देवता को चित्र-विचित्र रूप में दिखाकर देवता की अवकृपा ओढ न लें !

धर्महानि रोकना कालानुसार आवश्यक धर्मपालन है और वह उस देवता की समष्टि स्तर की साधना ही है । बिना इस उपासना के देवता की उपासना पूर्ण नहीं हो सकती है ।

कागद की लुगदी से बनाई गई गणेशमूर्ति हानिकारक होने का वैज्ञानिकदृष्टि से भी प्रमाणित !

हाल ही में कथित पर्यावरणवादी कागद की लुगदी से बनाई जानेवाली श्री गणेशमूर्ति का समर्थन करते हैं, तथापि उसके कारण कितना प्रदूषण होता है, यह भी जान लेना आवश्यक है । 

साधना में अति शीघ्र प्रगति का मार्ग कौन सा है ?

घर-द्वार का त्याग कर गुरुसान्निध्य में रहना साधना में अति शीघ्र प्रगति का मार्ग है । गुरु के प्रति खरे प्रेम की उत्पत्ति हेतु इस सान्निध्य की आवश्यकता है । गुरु के साथ रहने पर ही विषयों पर अंकुश रहता है ।

शिष्य में कौन-से गुण होने आवश्यक हैं ?

आज्ञा की पृष्ठभूमि से शिष्य कदाचित अनभिज्ञ हो; परंतु उसे इस बात का पूर्ण विश्वास होता है कि ‘गुरु की विचारधारा कल्याणकारी है’; अतः सत्शिष्य सद्गुरु की आज्ञा का पालन निस्संदेह करता है । वे कहें ‘नामजप कर’, तो वह उसी अनुसार करता है ।

शिष्य

आध्यात्मिक उन्नति हेतु जो गुरु द्वारा बताई साधना करता है, उसे ‘शिष्य’ कहते हैं । शिष्यत्व का महत्त्व यह है कि उसे देवऋण, ऋषिऋण, पितरऋण एवं समाजऋण चुकाने नहीं पडते ।

श्री गणेशमूर्ति विसर्जन का विरोध करनेवाले ढोंगी सुधारकों की टोली का पशुवधगृह और अपशिष्ट जल (गंदे पानी) के कारण होनेवाले जलप्रदूषण की ओर अनदेखा !

नियंत्रक और महालेखापरीक्षक का आर्थिक वर्ष २०१०-११ (३१ मार्च २०११ को समाप्त हुआ आर्थिक वर्ष) के ब्यौरे में जलप्रदूषण के स्रोत के विषय में बताते हुए उन्होंने पशुवधगृहों का उल्लेख किया था । उसमें आगे दिए अनुसार कहा है ।

श्री गणेशभक्तो, क्या आप ये जानते हैं ?

श्री गणेश ब्रह्मांड की दूूषित शक्ति को आकर्षित करनेवाले हैं, इसके साथ ही मनुष्य की बुद्धि में विवेक निर्माण करनेवाले हैं । श्री गणेश की उपासना से विकल्पशक्ति प्रभाव नहीं डालती ।

गणेश मूर्ति विसर्जन से प्रदूषण होता है, ऐसा शोर मचानेवालों, अपशिष्ट जल (कारखानों इत्यादि का पानी) द्वारा होनेवाले भीषण जलप्रदूषण का विचार करें !

महाराष्ट्र की नगरपालिका और नगरपरिषद के क्षेत्रों में प्रतिदिन निर्माण होनेवाले अपशिष्ट जल, उस पर की जानेवाली प्रक्रिया और उसका निस्तारण, इस विषय की एक सारणी शासन ने ही प्रकाशित की है । यह सारणी फरवरी २०१४ की है । इससे आपके ध्यान में आएगा कि जलप्रदूषण गणेश मूर्ति के कारण होता है कि शासकीय अधिकारियों की कामचोरी के कारण ?

सनातन-निर्मित सात्त्विक श्री गणेशमूर्ती

श्री गणपतिके हाथकी लंबाई, मोटाई, आकार अथवा मुकुटकी कलाकृतियोंमें थोडा भी परिवर्तन करनेपर पूरे स्पंदन परिवर्तित हो जाते हैं ।

Donating to Sanatan Sanstha’s extensive work for nation building & protection of Dharma will be considered as

“Satpatre daanam”