सनातन आश्रम में कोटा पटिया पर अपनेआप बने ॐ के चारों ओर श्‍वेत वलय निर्मित होना

साधना करने से व्यक्ति की आध्यात्मिक शक्ति जैसे-जैसे बढती है, वैसे-वैसे उसमें तथा उसके आसपास की वस्तुओं में भी, अनेक सकारात्मक परिवर्तन होने लगते हैं ।

कर्म, ज्ञान एवं भक्ति का सुंदर संगम बने बेळगाव (कर्नाटक) के डॉ. नीलकंठ दीक्षितजी (आयु ९० वर्ष) सनातन के ८७ वें व्यष्टि संतपदपर विराजमान !

पू. दीक्षितदादाजी सदैव निर्विचार अवस्था में तथा अखंड भाव की स्थिति में होते हैं । दादाजी के शरीर में दैवीय परिवर्तन आए हैं तथा उनके अस्तित्व के कारण उनके निवास में भी परिवर्तन आए हैं ।

प्रेमभाव एवं परात्पर गुरु डॉक्टरजी के प्रति अनन्य भाव आदि गुणों से युक्त शालिनी माईणकरदादीजी (आयु ९२ वर्ष) !

शालिनी माईणकरजी (आयु ९२ वर्ष) विगत २७ वर्षों से सनातन संस्था के मार्गदर्शन में साधना कर रही हैं । आजकल वे उनकी पुत्री श्रीमती मेधा विलास जोशीसहित नंदनगद्दा, कारवार, कर्नाटक में रहती हैं ।

सात्त्विक, सहनशील वृत्ति, निरपेक्ष प्रेम आदि दैवीय गुणों से युक्त शालिनी माईणकरदादीजी (आयु ९२ वर्ष) संतपदपर विराजमान !

मूलतः सात्त्विक वृत्ति तथा अल्प अहं से युक्त माईणकरदादीजी ने गृहस्थी के प्रत्येक प्रसंग का सहनशीलता के साथ सामना किया । प्रत्येक प्रसंग को उन्होंने ईश्वरेच्छा के रूप में स्वीकार किया और अध्यात्म को प्रत्यक्षरूप से आचरण में कैसे लाना है ?, इसकी सीख सभी को दी ।

श्री हनुमान तत्त्वको आकृष्ट करनेवाली रंगोली

श्रीहनुमान के मारक तत्त्वको आकृष्ट करनेवाली रंगोली मध्यबिंदू से अष्टदिशांमें प्रत्येकी ५ बिंदू श्रीहनुमान के तारक तत्त्वको आकृष्ट करनेवाली रंगोली मध्यबिंदू से अष्टदिशांमें प्रत्येकी ४ बिंदू

परात्पर गुरु पांडे महाराज का छायाचित्रमय जीवनदर्शन

ईश्वर की कृपा से ही प.पू. बाबाजी के छायाचित्रों द्वारा दर्शाया गया यह अल्प परिचय उनके चरणों में सविनय अर्पण करते हैं !

यज्ञ का प्रथमावतार ‘अग्निहोत्र’के विषय में वैज्ञानिक शोध !

विज्ञान के माध्यम से अग्निहोत्र का वातावरणपर क्या परिणाम होता है ?, इसके अध्ययन हेतु महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय की ओर से एक परीक्षण किया गया । इस परीक्षण हेतु यू.टी.एस्. (युनिवर्सल थर्मो स्कैन) उपकरण का उपयोग किया गया ।

एक दिन यज्ञ करने से १०० यार्ड क्षेत्र में १ मासतक प्रदूषण नहीं हो सकता ! – अवकाश वैज्ञानिक डॉ. ओमप्रकाश पांडेय

बेंगलुरु की प्रयोगशाला में किए गए परीक्षण से यह प्रमाणित हुआ है कि हम हवन और यज्ञ कर स्वयं को रोगों से दूर रख सकते हैं । एक दिन यज्ञ करने से १०० यार्ड क्षेत्र में १ मासतक प्रदूषण नहीं हो सकता ।

सनातन के ४२ वें समष्टि संत पू. अशोक पात्रीकरजी द्वारा वर्णित ‘एक अभियंता’ से ‘संत’ बनने तक की साधना यात्रा !

पू. अशोक पात्रीकरजी यवतमाळ (महाराष्ट्र) में शासन के ‘जीवन प्राधिकरण’ विभाग में ‘शाखा अभियंता’ के पद पर कार्यरत थे, तब वर्ष १९९७ में उनका संपर्क सनातन संस्था से हुआ ।

योगतज्ञ दादाजी वैशंपायन द्वारा दी गई संस्कारित दत्तमूर्ति का परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी द्वारा आध्यात्मिक उपचारों के लिए उपयोग करने पर उस दत्तात्रेय मूर्ति पर हुआ परिणाम

‘परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी विश्वकल्याण हेतु सत्त्वगुणी लोगों का ईश्वरी राज्य स्थापित करने हेतु प्रयासरत हैं । ज्योतिषशास्त्रानुसार वर्ष १९८९ से उनके जीवन में अनेक बार महामृत्युयोग आए हैं ।