भारतीय शास्त्रीय संगीत के कलाकारों की दयनीय स्थिति
सद्गुरु (सौ.) अंजली गाडगील काकूने बताया संगीत साधना में बैखरी वाणी की अपेक्षा अंतर्मन में नादब्रह्म जागृत करने का महत्त्व है । नहीं तो संपूर्ण जीवन ऐसे ही गाने में व्यर्थ जाएगा ।
सद्गुरु (सौ.) अंजली गाडगील काकूने बताया संगीत साधना में बैखरी वाणी की अपेक्षा अंतर्मन में नादब्रह्म जागृत करने का महत्त्व है । नहीं तो संपूर्ण जीवन ऐसे ही गाने में व्यर्थ जाएगा ।
हिन्दू जनजागृति समिति के शिष्टमंडल ने यहां के अतिरिक्त जनपदाधिकारियों को निवेदन प्रस्तुत किया । उस निवेदन द्वारा हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा की गई मांगे इस प्रकार हैं, ‘प्रतिवर्ष मैहर (मध्यप्रदेश) तथा विंध्याचल (उत्तरप्रदेश) में संपन्न होनेवाले सुप्रसिद्ध नवरात्रोत्सव के पार्श्वभूमि पर रेल प्रशासन ने रेल टिकट पर पारित किया गया अधिभार अन्याय्य है ।
नवमी के दिन पृथक क्षेत्र में विशेष कार्य करनेवाली नौ महिलाओं का नवदुर्गा पुरस्कार से आदर किया गया । उनमें सनातन संस्था की भूलतज्ञ डॉ. ज्योती काळे तथा रणरागिणी की कु. क्रांती पेटकर को भी पुरस्कार प्रदान किया गया ।
आनंद अर्थात ज्ञानेंद्रियों, मन तथा बुद्धि का उपयोग किए बिना जीवात्मा अथवा शिवात्मा को होनेवाली अनुकूल संवेदना. जब चित्त सदैव संतुष्ट रहने लगे, तब उसमें जो वृत्ति उभरती है, उसे आनंद’ कहते हैं ।
प्राचीन काल से ही भारत और भारतीयों की पहचान आध्यात्मिक देश और व्यक्ति के रूप में रही है । देश को अध्यात्मशास्त्र भिन्न प्रकार से सिखाने की अथवा समझाने की आवश्यकता नहीं थी ।
सत्संग में रहने से एवं सात्त्विक तथा सत्प्रवृत्त लोगों से संबंध आने के कारण मानसिक आधार मिलकर मन प्रसन्न रहता है । उसका प्रभाव स्वास्थ्य पर होता है तथा स्वास्थ्य एवं दीर्घायु मिलती है
कोजागरी पूर्णिमा के दिन रात्रि को लक्ष्मी तथा इंद्र की पूजा की जाती है । कोजागरी पूर्णिमा की कथा इस प्रकार है कि, बीच रात्रि में लक्ष्मी पृथ्वी पर आकर जो जागृत है, उसे धन,अनाज तथा समृद्धी प्रदान करती है ।
साहित्य में १ अप्रैल का उल्लेख सर्वप्रथम वर्ष १९३२ में कँटरबरी टेल्स नामक पुस्तक में हुआ ऐसा कहा जाता है ।
हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से १६ सितम्बर को यहां के उपतहसीलदार श्री. एन्.बी. गेज्जी को निवेदन प्रस्तुत किया गया ।निवेदन द्वारा यह मांग की गई कि, ‘‘लव जिहाद’ की समस्या अब वैश्विक हुई है ।
कर्नाटक की ज्येष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या हुई और पुन: एक बार बिना किसी जांच के देशभर में पुरोगामियों की हत्या, विचारों की हत्या आदि नाम से हल्ला मचने लगा है ।