विपरीत आहार के प्रकार
कुछ व्यक्तियों के लिए देश, काल, अग्नि, प्रकृति, दोष, आयु इत्यादि का विचार करने पर कुछ अन्नपदार्थ हानिकारक सिद्ध होते हैं । ऐसे खाद्य पदार्थ विपरीत आहार में समाविष्ट होते हैं ।
कुछ व्यक्तियों के लिए देश, काल, अग्नि, प्रकृति, दोष, आयु इत्यादि का विचार करने पर कुछ अन्नपदार्थ हानिकारक सिद्ध होते हैं । ऐसे खाद्य पदार्थ विपरीत आहार में समाविष्ट होते हैं ।
‘संपूर्ण देश में महाशिवरात्रि बडे उत्साह से मनाई जाती है । फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को शिवजी का व्रत महाशिवरात्रि करते हैं । (इस वर्ष ११ मार्च २०२१ को महाशिवरात्रि है ।) उपवास, पूजा और जागरण महाशिवरात्रि व्रत के ३ अंग हैं ।
हमारे तीर्थक्षेत्र अथवा नदियों के कुंड अथवा देवालय में दिया जानेवाला तीर्थ अथवा भोजन से पूर्व पानी से ५ बार ली जानेवाली अपोष्णी आदि सब कुछ हिन्दू संस्कृति ने प्राचीन काल से पानी की असीमित और जीवित शक्ति के अध्ययन से ही हम तक पानी का महत्त्व और लाभ पहुंचाने के लिए तैयार किए हैं ।
शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम् । अर्थात, धर्माचरण के लिए (साधना करने के लिए) शरीर का स्वस्थ रहना अत्यंत आवश्यक है ।
१६.१२.२०२० से १३.१.२०२१ तक धनुर्मास था । इस मास के पांच गुरुवार और शुक्रवार अत्यंत महत्त्वपूर्ण होते हैं । चंद्र की संक्रांति की अधिकतावाले इस मास में भगवान की आराधना, भगवान का नामजप, भागवत कथा श्रवण, व्रत, दान, दीपदान, सत्संग और निष्काम कर्म करने का विशेष माहात्म्य है । इस मास में आनेवाली एकादशी को ‘वैकुंठ एकादशी’ कहते हैं । धनुर्मास में इस दिन को सर्वाधिक महत्त्व होता है ।
कोरोना महामारी की पृष्ठभूमि पर लागू की गई संचार बंदी यद्यपि उठाई जा रही है तथा जनजीवन पूर्ववत हो रहा है, तथापि कुछ स्थानों पर सार्वजनिक प्रतिबंधों के कारण सदैव की भांति दीपावली मनाना संभव नहीं हो पा रहा है । ऐसे स्थानों पर दीपावली कैसे मनाएं, इससे संबंधित कुछ उपयुक्त सूत्र और दृष्टिकोण यहां दे रहे हैं ।
नौकरी-व्यवसाय के उपलक्ष्य में पूरे विश्व में फैले भारतीय लोगों ने दीपावली के त्योहार को पूरे विश्व में प्रसारित कर दिया है । अन्य राष्ट्रों में दीपावली का त्योहार कैसे मनाया जाता है और उसे मनाते समय भारत की अपेक्षा उनमें क्या अलग होता है, इस लेख से हम इसे जानेंगे ।
कहते हैं ‘जैसा अन्न, वैसा मन’। अर्थात भोजन बनाते समय हमारे मन में जैसा भाव होगा, वैसा ही भाव खानेवाले के मन में भी निर्माण होता है । यदि हम भावपूर्ण भोजन बनाएंगे, तो वह भोजन प्रसाद स्वरूप होगा । इसलिए अब हम अपनी रसोई बनाते समय कैसा भाव रखेंगे, यह देखते हैं ।
कोरोना महामारी की पृष्ठभूमि पर लागू की गई यातायात बंदी, साथ ही अन्य प्रतिबंधों के कारण कुछ स्थानों पर सामान्य की भांति नवरात्रोत्सव मनाने पर मर्यादाएं आनेवाली हैं ।