रक्षाबंधन (राखी)

पाताल के बलिराजा के हाथ पर राखी बांधकर, लक्ष्मी ने उन्हें अपना भाई बनाया एवं नारायण को मुक्त करवाया । वह दिन था श्रावण पूर्णिमा ।

श्राद्ध तिथिनुसार क्यों करें ?

‘प्रत्येक कृतिकी परिणामकारकता, उसका कार्यरत कर्ता (उसके कर्ता), कार्य करनेका योग्य समय एवं कार्यस्थल आदिपर निर्भर करती है ।

दशहरा (विजयादशमी)

आश्विन शुक्ल दशमीकी तिथिपर दशहरा मनाते हैं । दशहरेके पूर्वके नौ दिनोंमें अर्थात नवरात्रिकालमें दसों दिशाएं देवीमांकी शक्तिसे आवेशित होती हैं ।

देवालयमें दर्शनकी योग्‍य पद्धति

`देवालय’ अर्थात् जहां भगवानका साक्षात् वास है । दर्शनार्थी देवालयमें इस श्रद्धासे जाते हैं कि, वहां उनकी प्रार्थना भगवानके चरणोंमें अर्पित होती है और उन्हें मन:शांति अनुभव होती है ।

हिंदु धर्ममें बताए गए वस्त्र धारण करनेसे क्या लाभ होता है ?

हिंदु धर्ममें स्त्री एवं पुरुषद्वारा धारण किए जानेवाले वस्त्रोंकी रचना देवताओंने की है । इसीलिए ये वस्त्र शिव एवं शक्ति तत्त्व प्रकट करते हैं । स्त्रियोंके वस्त्रोंसे अर्थात साडीसे शक्तितत्त्व जागृत होता है एवं पुरुषोंके वस्त्रोंसे शिवतत्त्व जागृत होता है ।

नींदसे जागनेपर की जानेवाली कृतियां

रात्रिकालमें तमोगुण प्रबल होता है । ‘भूमिसे प्रार्थना कर ‘समुद्रवसने देवी…’ श्लोक कहकर भूमिपर पैर रखनेसे, रात्रिकालमें देहमें आवेशित कष्टदायक स्पंदन भूमिमें विसर्जित हो जाते हैं ।

शौचविधि करनेसे पूर्व, जनेऊ दाहिने कानपर क्‍यों लपेटें ?

हाथ-पैर धोकर, कुल्ला करनेके उपरांत जनेऊ कानसे हटाएं । इसका आधारभूत शास्त्रीय कारण यह है कि, शरीरके नाभिप्रदेशसे ऊपरका भाग धार्मिक क्रियाओंके लिए पवित्र है, जबकि उससे नीचेका भाग अपवित्र माना गया है ।

झाडू लगाते समय पूर्व दिशाकी ओर कूडा क्‍यों ना ढकेलें ?

पूर्व दिशाकी ओरसे देवताओंकी सगुण तरंगोंका पृथ्वीपर आगमन होता है । कूडा रज-तमात्मक होता है, इसलिए पश्चिमसे पूर्वकी ओर कूडा ढकेलते समय कूडा और धूलका प्रवाह पूर्व दिशामें होता है ।