त को पू. (श्रीमती) उमा रविचंद्रन् के निवासपर सद्गुरु (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी ने श्रीमती कांतीमती संतानम् से भावपूर्ण संवाद किया । इस संवाद के समय ही सद्गुरु (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी ने श्रीमती कांतीमती संतानम् (आयु ८१ वर्ष) के संतपदपर विराजमान हो जाने की घोषणा की ।

गाने का अभ्यास करते समय सद्गुरु (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी द्वारा किया गया मार्गदर्शन

जब हम आरती गाना आरंभ करते हैं, उसके पश्चात उस देवता का सगुण तत्त्व कार्यरत होता है तथश आरती की पंक्तियों में से अंतिम अक्षर का उच्चारण कर रुकनेपर पुनः निर्गुण तत्त्व कार्यरत होता है ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी द्वारा बताया प्रतिशत और उपकरणों द्वारा किए परीक्षण में समानता होना तथा उनके दृष्टा होने की प्रतीति !

देवता का चित्र उनके मूल रूप से जितना अधिक मिलता-जुलता होता है, उतना ही उसमें देवता का तत्त्व अधिक मात्रा में होता है ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के शरीर में विद्यमान निर्गुण तत्त्व के कारण उनके सिरहाने के आवरणपर ॐ अंकित होने का अर्थ ‘ॐ’ कार के माध्यम से सगुणरूप में साकार नादब्रह्म !

८.७.२०१९ को परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के नियमित उपयोगवाले सिरहाने के आवरण के २ स्थानोंपर ॐ अंकित हुआ दिखाई दिया ।

अपनी लडकी का आध्यात्मिक स्तरपर मार्गदर्शन करनेवाली पू. (श्रीमती) संगीता जाधव !

‘मुझे बचपन से ही माता-पिता का सान्निध्य अल्प मिला । मैं ५ – ६ वर्षतक घरपर ही रही और उसके पश्चात शिक्षा हेतु पुणे में १ वर्ष और उसके पश्चात मिरज आश्रम में ४ वर्षोंतक रही ।

राष्ट्र एवं धर्म के कार्य में सतर्क रहनेवाले आदर्श धर्मरक्षक श्री. शिवाजी वटकर (आयु ७२ वर्ष) सनातन संस्था के १०२वें संत घोषित !

निष्ठापूर्वक धर्मकार्य करनेवाले देवद आश्रम के साधक श्री. शिवाजी वटकर (आयु ७२ वर्ष) के रूप में सनातन संस्था को क्षात्रतेजयुक्त संतरत्न की प्राप्ति हुई है ।