गुरुपूर्णिमा निमित्त परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी का संदेश

भावी आपातकाल के लिए तैयारी करना, कालानुसार गुरु की आज्ञा का पालन है !

परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले

वर्तमान में देश और धर्म की दृष्टि से आपातकाल चल रहा है । प्राकृतिक आपदाओं का निरंतर आना, देशद्रोहियों और धर्मद्रोहियों का प्रबल होना, राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न करनेवाली घटनाएं होना; समाज, राष्ट्र और धर्म के हित में किए जानेवाले कार्य में बाधा आना आदि आपातकाल के भौतिक लक्षण हैं । ऐसे काल में सामान्य नागरिकों का दैनिक जीवन संघर्षमय होता है गुरुपूर्णिमा के कुछ महीने पश्‍चात आपातकाल की भीषणता बढेगी । इस आपातकाल के पश्‍चात, अगले वर्ष के आरंभ में भारत को आपातकाल का सामना करना पडेगा । अनेक युगद्रष्टा संतों ने कहा है कि देश में जाति-धर्म के नाम पर गृहयुद्ध भडकाने का षड्यंत्र देशविरोधी शक्तियां रचेंगी । वर्ष १९४७ के सांप्रदायिक दंगों की भांति भीषण परिस्थिति देश में उत्पन्न होगी । वर्ष २०२१ में देश की सीमा पर युद्ध समान परिस्थिति उत्पन्न होगी । कुल मिलाकर, वर्ष २०२० से २०२३ का कालखंड भारत के लिए आपातकाल रहेगा । उस भीषण काल में जीवन जीने में थोडी सहायता हो, इसके लिए कठोर साधना कर, आध्यात्मिक उन्नति करना और आपातकाल की दृष्टि से जीवनोपयोगी वस्तुएं जुटाना आज से ही आरंभ कर दें । इस भावी महाभीषण काल के विषय में समाज में जाकर जागृति करना भी, वर्तमानकाल में समष्टि साधना है । गुरु का न केवल शरीर होता है, अपितु वे तत्त्व भी हैं । यह तत्त्व, अनेक संतों के माध्यम से सक्रिय रहता है । आज अनेक संत और अवतारी पुरुष, भावी आपातकाल के विषय में बता रहे हैं । इससे पता चल रहा है कि वह आपातकाल कितना भीषण होगा । गुरुतुल्य संतों में समय की सीमा से परे जाने की भी क्षमता होती है । इसलिए वे काल को पहचानकर, समाज को आगामी भीषण काल के विषय में सतर्क करते रहते हैं । ऐसा कार्य शिष्य स्तर के भक्त ने किया, तो यह गुरु का मन समझकर किए समान होगा ।

आगामी महाभीषण आपातकाल में अपनी तथा समाज बांधवों की सुविधा और सुरक्षा के विषय में उन्हें बताकर उनकी उस दृष्टि से तैयारी करवाना, गुरु को अपेक्षित कालानुसार आज्ञापालन ही होगा । इस वर्ष की गुरुपूर्णिमा से यह गुरुकार्य करने का संकल्प करें !

– (परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले, सनातन संस्था.