हास्यास्पद साम्यवाद !

‘जनता की शिक्षा, आरोग्य, रुचि-अरुचि में भी साम्यवादी समानता नहीं ला सकते, ऐसी स्थिति में राष्ट्र में साम्यवाद क्या लाएंगे ?’
-(परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले

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