‘सनातन संस्था’ की ओर से बच्चों को “नैतिक शिक्षा” पर मार्गदर्शन !

दिल्ली के सैदुलाजाब स्थित “लिटिल वंस पब्लिक स्कूल” में सनातन संस्था के कार्यकर्ताओं द्वारा “नैतिक शिक्षा “विषय पर मार्गदर्शन किया गया। तीसरी से पांचवी कक्षा के लिए हुए इस वर्ग का लाभ कुल 57 बच्चो ने लिया।

परात्पर गुरु डॉक्टरजी द्वारा सिखाई गई ‘भावजागृति के प्रयास’ की प्रक्रिया ही आपातकाल में जीवित रहने के लिए संजीवनी !

आपकी दृष्टि सुंदर होनी चाहिए । तब मार्ग पर स्थित पत्थरों, मिट्टी, पत्तों और फूलों में भी आपको भगवान दिखाई देंगे; क्योंकि प्रत्येक बात के निर्माता भगवान ही हैं । भगवान द्वारा निर्मित आनंद शाश्वत होता है; परंतु मानव-निर्मित प्रत्येक बात क्षणिक आनंद देनेवाली होती है । क्षणिक आनंद का नाम ‘सुख’ है ।

समष्टि कार्य की लगन रखनेवाले पू. नीलेश सिंगबाळजी (आयु ५५ वर्ष) सद्गुरु पद पर विराजमान !

गुरुकृपायोगानुसार साधना कर पू. नीलेश सिंगबाळजी ने सद्गुरु पद प्राप्त किया । इस समय परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी की एक आध्यात्मिक उत्तराधिकारिणी और सद्गुरु नीलेश सिंगबाळजी की पत्नी श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी ने उनका सम्मान किया ।

तनावमुक्ति हेतु दुर्गुण निकाले और गुण बढाएं ! – श्रीमती वैदेही पेठकर, सनातन संस्था

तनाव निर्मूलन हेतु व्यक्तित्व के दोष पर प्रभाव करें ऐसा गुण बढाने की आवश्यकता है । इसलिए अध्यापक और छात्रों में इस विषय में दिशादर्शन करने का प्रयास सनातन संस्था कर रही है, ऐसा प्रतिपादन सनातन संस्था की श्रीमती वैदेही पेठकर जी ने किया ।

महान संत विसोबा खेचर का शिष्य नामदेव को सिखाना

एक बार संत नामदेव महाराजजी से पांडुरंग बोले, ‘‘तुम्हारे जीवन में सद्गुरु नहीं हैं । जब तक तुम पर सद्गुरु की कृपा नहीं होती, तब तक तुम्हें मेरे निराकार सत्य स्वरूप की पहचान नहीं होगी । तुम विसोबा खेचर से जाकर मिलो । वे महान सत्पुरुष हैं । वे तुम्हें दीक्षा देंगे ।

संतश्रेष्ठ ज्ञानेश्वर महाराज एवं संत नामदेव !

संत नामदेव समान प्रिय भक्त की संगत (सत्संग) सभी को मिले; इसलिए ज्ञानेश्वर महाराजजी ने स्वयं पंढरपुर में आकर नामदेव की भेंट ली और वे उनके साथ तीर्थयात्रा के लिए निकले ।

साधना कर गुरुकृपा से अल्प समय में समाधानी एवं आनंदी होनेवाले साधक !

सनातन संस्था में साधना करनेवाला साधक प.पू. डॉक्टरजी के कारण कितना भाग्यवान है, इसकी कल्पना आई; कारण सनातन संस्था के मार्गदर्शनानुसार साधना करनेवाले साधक को भी कुछ महीनों में ही उनके जीवन की सर्व समस्याओं के कारण एवं हमें क्या करना चाहिए, यह समझ में आता है ।

मनुष्यजन्म का महत्त्व ध्यान में लेकर मनःशांति पाएं !

अमेरिका अथवा पश्चिमी देश आर्थिकदृष्टि से भले ही कितने भी समृद्ध हो गए हों, तब भी उन देशों के लोगों को शांति है क्या ? उन देशों में चोरियां-डाके, धोखाधडी बंद हुई है क्या ? धनसंपन्नता का अर्थ शांति नहीं । क्या धनाढ्य व्यक्ति शांति से सो सकता है ?

अनेक विकारों पर औषधि : पान का बीडा

भारतीय संस्कृति में अनमोल ‘पान’, अर्थात खाने का ‘पान’ अर्थात बीडा । आयुर्वेदानुसार एवं व्यवहारानुसार इसके गुण-दोष हम देखेंगे ।