‘पश्चिमी देशों में रोटी, कपडा और मकान होते हुए भी मानसिक अस्वस्थता के कारण वहां के नागरिक आत्महत्या करते हैं । इसके विपरीत भारत की जनता की रोटी, कपड़ा तथा मकान जैसी मूलभूत आवश्यकताएं भी स्वतंत्रता से लेकर अभी तक की सरकारों ने पूर्ण नहीं की, इसलिए यहां के नागरिक आत्महत्या करते हैं । इसे टालने के लिए हिन्दू राष्ट्र ही आवश्यक है ।’
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
हिन्दुओ, ‘हिन्दू राष्ट्र मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं उसे प्राप्त करके रहूंगा’, ऐसा निश्चय...
पूर्वकाल का परिवार की भांति एकत्र रहनेवाला समाज और आज का टुकड़े-टुकड़े हो चुका समाज...
हिन्दू धर्म में सहस्रों ग्रंथ होने का शास्त्र !
हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के कार्य हेतु समष्टि साधना आवश्यक !