कलियुग में विशेषतापूर्ण तथा साधकों से सभी अंगों से बनानेवाली सनातन संस्था की एकमात्रद्वितीय गुरु-शिष्य परंपरा !

सनातन संस्था में ‘गुरु की ओर तत्त्व के रूप में देखें’ की शिक्षा दी जाती है । अतः साधक उसे मार्गदर्शन करनेवाले संतों की ओर अथवा अन्य सहसाधकों की ओर तत्त्व के रूप में देखता है

गुरुपूर्णिमा के दिन अन्य दिनों की अपेक्षा एक सहस्र गुना अधिक कार्यरत गुरुतत्त्व का लाभ उठाएं !

सनातन संस्था ने आवाहन किया है कि गुरुपूर्णिमा महोत्सव में सम्मिलित होकर गुरुपूर्णिमा के दिन अन्य दिनों की अपेक्षा एक सहस्र गुना अधिक कार्यरत गुरुतत्त्व का लाभ उठाने के लिए सर्व राष्ट्र और धर्म प्रेमी हिन्दू सपरिवार उपस्थित रहें । 

भारतीय संस्कृति के गहन अभ्यासी, वरिष्ठ शोधकर्ता तथा ज्ञानमार्ग के अनुसार साधना करनेवाले ठाणे के डॉ. शिवकुमार ओझा (आयु ८५ वर्ष) संतपदपर विराजमान !

भारतीय संस्कृति के गहन अभ्यासी, वरिष्ठ शोधकर्ता तथा ज्ञानमार्ग से साधना कर भारतीय संस्कृति के उत्थान हेतु समर्पित भाव से अलौकिक कार्य करनेवाले ठाणे के डॉ. शिवकुमार ओझा (आयु ८५ वर्ष) ७१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त कर संतपदपर विराजमान हुए ।

पोला (बैलोंका त्यौहार – बेंदुर अथवा बेंडर)

किसान-समाजमें इस उत्सवका अत्यधिक महत्त्व है । बुआई हो जानेपर खेतीके कामोंसे बैल खाली हो जाते हैं, तब उन्हें रगडकर नहलाया जाता है, उनकी आरती उतारी जाती है एवं नैवेद्य दिखानेके पश्‍चात दोपहरमें उन्हें रंगकर एवं सजाकर गांवमें जुलूस निकाला जाता है ।

ज्योतिष के बारे में सामान्य प्रश्न

पुराने और नई जन्मतिथि के अनुसार संपूर्ण भविष्य में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं आता । तिथि के बदलने से केवल तिथि का फल बदलता है ।

१०० प्रतिशत अचूक भविष्य के लिए स्त्री बीज फलित होने का समय ज्ञात होना आवश्यक !

सामान्यरूप से आजकल जन्मकुंडली के आधारपर ज्योतिषी जो बताते हैं, उसमें का केवल ३० से ३५ प्रतिशत भविष्यवाणी अचूक होती है ।

ज्योतिषशास्त्र – वेदों का अंग !

‘ज्योतिष’ शब्द ज्योति + ईश से बना है । ‘ज्योति’ का अर्थ ‘तेज’ तथा ‘ईश’ का अर्थ ‘ईश्वर’ अर्थात ‘ईश्वर के तेज से युक्त शास्त्र ज्योतिषशास्त्र है ।

रामायण एवं श्रीमद्भगवद्गीता इन ग्रंथों की आध्यात्मिक विशेषताएं !

श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक ग्रंथ नहीं है, अपितु वह श्रेष्ठतम धर्मग्रंथ एवं ज्ञान का अनमोल भण्डार है । श्रीकृष्णजी द्वारा अर्जुन को द्वापरयुग में बताई गई श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान कलियुग के मनुष्य के लिए भी अचूकता से लागू होता है ।

‘टैटू’ की पाश्‍चात्त्य विकृति को दूर रखिए !

टैटू के कारण घातक संक्रमरकारी रोग फैलते हैं । दूसरों की अपेक्षा अलग दिखने तथा सुंदरता बढाने हेतु शरीरपर टैटू गोद लेने का अर्थ स्शवयं में विद्यमान अहं का पोषण करना है ।

गुरुदेवजी के जन्मोत्सव के समय गायनसेवा प्रस्तुत करनेवाली २ साधिकाओं में से एक साधिका की आंखें बंद होना तथा दूसरी साधिका की आंखे खुली रहना, इसका शास्त्र !

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के ७७वें जन्मोत्सव के अवसरपर अध्यात्म विश्वविद्यालय की ६१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त साधिका कु. तेजल पात्रीकर एवं कु. अनघा जोशी ने गायन के माध्यम से स्वरांजली समर्पित की ।