बेटे को संन्यास से दूर रखने के लिए शास्त्र का सहारा लेनेवाले पिता को आदि शंकराचार्य का उत्तर
आद्य शंकराचार्य ने एक ३० वर्ष के युवक को संन्यास की दीक्षा दी । उसके पिता ७५ वर्ष के थे । उन्हें यह बात अनुचित लगी । उन्होंने उनसे परिवाद (शिकायत) किया ।
आद्य शंकराचार्य ने एक ३० वर्ष के युवक को संन्यास की दीक्षा दी । उसके पिता ७५ वर्ष के थे । उन्हें यह बात अनुचित लगी । उन्होंने उनसे परिवाद (शिकायत) किया ।
गंगा केवल नदी नहीं, श्रेष्ठतम तीर्थदेवी भी है । इसलिए, यह भारतवासियों के लिए प्राणों से अधिक प्रिय है । भक्तों के पाप धोने का कार्य ईश्वर ने इसे सौंपा है । गंगा व्यक्ति को स्नान से, तो नर्मदा केवल दर्शन से शुद्ध करती है ।
पाच पातशाहियों से लडा देकर हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करनेवाले छत्रपति शिवाजी महाराज तथा धर्म के लिए त्याग का आदर्श समस्त हिन्दुओं पर अंकित करनेवाले धर्मवीर संभाजी महाराज के पदस्पर्श से पावन भिवंडीनगरी में २८ जनवरी को हिन्दू धर्मजागृति सभा में हिन्दू राष्ट्र स्थापना का ध्वनि गूंज ऊठा !
यहां से २६ जनवरी को श्री शिवप्रतिष्ठान धारकरी धारातीर्थ यात्रा गडकोट अभियान हेतु जाएंगे । इन धारकरियों को सनातन संस्था तथा हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से शुभेच्छा दी गई । सनातन संस्था के श्री. चंद्रशेखर पट्टणशेट्टी ने धारकरियों को साथ ले जानेवाले वाहन का श्रीफल चढाकर पूजन किया ।
यहां के ७० फीट के पथ पर, इंदिरानगर के चौक में २६ जनवरी को ध्वजारोहण कर राष्ट्रध्वज की रंगोली मुद्रित की गई थी । साथ ही राष्ट्रध्वज के छायाचित्रवाले पटाखें फोडे गए थे । यह देखकर सनातन संस्था की श्रीमती सुधा घाटगे ने वहां के ८-१० युवकों को रंगोली तथा पटाखों के कारण राष्ट्रध्वज का अनादर किस प्रकार होता है, यह समझाकर उचित कृती क्या करनी चाहिए, यह बताया ।
यहां १७ से २४ जनवरी २०१८ को ‘धर्ममीमांसा तथा पंथ के बीच पशुओं का स्थान (एनिमल्स इन थिओलॉजी एण्ड रिलीजन)’ इस विषय पर मायंडींग निमल्स इंटरनॅशनल इन कॉर्पोरेटेड ने अंतर्राष्ट्रीय परिषद का आयोजन किया था ।
गौतमबुद्ध नगर, ग्रेटर नोइडमे २२ जनवरी २०१८ को LG सोसायटी के कोम्युनिटिव हॉल में सनातन संस्था की ओर से बसन्तपंचमी पर प्रवचन का आयोजन किया गया, जिसमे २३ जिज्ञासु उपस्थित रहे।
विश्व में कहीं भी उपलब्ध नहीं है ऐसा अनमोल ज्ञान देनेवाले सनातन संस्था की ग्रंथ-प्रदर्शनी !
१३ जनवरी को म्युनिसिपल हाईस्कूल के मैदान में श्रीराम सेना द्वारा विराट हिन्दू महासम्मेलन का आयोजन किया गया था । सम्मेलन में हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से कश्मीर और बंगलादेश के हिन्दुआें पर हुए अत्याचारों के संदर्भ में ‘फॅक्ट’ प्रदर्शनी लगाई गई थी ।
रथसप्तमी को रविवार को उत्तरा-फाल्गुनी नक्षत्र पर आदित्यदेव (सूर्यदेव) प्रकट हुए । इसलिए रथसप्तमी श्रेष्ठ तिथि मानी जाती है । इस दिन सूर्यदेव अधिक आनंदी होते हैं तथा आप जो मांगते हैं, वह आपको देते हैं । श्रद्धालुआें की श्रद्धा है कि रथसप्तमी का उपवास करनेवाले को स्वप्न में सूर्यदेव के दर्शन होते हैं ।