श्रीलंका के जाफना शहर के निकट नैनातीवू द्वीप पर और ५१ शक्तिपीठों में एक नागपुषाणी देवी का सुप्रसिद्ध मंदिर !

प्राचीन काल में नैनातीवू को नागद्वीप नाम से पहचाना जाता था । यहां शक्तिपीठ के स्थान पर देवी का एक मंदिर है । उस देवी का नाम नागपुषाणी देवी है ।

महाबळेश्‍वर में श्रीकृष्णामाई का देवालय

महाबळेश्वर यहां श्री महाबळेश्वर, श्री पंचगंगा और श्री कृष्णादेवी के अति प्राचीन भव्य देवालय हैं । कुछ कामनिमित्त से महाबळेश्वर में जाने का योग आया था, तब श्री कृष्णामाई के दर्शन हेतु जानेपर ध्यान में आए सूत्र यहां प्रस्तुत कर रहा हूं ।

श्री शिकारीमाता के पुरातन मंदिर की छत का अनसुलझा रहस्य !

पांडवों ने अज्ञातवास में इसका निर्माण किया था । तब उन्होंने जानबूझकर इस मंदिर की छत नहीं बनाई और खुले आकाशतले मूर्ति की स्थापना की थी ।

मंदिर की फर्श पर लेटने से महिलाओं को होती है संतानप्राप्ति ! – देवीभक्तों की श्रद्धा

मंडी जिले के सिमस नामक गांव में सिमसा माता देवी का मंदिर है । यह देवी संतानहीन महिलाओं की मनोकामना पूर्ण करनेवाली होने से संतान दात्री नाम से विख्यात है ।

उत्तराखंड में कसारदेवी मंदिर के क्षेत्र की भू-गर्भीय तरंगों का नासा द्वारा संशोधन !

अल्मोडा (उत्तराखंड) इस जिले में कसारदेवी मंदिर की शक्ति के कारण विज्ञानवादी चकित हो गए हैं ।

हिमाचल प्रदेश में ‘भलेई माता मंदिर’

शिमला, हिमाचल प्रदेश में स्थित ‘भलेई माता मंदिर’ के विषय में वहां के भक्तों की श्रद्धा है कि यहां की देवी की मूर्ति से जब पसीना निकलता है, तब पूजक की मनोकामना पूर्ण होती है ।

५१ शक्तिपीठों में से एक बांगलादेश के सीताकुंड गांव के (जि. चितगाव) भवानीदेवी का मंदिर !

चितगांव जिले में निसर्गरम्य स्थान पर पहाडी की तलहटी में बसे सीताकुंड नामक गांव में एक शक्तिपीठ है । यहां की दुर्गादेवी को भवानी देवी कहते हैं । सीताकुंड में माता सती का दायां हाथ गिरा था ।

महाकवि कालिदास को दिव्य ज्ञान प्रदान करनेवाली उज्जैन (मध्य प्रदेश) की श्री गढकालिकादेवी

लोककथानुसार शाकुंतलम, मेघदूत आदि ग्रंथों के रचयिता तथा सम्राट विक्रमादित्य की सभामंडल के नवरत्नों में से एक प्रमुख रत्न (प्रमुख व्यक्ति) महाकवि कालिदास की श्री गढकालिकादेवी, इष्ट देवी (उपासनादेवी) मानी जाती है ।