श्रीक्षेत्र राक्षसभुवन के पांचालेश्वर मंदिर का इतिहास एवं महिमा
महाराष्ट्र के बीड जनपद के गेवराई तहसील में स्थित श्रीक्षेत्र राक्षसभुवन में गोदावरी में श्री पांचालेश्वर मंदिर है ।
महाराष्ट्र के बीड जनपद के गेवराई तहसील में स्थित श्रीक्षेत्र राक्षसभुवन में गोदावरी में श्री पांचालेश्वर मंदिर है ।
लोककथानुसार शाकुंतलम, मेघदूत आदि ग्रंथों के रचयिता तथा सम्राट विक्रमादित्य की सभामंडल के नवरत्नों में से एक प्रमुख रत्न (प्रमुख व्यक्ति) महाकवि कालिदास की श्री गढकालिकादेवी, इष्ट देवी (उपासनादेवी) मानी जाती है ।
पटना (बिहार) में पटन देवी के २ मंदिर हैं । बडी पटन देवी और छोटी पटन देवी ! मान सिंह नामक राजा ने पहले पश्चिम द्वार से प्रवेश किया, इसलिए मंदिर ‘बडी पटन देवी मंदिर’ कहलाया । तत्पश्चात पूर्वद्वार से आकर मंदिर देखा, इसलिए वह छोटी पटनदेवी का मंदिर कहलाया ।
महाराष्ट्र के बीड जनपद के गेवराई तहसील में गोदावरी नदी के दक्षिण तट पर बसा एक पवित्र दत्तपीठ !! जो अब ‘श्री राक्षसभुवन’ के नाम से जाना जाता है ।
कर्नाटक के रायचुर जनपद में बसा अत्यंत जागृत तीर्थस्थान ! कृष्णा नदी के मध्य में बसे प्राकृतिक द्वीपपर श्रीपाद श्रीवल्लभजीने १४ वर्ष निवास किया था ।
राजमाता अहिल्याबाई होलकर भगवान शिव की भक्त थीं । वे प्रतिदिन शिवजी की पूजा करती थीं । शिवजी की उपासना से उनका आध्यात्मिक बल बढ गया था और इसी बल के आधार पर ही वे उत्तम रीति से राजकाज कर सकीं ।
मां जगदंबा का एक रूप है, गोवा राज्य के फोंडा तहसील में स्थित कवळे ग्राम की श्री शांतादुर्गादेवी ! यह गोवा का अत्यंत प्राचीन, जागृत तथा विख्यात मंदिर है । श्री शांतादुर्गादेवी तथा देवी के अन्य रूपों के संदर्भ में विस्तृतरूप से हम समझ लेंगे ।
आजकल हमारे विद्यालयों में पढाया जाता है कि प्राचीन मिस्त्र (इजिप्त) देश में ‘पपायरस’ नामक पेड से कागद बनाया जाता है । परंतु, कागदनिर्माण का सत्य इतिहास कुछ और ही है ।
वर्ष १९०७ में श्रावण शुक्ल पक्ष द्वितीया को उत्तरप्रदेश के प्रतापगड जिले के भटनी ग्राम में करपात्री स्वामीजी का जन्म हुआ था ।
भगवान शिव कैलास छोडकर कभी कहीं नहीं जाते हैं । इस अवसर पर कैलास छोडकर शिवजी को पार्वती और नंदी के साथ एक गुफा में रहने जाना पडा । वह गुफा है शिवखोरी की गुफा ।
