‘धर्म एक ही है और वह है, हिन्दू धर्म । अन्य सभी पंथ हैं । हिन्दू धर्म के अतिरिक्त अन्य धर्मों का (पन्थों का) इतिहास देखें, तो उसमें विविध काल में लाखों हत्याओं का, क्रूरता का, बलात्कारों का, जीते हुए प्रदेश के स्त्री-पुरुषों को गुलाम के रूप में बेचने का सहस्रों बार उल्लेख है। मात्र अनादि काल से बने हुए हिन्दू धर्म के इतिहास में ऐसा एक भी उदाहरण नहीं ।’
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
हिन्दुओ, ‘हिन्दू राष्ट्र मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं उसे प्राप्त करके रहूंगा’, ऐसा निश्चय...
पूर्वकाल का परिवार की भांति एकत्र रहनेवाला समाज और आज का टुकड़े-टुकड़े हो चुका समाज...
हिन्दू धर्म में सहस्रों ग्रंथ होने का शास्त्र !
हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के कार्य हेतु समष्टि साधना आवश्यक !