आध्यात्मिक पहेली

अधिकांश नियतकालिकों में शब्दपहेलियां होती हैं । वे बौद्धिक स्तर की होती हैं । यहां एक मानसिक स्तर की पहेली दी है । अत: इससे मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक स्तर की पहेलियों में भिन्नता ध्यान में आएगी ।

मेनराय दंपति – सनातन की एक आदर्श दंपति !

पूज्य भगवंत मेनराय और पूज्य सूरजकांता मेनराय का कुछ महीनों से सनातन के रामनाथी, गोवा आश्रम में निवास रहा है । आश्रम में नए होकर भी वे आश्रमजीवन से शीघ्र एकरूप हो गए हैं । मेनराय पती-पत्नी के अनेक सद्गुणों का हुआ दर्शन इस लेख में शब्दबद्ध किया है ।

सभी साधकों की विविध प्रकार से उन्नति हो, इसलिए अपार परिश्रम करनेवाले हमारे परम पूज्य डॉक्टरजी !

वर्ष १९९० में शीव (मुंबई) आश्रम में मुझे प.पू. डॉक्टरजी के दर्शन हुए । उस समय सेवा के निमित्त आश्रम में मेरा आना-जाना लगा रहता था । इसके उपरांत मुझे आश्रम में पूर्णकालीन रहने का सौभाग्य मिला ।

पाकिस्तान के जिहादी आतंकीयों को कुचल डालों – श्री. अभय वर्तक, प्रवक्ता, सनातन संस्था

अपना स्पष्ट मत व्यक्त करते हुए सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री. अभय वर्तक ने कहा कि, अपने देश में प्रभु श्रीराम, श्रीकृष्ण, छत्रपति शिवाजी महाराज तथा छत्रपति संभाजी महाराज जैसे अनेकों वीरों ने युद्ध कर विजय प्राप्त की है। अब हमें शासन को बताना पड रहा है कि युद्ध करें !

गणेशमूर्ति के विसर्जन के समय प्रशासन ने हिन्दुओं की धर्मभावनाओं का आदर करना चाहिए – श्री. अभय वर्तक, प्रवक्ता, सनातन संस्था

सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री. अभय वर्तक ने चर्चासत्र में यह प्रतिपादित किया कि, ‘हमारा धर्मशास्त्र यह बताता है कि, गणेशमूर्ति खडिया मिट्टी की होनी चाहिए। जिस समय हम घर में गणेश की मूर्ति की स्थापना करते हैं, उस समय वह केवल मिट्टी की मूर्ति नहीं होती, तो उसमें गणेशतत्त्व होता है !

ठाणे जनपद में सनातन संस्था के ‘आदर्श गणेशोत्सव अभियान’ को प्राप्त हुआ सकारात्मक प्रतिसाद !

ठाणे : यहां जिले के पाठशालाओं में, हर घर-घर में, साथ ही गणेशोत्सव मंडल तथा शिवसेना शाखाओं में ‘आदर्श गणेशोत्सव अभियान’ के अंतर्गत मार्गदर्शन किया गया। नगरसेविका अधिवक्ती श्रीमती रत्नप्रभा पाटिल ने जनसंपर्क कार्यालय में आयोजित किए गए एक कार्यक्रम में सनातन संस्थाद्वारा मार्गदर्शन किया गया ..

पिंपरी-चिंचवड में इस वर्ष गणेश मूर्तिदान की संख्या ६००० से अल्प – संस्कार प्रतिष्ठान के अध्यक्ष श्री. मोहन गायकवाड

सनातन संस्था के साधक एवं हिन्दू जनजागृति समिति के कार्यकर्ता गणेशमूर्तियों के विसर्जन के लिए आनेवाले श्रद्धालुओं का उद्बोधन करते हुए उनको बहते पानी में मूर्ति विसर्जन का शास्त्र बता रहे थे। इसके फलस्वरुप गतवर्ष की तुलना में इस वर्ष मूर्तिदान की संख्या ६ सहस्र से अल्प हुई..

क्या श्राद्ध कर्मकांड का आडंबर है ?

जिस प्रकार माता-पिता एवं निकटवर्तीय परिजनों की जीवितावस्था में हम उनकी सेवा धर्मपालन समझकर करते हैं, उसी प्रकार उनकी मृत्यु के पश्‍चात् भी उनके प्रति कुछ कर्तव्य होते हैं । इन कर्तव्यों की पूर्ति एवं उनके द्वारा पितृऋण चुकाने का अवसर श्राद्धकर्म से मिलता है।

शास्त्र के अनुसार श्रीगणेशमूर्ति का विसर्जन होने हेतु सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समितिद्वारा प्रबोधन अभियान !

भक्तोंद्वारा बहते पानी में ही श्री गणेशमूर्ति विसर्जन करने हेतु सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से सांगली, उदगांव एवं कुरुंदवाड (जिला कोल्हापुर) में प्रबोधन अभियान चलाया गया। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने नदी किनारे पर हाथ में विसर्जन का शास्त्र बतानेवाले फलक धारण किए थे।

कुरुंदवाड (कोल्हापुर) नगरपरिषदद्वारा दान में ली गई श्री गणेशमूर्तियों का अत्यंत गंदगी भरे पानी में पुनर्विसर्जन !

कुरुंदवाड में १० सितंबर को एक राजनीतिक पक्ष की महिला कार्यकर्ताओंद्वारा श्री गणेशमूर्तियों का दान, भक्तोंद्वारा लिया जा रहा था। हिन्दू जनजागृति समिति के कार्यकर्ता डॉ. उमेश लंबे ने इस बात की ओर इस पक्ष के प्रमुख का ध्यान आकृष्ट किया।