योगः कर्मसु कौशलम् । इस वचन की प्रतीति देनेवाले सनातन के साधकों की परिपूर्ण सेवाभाव से साकार हुई कलाकृतियां !

कला ईश्‍वरप्राप्ति का एक माध्यम है । उस कला के स्वरूप की अपेक्षा उसे करते समय आनंद अनुभव करना अधिक महत्त्वपूर्ण है । योग्य साधना करने के कारण प्रत्येक कृत्य परिपूर्ण होता है और उस परिपूर्णता से ही सुंदर कला की उत्पत्ति होती है ।

आध्यात्मिक पहेली

अधिकांश नियतकालिकों में शब्दपहेलियां होती हैं । वे बौद्धिक स्तर की होती हैं । यहां मानसिक स्तर की पहेली दी है । सनातन प्रभात आध्यात्मिक नियतकालिक होने से इस लेखमाला में आध्यात्मिक स्तर की पहेलियां दी हैं ।

आध्यात्मिक पहेलियां (उत्तरोंसहित)

सनातन प्रभात आध्यात्मिक नियतकालिक होने से इस लेखमाला में आध्यात्मिक स्तर की पहेलियां दी हैं । इन पहेलियों से यह समझ में आएगा कि मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक स्तर की पहेलियां क्या होती हैं ।

आध्यात्मिक पहेली

अधिकांश नियतकालिकों में शब्दपहेलियां होती हैं । वे बौद्धिक स्तर की होती है । यहां मानसिक स्तर की पहेली दी है । इस लेखमाला में आध्यात्मिक स्तर की पहेलियां दी हैं ।

श्रीकृष्णतत्वसे संबंधित रंगोलीकी विशेषताएं एवं पूजाविधिमें अंतर्भूत कृत्योंका शास्त्राधार

त्यौहारके दिन वातावरणमें त्यौहारसे संबंधित विशिष्ट देवताका तत्त्व कार्यरत रहता है । विशिष्ट देवता तत्त्वको आकृष्ट करने हेतु विशिष्ट प्रकारकी रंगोली बनानेसे लाभ होता है ।

श्री हनुमान तत्त्वको आकृष्ट करनेवाली रंगोली

श्रीहनुमान के मारक तत्त्वको आकृष्ट करनेवाली रंगोली मध्यबिंदू से अष्टदिशांमें प्रत्येकी ५ बिंदू श्रीहनुमान के तारक तत्त्वको आकृष्ट करनेवाली रंगोली मध्यबिंदू से अष्टदिशांमें प्रत्येकी ४ बिंदू