योगतज्ञ दादाजी वैशंपायन द्वारा दी गई संस्कारित दत्तमूर्ति का परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी द्वारा आध्यात्मिक उपचारों के लिए उपयोग करने पर उस दत्तात्रेय मूर्ति पर हुआ परिणाम
‘परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी विश्वकल्याण हेतु सत्त्वगुणी लोगों का ईश्वरी राज्य स्थापित करने हेतु प्रयासरत हैं । ज्योतिषशास्त्रानुसार वर्ष १९८९ से उनके जीवन में अनेक बार महामृत्युयोग आए हैं ।
