आनंद

आनंद अर्थात ज्ञानेंद्रियों, मन तथा बुद्धि का उपयोग किए बिना जीवात्मा अथवा शिवात्मा को होनेवाली अनुकूल संवेदना. जब चित्त सदैव संतुष्ट रहने लगे, तब उसमें जो वृत्ति उभरती है, उसे आनंद’ कहते हैं ।

अध्यात्म समझ लीजिए !

प्राचीन काल से ही भारत और भारतीयों की पहचान आध्यात्मिक देश और व्यक्ति के रूप में रही है । देश को अध्यात्मशास्त्र भिन्न प्रकार से सिखाने की अथवा समझाने की आवश्यकता नहीं थी ।

आधुनिक वैज्ञानिक युग में प्रार्थना का महत्त्व

सत्संग में रहने से एवं सात्त्विक तथा सत्प्रवृत्त लोगों से संबंध आने के कारण मानसिक आधार मिलकर मन प्रसन्न रहता है । उसका प्रभाव स्वास्थ्य पर होता है तथा स्वास्थ्य एवं दीर्घायु मिलती है

कोजागरी पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा)

कोजागरी पूर्णिमा के दिन रात्रि को लक्ष्मी तथा इंद्र की पूजा की जाती है । कोजागरी पूर्णिमा की कथा इस प्रकार है कि, बीच रात्रि में लक्ष्मी पृथ्वी पर आकर जो जागृत है, उसे धन,अनाज तथा समृद्धी प्रदान करती है ।

१ अप्रैल अर्थात अप्रैल फूल की पश्‍चिमी प्रथा का इतिहास !

साहित्य में १ अप्रैल का उल्लेख सर्वप्रथम वर्ष १९३२ में कँटरबरी टेल्स नामक पुस्तक में हुआ ऐसा कहा जाता है ।

निपाणी (जनपद बेलगांव) में हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से उपतहसीलदार को निवेदन

हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से १६ सितम्बर को यहां के उपतहसीलदार श्री. एन्.बी. गेज्जी को निवेदन प्रस्तुत किया गया ।निवेदन द्वारा यह मांग की गई कि, ‘‘लव जिहाद’ की समस्या अब वैश्विक हुई है ।

बेंगलूरु में नक्सल समर्थक पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या

कर्नाटक की ज्येष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या हुई और पुन: एक बार बिना किसी जांच के देशभर में पुरोगामियों की हत्या, विचारों की हत्या आदि नाम से हल्ला मचने लगा है ।

राष्ट्रीय पुस्तक मेले में सनातन संस्था की ग्रंथ-प्रदर्शनी को उत्साही प्रतिसाद

वाराणसी (उत्तरप्रदेश) – यहां आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेले में सनातन संस्था की ओर से दस दिवसीय ग्रंथ-प्रदर्शनी लगाई गई । इस प्रदर्शनी का लाभ अनेक जिज्ञासुआें ने उठाया ।

हिन्दू संगठक को आदर्श होना चाहिए ! – श्री. नागेश गाडे

हिन्दू जनजागृति समिति के केंद्रीय समन्वयक श्री. नागेश गाडे ने प्रतिपादित किया कि प्रत्येक हिन्दू संगठक कार्यकर्ता को स्वयं, स्वयं के परिवार, स्वयं के संगठन से आदर्श कृत्य का आरंभ करना चाहिए ।

भारत की सीमा की रक्षा करनेवाली जैसलमेर (राजस्थान) की श्री तनोटमाता

श्री तनोटमाता मंदिर, राजस्थान राज्य के जैसलमेर जनपद से १३० किलोमीटर दूर थार मरुस्थल (रेगिस्तान) में भारत-पाकिस्तान की सीमा पर स्थित है । भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय हुई अद्भुत घटनाओं के कारण यह मंदिर विख्यात है ।