‘आधुनिकतावादी एवं बुद्धिप्रमाण वादी आगे ‘विवाहित स्त्रियां मंगलसूत्र न पहनें, कुमकुम न लगाएं, गौरी पूजन अथवा वट सावित्री का व्रत न करें’, इत्यादि फतवे निकालने लगें, तो आश्चर्य नहीं होगा ! इसलिए आगे की पीढियों के कल्याण हेतु हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करें !’
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
हिन्दुओ, ‘हिन्दू राष्ट्र मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं उसे प्राप्त करके रहूंगा’, ऐसा निश्चय...
पूर्वकाल का परिवार की भांति एकत्र रहनेवाला समाज और आज का टुकड़े-टुकड़े हो चुका समाज...
हिन्दू धर्म में सहस्रों ग्रंथ होने का शास्त्र !
हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के कार्य हेतु समष्टि साधना आवश्यक !