पांडुरंग एवं एकादशी की महिमा !

आषाढ एवं कार्तिक माह के शुक्लपक्ष में आनेवाली एकादशी के समय श्रीविष्णु का तत्त्व पृथ्वीवर अधिक मात्रा में आने से श्रीविष्णु से संबंधित ये दो एकादशियों का महत्त्व अधिक है ।

उदयकाल के संदर्भ में पालन करने योग्य आचार

उदयकालीन सूर्य की किरणों का स्पर्श क्यों न होने दें ?, सूर्योदय एवं सूर्यास्त के संधिकाल में साधना करने का महत्त्व
सनातन निर्मित ग्रंथ : आदर्श दिनचर्या एवं अध्यात्मशास्त्र

भगवान को नैवेद्य दिखाने का आधारभूत शास्त्र

नैवेद्य दिखाते समय सात्त्विक अन्न का नैवेद्य भावपूर्ण प्रार्थना करके भगवान को अर्पण करने पर उस नैवेद्य के पदार्थ की सात्त्विकता के कारण भगवान से प्रक्षेपित होनेवाली चैतन्य-लहरें नैवेद्य की ओर आकृष्ट होती हैं । इससे नैवेद्य के लिए अन्न बनाते समय उसमें देशी घी के समान सात्त्विक पदार्थाें का उपयोग किया जाता है ।

रसोईघर कैसा हो ?

अन्न खुला न रखें, अन्न को ढककर रखें । स्थूलरूप से अन्न की रक्षा हेतु, अन्न में कोई जीव-जंतु न जाए आदि कारणों से हम उसे ढककर रखते हैं । स्थूल के साथ सूक्ष्मरूप से भी अन्न की रक्षा हो, इसके लिए उ से ढकना आवश्यक है ।

रामनवमी पूजाविधि

प्रभु श्रीराम का जन्म माध्यान्हकाल अर्थात दो. १२ बजे मनाया जाता है । प्रभु श्रीराम की मूर्ति की अथवा प्रतिमा, हमें जो भी संभव हो, उसका पंचोपचार अथवा षोडशोपचार पूजन करें ।

छत्रपति संभाजी महाराज का बलिदानदिन और हिन्दू नववर्षारंभ दिन ‘चैत्रप्रतिपदा’ (गुढीपाडवा) का एक-दूसरे से संबंध नहीं !

छत्रपति संभाजी महाराज का बलिदानदिन और हिन्दू नववर्षारंभ दिन चैत्रप्रतिपदा एक-दूसरे से लगकर आते हैं । वर्ष २०१३ में महाराष्ट्र राज्य के खानदेश और मराठवाडा में कुछ जातिवादियों ने कहा कि चैत्रप्रतिपदा के दिन गुढी (बांस अथवा लाठी पर उलटा टांगा गया कलश) खडी करने से छत्रपति संभाजी का अपमान होता है । इसलिए, उन्होंने वहां के हिन्दुओं को ऐसा नहीं करने दिया और जिन्होंने गुढी खडी की थी, उसे नीचे खींच दिया ।

ब्राह्ममुहूर्त पर उठने के ९ लाभ !

ब्राह्ममुहूर्त यह सवेरे ३.४५ से ५.३० तक ऐसे दो घंटों का होता है । इसे रात्रि का ‘चौथा प्रहर’ अथवा ‘उत्तररात्रि’ भी कहते हैं । इस काल में अनेक बातें ऐसी होती रहती हैं कि जो दिनभर के काम के लिए लगनेवाली ऊर्जा करती हैं । इस मुहूर्त पर उठने से हमें एक ही समय पर ९ लाभ मिलते हैं ।

कुमकुम अथवा गंध लगाने की कुछ पद्धतियां एवं उनका आध्यात्मिक महत्त्व

अधिकांश हिन्दू स्त्रियां एवं कुछ पुरुष माथे पर कुमकुम अथवा गंध लगाते हैं । उनकी लगाने की पद्धति प्रांत अथवा संप्रदाय अनुसार भिन्न होती है । स्त्रियों एवं पुरुषों का माथे पर कुमकुम अथवा गंध लगाने का आध्यात्मिक महत्त्व आगे दिएनुसार है ।

सामाजिक माध्यमों द्वारा श्रीगणेश के नाम पर पारपत्र प्रसारित कर श्रीगणेश का अनादर !

‘भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी को श्रीगणेश का आगमन होगा’, इस संकल्पना पर श्रीगणेश का चित्रयुक्त पारपत्र (पासपोर्ट) सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित कर श्रीगणेश का अवमान किया गया । इस पारपत्र पर भाग्यनगर (हैद्राबाद) पारपत्र कार्यालय की मोहर एवं पारपत्र प्रदान अधिकारी पी. कृष्णा चार्या का नाम एवं हस्ताक्षर हैं । यह पारपत्र विनोद के रूप में सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित किया गया है ।

श्रावण मास की जानकारी

अनुक्रमणिका१. नागपंचमीतिथिइतिहासनागकी महिमापूजनभावार्थनिषेध२. श्रावण पूर्णिमा (नारियल पूर्णिमा)समुद्रपूजन३. रक्षा (राखी) बंधनइतिहासभावनिक महत्त्वराखी बांधनाप्रार्थना करनाराखी के माध्यम से होनेवाला देवताओं का अनादर रोकिए !४. श्रावणी (उपकर्म एवं उपाकरण)तिथिमहत्त्वविधि करने की पद्धति५. श्रावणी सोमवार एवं शिवमुष्टिव्रतश्रावणी सोमवार (शंकर व्रत)शिवमुष्टिव्रत६. मंगलागौरी७. जरा-जीवंतिका पूजन८. हरियाली (पिठोरी अमावस्या, दीपपूजा)विधि९. हरितालिकातिथिइतिहास एवं उद्देश्यव्रत करने की पद्धति १. नागपंचमी तिथि श्रावण शुक्ल पक्ष … Read more