प्रयागराज के कुंभपर्व का पहला राजयोगी (शाही) स्नान

कुंभपर्व के प्रारंभ में महानिर्वाणी अखाडे के राजयोगी स्नान के पश्चात क्रमशः निरंजनी अखाडा, आनंद अखाडा, जूना अखाडा, आवाहन अखाडा, श्री शंभू पंच अग्नि अखाडा स्नान के लिए आ गए ।

साध्वी सरसस्वतीजी द्वारा सनातन की ग्रंथप्रदर्शनी का अवलोकन

छिंदवाडा, मध्य प्रदेश की सनातन धर्म प्रचार सेवा समिति की अध्यक्षा साध्वी सरस्वतीजी ने १४ जनवरी को यहां कुंभपर्व के उपलक्ष्य में सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से सेक्टर १५, मोरी मार्ग में लगाई गई ग्रंथ तथा धर्मशिक्षाफलकों की भव्य प्रदर्शनी का अवलोकन किया |

कुंभपर्व में सनातन संस्था की ओर से ‘फेसबुक लाईव’ के माध्यम से कुंभपर्व का शास्त्र बताकर अध्यात्मप्रसार !

सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से फेसबुक लाईव के माध्यम से प्रयागराज में पहले राजयोगी स्नान के समय कुंभपर्व का महत्त्व तथा शास्त्र को समिति तथा संस्था के दर्शकोंतक पहुंचाने का प्रयास किया गया ।

सनातन संस्था द्वारा रखे गए लक्ष्य की उसे प्राप्ति हो ! – शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज का आशीर्वचन !

जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कुंभपर्व में स्नान के पश्चात सनातन संस्था के लिए आशीर्वचन प्रदान करते हुए कहा ।

संकटकाल में सनातन संस्था के सर्वत्र के साधक तथा आश्रमों की रक्षा हेतु रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम के प्रवेशद्वारपर ऐरावत गजमूर्तियों की स्थापना !

सनातन संस्था के सर्वत्र के साधक और आश्रमों की रक्षा हो; इसके लिए भृगु महर्षिजी की आज्ञा से १५ जनवरी की सुबह यहां के सनातन आश्रम के मुख्य प्रवेशद्वारपर ऐरावत गजमूर्तियों की विधिवत स्थापना की गई ।

अन्नपूर्णादेवी का वरदहस्त प्राप्त अन्नछत्रों का मेला !

विविध साधु-संतों द्वारा निरंतर एवं निस्वार्थभाव से चलाए जा रहे अन्नछत्र ! यहां लगभग १० सहस्र से भी अधिक छोटे-बडे अन्नछत्र चल रहे हैं ।

योगतज्ञ दादाजी वैशंपायन द्वारा दी गई संस्कारित दत्तमूर्ति का परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी द्वारा आध्यात्मिक उपचारों के लिए उपयोग करने पर उस दत्तात्रेय मूर्ति पर हुआ परिणाम

‘परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी विश्वकल्याण हेतु सत्त्वगुणी लोगों का ईश्वरी राज्य स्थापित करने हेतु प्रयासरत हैं । ज्योतिषशास्त्रानुसार वर्ष १९८९ से उनके जीवन में अनेक बार महामृत्युयोग आए हैं ।

हृदयविकार और अन्य तीव्र शारीरिक कष्टवाले साधक निम्न मंत्रजप करें !

‘जिन साधकों को हृदयविकार अथवा अन्य तीव्र शारीरिक कष्ट हो रहे हैं, वे चेन्नई के भृगु जीवनाडीवाचक श्री. सेल्वम्गुरुजी की आज्ञा के अनुसार १२.२.२०१९ तक प्रतिदिन २१ बार निम्न मंत्रजाप भावपूर्ण पद्धति से कर अधिकाधिक गुरुस्मरण करें ।

ब्रह्मा, विष्णु एवं शिवजी का रूप है प्रयागराज का लाखों वर्ष प्राचीन परमपवित्र अक्षयवट !

अमेरिका अथवा अन्य किसी देश में कोई प्राचीन वस्तु मिलनेपर उसका विश्व में ढिंढोरा पीटा जाता है; किंतु अतिप्राचीन अक्षयवट की महिमा संपूर्ण विश्व को गर्व प्रतीत होनेयोग्य होते हुए भी भारत के तत्कालीन कांगेस सरकार ने उसे दर्शन हेतु नहीं खोला ।

विजयपुर (कर्नाटक) के भारतीय संस्कृति उत्सव में सनातन संस्थी की ओर से ग्रंथप्रदर्शनी के माध्यम से अध्यात्मप्रसार

यहां की सिद्धेश्‍वर संस्था एवं बागलकोट की बसवेश्‍वर वीरशैव विद्यावर्धक संस्था के संयुक्त आयोजन में हाल ही में यहां भारतीय संस्कृति उत्सव मनाया गया । इस उत्सव में सनातन संस्था की ओर से ग्रंथ एवं सात्त्विक उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई थी ।