‘स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं उसे पाकर रहूंगा’, ऐसा लोकमान्य टिळक ने कहा था और इसके लिए उन्होंने जीवन भर प्रयास किए । इसी प्रकार ‘हिन्दू राष्ट्र मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं उसे पाकर रहूंगा’, ऐसा निश्चय कर, प्रत्येक हिन्दू को उसके लिए संघर्ष करने की वृत्ति के साथ संवैधानिक मार्ग से प्रयास करने चाहिए !
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
पूर्वकाल का परिवार की भांति एकत्र रहनेवाला समाज और आज का टुकड़े-टुकड़े हो चुका समाज...
शासनकर्ताओं को यह कैसे समझ में नहीं आता ?
हिन्दू धर्म में सहस्रों ग्रंथ होने का शास्त्र !
हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के कार्य हेतु समष्टि साधना आवश्यक !