धारूहेड़ा (हरियाणा) में नवरात्रि के पावन अवसर पर सनातन संस्था की ओर से प्रवचन और देवी मां की कुमकुमार्चन विधि का आयोजन !

सनातन संस्था ओर से धारूहेड़ा के सोसाइटी बेस्टेक सिटी के मंदिर में   प्रवचन और नामजप का आयोजन किया गया जिसके अंतर्गत नवरात्रि शास्त्र अनुसार कैसे मनाएं, अखंड दीप क्यों जलाना चाहिए,

मथुरा (उत्तर प्रदेश) के अशोका सिटी सोसाइटी में सनातन संस्था द्वारा नवरात्रि के अवसर पर विषय प्रस्तुत

दिनांक 26.9.2025 और 27.9.2025 को सनातन संस्था की ओर से अशोका सिटी सोसाइटी की जिज्ञासुओं के घर में नवरात्रि के पावन अवसर पर प्रवचन और सामूहिक नामजप का आयोजन किया गया ।

फरीदाबाद (हरियाणा) में सनातन संस्था द्‍वारा महालय श्राद्ध के अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में प्रवचन का आयोजन !

सैनिक कॉलोनी, एस.जी.एम नगर, बल्लभगढ़, शिवाजी पार्क तथा धारूहेड़ा के सोसाइटी में श्राद्ध विषयक प्रवचन का आयोजन किया गया । विशेष सोसाइटी के जिज्ञासुओं ने मिलकर प्रतिदिन एक एक घर में ‘श्री गुरुदेव दत्त’ का सामूहिक नामजप भी किया ।

विजयादशमी के निमित्त सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी का संदेश !

सच्चा सीमोल्लंघन है, ‘विजय प्राप्त करने के लिए शत्रु की सीमा लांघकर युद्ध की चुनौती देना’, अपराजिता देवी की पूजा करने का अर्थ है, ‘विजय प्राप्त करने के लिए देवी से शक्ति मांगना’ तथा छोटे-बडों को अश्मंतक के पत्ते देने का अर्थ है ‘विजयश्री प्राप्त करने के लिए बडों का आशीर्वाद लेना’ !

सनातन संस्था की निर्दोषिता फिर से सिद्ध, ‘हिंदू आतंकवाद’ के षड्यंत्र का पर्दाफाश

सनातन संस्था को ‘आतंकवादी संगठन’ बताकर उस पर प्रतिबंध लगाने के लिए वर्ष 2011 में दायर की गई जनहित याचिका को अंततः याचिकाकर्ताओं को शर्मिंदगी के साथ वापस लेना पड़ा। 14 वर्षों तक चले इस लंबे न्यायिक संघर्ष में, याचिकाकर्ता सनातन संस्था के विरुद्ध आतंकवाद का एक भी सबूत पेश नहीं कर पाए।

मथुरा (उत्तर प्रदेश) में सनातन संस्था की ओर से श्राद्ध विषय पर प्रवचन और सामूहिक नामजप का आयोजन !

मथुरा (उत्तर प्रदेश ) के अशोका सिटी सोसाइटी में दिनांक 7.9.2025 को सनातन संस्था की ओर से श्राद्ध विषय पर प्रवचन और सामूहिक नामजप का आयोजन किया गया ।

भाद्रपद पूर्णिमा (७.९.२०२५) को लगनेवाला संपूर्ण चंद्रग्रहण !

रविवार, ७.९.२०२५ (भाद्रपद पूर्णिमा) को लगनेवाला संपूर्ण चंद्रग्रहण भारत में सर्वत्र दिखाई देगा । संपूर्ण चंद्रगहण को अंग्रेजी में Total lunar eclipse कहते हैं । चंद्रग्रहण पूर्णिमा के दिन ही लगता है ।

देवपूजा

हिन्दू धर्म में सगुण उपासनापद्धति की नींव अर्थात ‘देवपूजा’ ! ‘नित्य की भागदौड के दिनक्रम में देवपूजा के लिए इतना समय किसे है ?’, ऐसी नकारात्मक मानसिकता आजकल काफी लोगों में पाई जाती है । केवल एक नित्यकर्म पूरा करना है इसलिए भगवान पर जल्दी-जल्दी पानी डालना है, चंदन का तिलक लगाना और फूल चढाकर उदबत्ती दिखाना, हो गई ‘देवपूजा ’!, ऐसा चित्र सर्वत्र दिखाई देता है । सभी के पालनपोषण का ध्यान रखनेवाले भगवान की पूजा इसप्रकार ‘निबटाना’, इसे देवपूजा कह सकते हैं क्या ? ऐसा करने पर भगवान हम पर क्यों कृपा करें

वास्तुशास्त्रानुसार घर में देवघर कैसे होना चाहिए ?

पूजाघर बनाते समय उसे सीधे भूमि पर न रखें । पूजाघर  संगमरमर अथवा लकडी से बना हो । कांच से बना हुआ पूजाघर टालें । पूजाघर कहां हैं, इसकी बजाय वहां पूजा नियमितरूप से और भावपूर्ण हो रही है ना, यह भी महत्वपूर्ण होता है ।

पूजा करते समय भाव कैसा रखें ?

देवता, संत अथवा गुरु को पोछते हुए वे वहां साक्षात हैं, ऐसा भाव रखें । उन्हें बताएं कि हम पोछने जा रहे हैं । तत्पश्चाच ऊपर से नीचे तक एक-एक अंग धीरे-धीरे पोछें । ठीक उसीप्रकार जैसे मां बच्चे को नहलाती है । वह बच्चे से बातें करते हुए कि अब मैं तुम्हें स्नान करवाने जा रही हूं । तुम अपनी आंखें बंद कर लो । इससे आंखों में पानी नहीं जाएगा । इसप्रकार उसका ध्यान रखते हुए स्नान करवाती है ।