मां-पिता समान सभी साधकों को आध्यात्मिक स्तर पर घडने के लिए प्रयासरत पू. (श्रीमती) सूूरजकांता मेनरायजी !

सनातन की ४५ वीं संत पूज्य (पू.) मेनराय दादी का ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को जन्मदिन है  इस निमित्त उनकी ध्यान में आई गुणविशेषताएं यहां दे रहे हैं । 

पर्यावरण के ऱ्हास के कारण निसर्गदेवता का कोप

पर्यावरण का ऱ्हास होने के कारण ही समुद्र के पेट में तीव्र भूकंप, ज्वालामुखी का उद्रेक अथवा भूकंप की घटना घटने से त्सुनामी लहरी निर्माण होने की संभावना रहती है । लहरों की आगे बढने की गति प्रति घंटा ८०० ते १ सहस्र किलोमीटर इतनी रहती है ।

निसर्गशुद्धि के पश्चात् पर्जन्यवृष्टि करनेवाला सोमयाग !

सोमयाग का वातावरण पर क्या परिणाम होता है, इस बात का अभ्यास करने हेतु गोगटे-जोगळेकर महाविद्यालय के रसायनशास्त्र विभाग की ओर से प्रा. मयुर देसाई तथा प्रा. विजय गुरव ने यज्ञ के प्रथम दिन से यज्ञ से कुछ दूरी पर वैज्ञानिक मापन करनेवाले यंत्र के माध्यम से वातारवरण में होनेवाले कार्बन-डाय ऑक्साइड की मात्रा का परीक्षण किया । वैज्ञानिक प्रयोग से यह सिद्ध हुआ है कि, ज्वलन के कारण हवा में कार्बन-डाय-ऑक्साईड वायु की मात्रा बढती है; किंतु होमहवन के पश्चात् इस परिसर के कार्बन डायऑक्साइड की मात्रा न्यून हुई ।

सहस्रों वर्षों के काल-पटल पर अपना प्रभाव अंकित करनेवाले अवतारी पुरुष !

साधारण व्यक्ति का जीवन पक्षियों की भांति होता है, ४ तिनकों से बनी गृहस्थी ! उनमें से भी जो व्यक्ति अपने स्वार्थ को त्याग कर समाज, राष्ट्र एवं धर्म हेतु अपना जीवन अर्पित करते हैं, वे विभूति कहलाते हैं । ऐसी अनेक विभूतियों को भारत मां ने अपनी गोद में खेलाया है । कुछ व्यक्ति सही समय पर अपने कार्य छाप अंकित कर, कीर्ति अर्जित करते हैं ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के कार्य के विषय में मान्यवरों द्वारा निकाले गए उद्गार !

आज जानबूझकर, आस्था के साथ एवं ईश्‍वरीय प्रेरणा से जागृति करनेवाली व्यक्ति यदि कोई होगा, तो वे हैं डॉ. जयंत आठवलेजी ! उनको आद्य शंकराचार्यजी अथवा समर्थ रामदासजी का अवतार ही कहना होगा । आज की भाषा में डॉ. आठवलेजी को केवल संत कहना अनुचित होगा ।

श्रद्धा एवं भक्ति का उत्कट दर्शन करानेवाली जगन्नाथ रथयात्रा !

विश्‍वविख्यात पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा अर्थात् भगवान श्री जगन्नाथ (विश्‍वउद्धारक भगवान श्रीकृष्ण) के भक्तों के लिए एक महान आैचित्त्य है ! पुरी का मंदिर कलियुग के चार धामों में से एक है । यह विश्‍व की सबसे महान यात्रा है । लक्षावधी विष्णुभक्त यहां इकठ्ठा होते हैं । इस स्थान की विशेषता यह है कि,…

हिन्दू जनजागृति समिति और सनातन संस्था के साथ हिन्दू राष्ट्र के कार्य में सभी हिन्दू सहभागी हों ! – श्री. दीपक सिंह

कानून की सीमा में रहकर राजनीतिक, सामाजिक व सांस्कृतिक परिवर्तन करने की संविधान ने संपूर्ण स्वतंत्रता दी है । उसके विरोध का कोई कारण नहीं है ।

रणझुंजार अधिवक्ता समीर पटवर्धन का रामनाथी, गोवा के सनातन के आश्रम में विशेष आदर !

स्वयं का विचार करने की अपेक्षा धर्मकार्य करनेवाले हिन्दुत्वनिष्ठ जिस प्रकार हिन्दू समाज के भूषण हैं, उसी प्रकार हिन्दुत्वनिष्ठों द्वारा किए गए कार्य में आनेवाली बाधाएं दूर करनेवाले अधिवक्ताएं भी हिन्दु धर्मप्रेमियों के लिए सदैव ‘आदर्श’ हैं । हिन्दुत्वनिष्ठ तथा पुरो(अधो)गामियों के न्यायालयीन लडे में निर्भयता पूर्वक हिन्दुत्व का पक्ष प्रस्तुत करनेवाले तथा सनातन के साधक श्री. समीर गायकवाड की कारागृह से जमानत पर मुक्तता करनेवाले रणझुंजार धर्मवीर अधिवक्ता समीर पटवर्धन भी इसीलिए ही सभी के आदर्श सिद्ध हुए हैं ।

अग्निहोत्र का स्वरूप और प्रक्रिया

त्रिकालज्ञानी संतों ने बताया ही है कि भीषण आपातकाल आनेवाला है तथा उसमें संपूर्ण विश्‍व की प्रचंड जनसंख्या नष्ट होनेवाली है । वास्तव में आपातकाल आरंभ हो चुका है । आपातकाल में तीसरा महायुद्ध भडक उठेगा । अणुबम जैसे प्रभावी संहारक के विकिरण को रोकने के लिए सूक्ष्मदृष्टि से कुछ करना आवश्यक है । इसलिए ऋषि-मुनियों ने यज्ञ के प्रथमावतार रूपी अग्निहोत्र’ का उपाय बताया है ।

सनातन की संत पू. (श्रीमती) सूरजकांता मेनराय द्वारा साधकों को बताएं गए अनमोल सूत्रं

सनातन की ४५ वी संत पू. (श्रीमती) सूरजकांता मेनराय को ७५ वर्ष पूर्ण हो रहे हैं । उस अवसर पर उन्होंने साधकों को मार्गदर्शक सूत्रं बताएं ।