गुरुकृपायोगानुसार करने योग्य साधना का नियम

कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग आदि किसी भी मार्ग से साधना करने पर भी बिना गुरुकृपा के व्यक्ति को ईश्‍वरप्राप्ति होना असंभव है । इसीलिए कहा जाता है, गुरुकृपा हि केवलं शिष्यपरममङ्गलम् ।,

नामजप कौनसा करें ?

जीवन के दुःखों का धीरज से सामना करने का बल एवं सर्वोच्च श्रेणी का स्थायी आनंद केवल साधनाद्वारा ही प्राप्त होता है । साधना अर्थात् ईश्वरप्राप्ति हेतु आवश्यक प्रयत्न ।

अहं-निर्मूलन

सभी दृष्टिसे परिपूर्ण ईश्वरकी शरणमें जाकर अहं-निर्मूलनकी प्रक्रिया शास्त्रशुद्धरूपसे कार्यान्वित करनेसे अपने जीवनविषयक दृष्टिकोणमें हुआ आमूल परिवर्तन हमें सुखी वैवाहिक जीवन दे सकता है !