आयुर्वेदानुसार अपनी दिनचर्या बनाएं !
सेब मूलतः भारतीय फल है ही नहीं । अंग्रेज उसे अपने साथ लाए थे । वास्तव में इस फल में ऐसे कोई भी विशेष औषधीय गुणधर्म नहीं हैैं, जो भारतीय फलों में पाए जाते हैं ।
सेब मूलतः भारतीय फल है ही नहीं । अंग्रेज उसे अपने साथ लाए थे । वास्तव में इस फल में ऐसे कोई भी विशेष औषधीय गुणधर्म नहीं हैैं, जो भारतीय फलों में पाए जाते हैं ।
ऊसंधि (जांघ और पेट के मध्य का भाग), कांख, जांघ और कूल्हों पर जहां पसीने के कारण त्वचा नम रहती है, वहां कभी-कभी खुजली और छोटी-छोटी फुंसियां होती हैं । उनके फैलने से गोल ददोडे (रिंग वर्म) निर्माण होते हैं । इन ददोडों पर आगे दिए दोनों उपचार करें ।
आज अग्नि दैनिक जीवन-व्यापार का अत्यावश्यक घटक है, तब भी उसके संदर्भ में नियंत्रित तथा अनियंत्रित स्वरूप की जो लक्ष्मणरेखा होती है, वह अधिक महत्त्वपूर्ण है । मनुष्य द्वारा सामान्यत: प्रयुक्त आग के सर्व प्रकार नियंत्रित होते हैं; किंतु किसी विशेष प्रसंग में आग नियंत्रण की सीमारेखा लांघ सकती है ।
जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से जड़ी-बूटियों के संरक्षण के लिए तैयार किए जा रहे डाटा बेस के तहत पहली बार विज्ञानियों ने बदरी तुलसी पर परीक्षण किया।
निरोगी शरीर के लिए साबुन न लगाना ही श्रेयस्कर है । साबुन के स्थान पर पिसी हुई चना दाल अथवा मसूर दाल अथवा बमीठे अथवा अच्छे स्थान की छनी मिट्टी का उपयोग करना, अच्छा और सस्ता है ।
आपातकाल का सामना करने की तैयारी के एक भाग के रूप में सनातन संस्था ने आपातकाल में संजीवनी समान प्रभावी ग्रंथमाला प्रकाशित की है । इस ग्रंथमाला से सीखी गईं उपचारपद्धतियां केवल आपातकाल की दृष्टि से नहीं, अपितु अन्य समय भी उपयोगी हैं । इस ग्रंथमाला के नूतन ग्रंथ, प्राणशक्ति (चेतना) प्रणाली में अवरोधसे उत्पन्न होनेवाले विकारों पर उपाय से परिचय करवा रहे हैं ।
गोपियुष अर्थात प्रसूती पश्चात ४८ से ७२ घंटों में गाय द्वारा प्राप्त प्रथम दूध । गोपियुष और माता द्वारा प्राप्त पियुष में वैज्ञानिक दृष्टि से बहुत सी समानता पाई गई है । गोपियुष में रोगप्रतिकारक शक्ति और शरीर की सुदृढता के लिए आवश्यक ९० से अधिक पोषकतत्त्व हैं । गोपियुष सुदृढ मानवीय शरीर हेतु ईश्वरप्रदत्त अनमोल देन है ।
चावल पकाने की हमारी पारंपरिक पद्धति क्या है ? प्रथम चावल के १६ गुना पानी १०० सेंटीग्रेड पर उबालें ।…
वर्षाकाल का प्रमुख लक्षण है, भूख मंद होना । भूख मंद होने पर भी पहले जैसा ही आहार लेने से वह अनेक रोगों को आमंत्रित करता है; क्योंकि मंद हुई भूख अथवा पाचनशक्ति अधिकतर विकारों का मूल कारण है ।
प्रत्येक व्यक्ति को लगता है हम गोरे दिखें । इसलिए वह कोई भी उपाय करने के लिए तैयार रहता है । इसके परिणामस्वरूप फेअरनेस क्रीम की भारी मात्रा में मांग है; परंतु त्वचा को गोरा बनानेवाली ये क्रीम व्यक्ति के आरोग्य के लिए हानिकारक हो सकती हैं और अनेक रोगों के उत्पन्न होने की संभावना है ।