योगतज्ञ दादाजी वैशंपायन द्वारा दी गई संस्कारित दत्तमूर्ति का परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी द्वारा आध्यात्मिक उपचारों के लिए उपयोग करने पर उस दत्तात्रेय मूर्ति पर हुआ परिणाम

‘परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी विश्वकल्याण हेतु सत्त्वगुणी लोगों का ईश्वरी राज्य स्थापित करने हेतु प्रयासरत हैं । ज्योतिषशास्त्रानुसार वर्ष १९८९ से उनके जीवन में अनेक बार महामृत्युयोग आए हैं ।

हृदयविकार और अन्य तीव्र शारीरिक कष्टवाले साधक निम्न मंत्रजप करें !

‘जिन साधकों को हृदयविकार अथवा अन्य तीव्र शारीरिक कष्ट हो रहे हैं, वे चेन्नई के भृगु जीवनाडीवाचक श्री. सेल्वम्गुरुजी की आज्ञा के अनुसार १२.२.२०१९ तक प्रतिदिन २१ बार निम्न मंत्रजाप भावपूर्ण पद्धति से कर अधिकाधिक गुरुस्मरण करें ।

ब्रह्मा, विष्णु एवं शिवजी का रूप है प्रयागराज का लाखों वर्ष प्राचीन परमपवित्र अक्षयवट !

अमेरिका अथवा अन्य किसी देश में कोई प्राचीन वस्तु मिलनेपर उसका विश्व में ढिंढोरा पीटा जाता है; किंतु अतिप्राचीन अक्षयवट की महिमा संपूर्ण विश्व को गर्व प्रतीत होनेयोग्य होते हुए भी भारत के तत्कालीन कांगेस सरकार ने उसे दर्शन हेतु नहीं खोला ।

विजयपुर (कर्नाटक) के भारतीय संस्कृति उत्सव में सनातन संस्थी की ओर से ग्रंथप्रदर्शनी के माध्यम से अध्यात्मप्रसार

यहां की सिद्धेश्‍वर संस्था एवं बागलकोट की बसवेश्‍वर वीरशैव विद्यावर्धक संस्था के संयुक्त आयोजन में हाल ही में यहां भारतीय संस्कृति उत्सव मनाया गया । इस उत्सव में सनातन संस्था की ओर से ग्रंथ एवं सात्त्विक उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई थी ।

हिन्दू राष्ट्र की यथाशीघ्र स्थापना हो; इसके लिए सनातन के रामनाथी, गोवा के आश्रम में राजमातंगी यज्ञ संपन्न !

श्री राजमातंगीदेवी विशुद्धचक्र की अधिष्ठात्री देवता है । विशुद्धचक्र वाणी से संबंधित होता है । श्री विष्णुजी की आकर्षणशक्ति को राजमातंगी कहा गया है ।

इंडोनेशिया के जावा द्वीपपर प्रंबनन मंदिर में रामायण नृत्यनाटिका !

भारत से दूर इंडोनेशिया में वहां के लोगों ने अभी तक रामायण नृत्यनाटिका के माध्यम से राम के आदर्शों को संजोया है । रामायण वास्तव में घटित हुए अनेक युग बीत गए; परंतु विश्‍व में अनेक स्थानों पर अलग-अलग रूप में रामायण की कथा बताई जाती है ।

श्रीलंका का नगर नुवारा एलिया में राम-रावण युद्ध का साक्षी रामबोडा तथा रावणबोडा पर्वत तथा एक संत द्वारा स्थापित गायत्रीपीठ आश्रम !

रामायण में जिस भूभाग को लंका अथवा लंकापुरी कहा गया है, वह स्थान है आज का श्रीलंका देश ! त्रेतायुग में श्रीमहाविष्णुजी ने श्रीरामावतार धारण किया तथा लंकापुरी जाकर रावणादि असुरों का नाश किया । वाल्मिकी रामायण में महर्षि वाल्मिकी ने जो लिखा, उसीके अनुरूप घटनाएं घटने के अनेक प्रमाण श्रीलंका में मिलते हैं ।

श्री गणेश मूर्ति का विसर्जन प्राकृतिक जल स्रोत में करें !

गणेशभक्तो, गणेश चतुर्थी के काल में आपने श्री गणेश की भक्तिभाव एवं धर्मशास्त्रानुसार सेवा की । अब उनका धर्म शास्त्रानुसार विसर्जन करने के स्थान पर प्रसिद्धि के लिए पर्यावरण रक्षा का ढोंग करनेवाले नास्तिकों के हाथ में मूर्ति सौंपनेवाले हो क्या ? धर्मद्रोहियों के आवाहन की बलि चढ, विसर्जन न करने के महापाप से बचें ।

कुंभपर्व में ओडिशा के ‘क्रिया योग आश्रम’ की नामजप फेरी का सनातन संस्था द्वारा स्वागत !

ओडिशा के क्रिया योग आश्रम की नामजप फेरी का सनातन संस्था की प्रदर्शनीस्थल के सामने आगमन हुआ ।

कुंभ मेला (प्रयागराज) के अवसर पर धर्मकार्य में योगदान देने का अमूल्य अवसर !

कुंभ मेल के समय में साधना हेतु अधिकाधिक समय देने पर देवता एवं संतों के आशीर्वाद प्राप्त हो कर इच्छित कार्य अल्पावधि में पूर्णता को पहुंचता है।