शेषनाग की फुफकार से निर्माण हुए ‘मणिकर्ण तप्तकुंड’ (जिला कुल्लु) के दर्शन !
गरम पानी युक्त मणिकर्ण कुंड एवं वहां की शिव मूर्ति
गरम पानी युक्त मणिकर्ण कुंड एवं वहां की शिव मूर्ति
प्राचीन काल में नैनातीवू को नागद्वीप नाम से पहचाना जाता था । यहां शक्तिपीठ के स्थान पर देवी का एक मंदिर है । उस देवी का नाम नागपुषाणी देवी है ।
इस मंदिर के गर्भगृह का दीप पूरे वर्ष जलता रहता है और देवी की मूर्ति को पहनाई माला के फूल पूरे वर्ष नहीं मुरझाते ।
महाबळेश्वर यहां श्री महाबळेश्वर, श्री पंचगंगा और श्री कृष्णादेवी के अति प्राचीन भव्य देवालय हैं । कुछ कामनिमित्त से महाबळेश्वर में जाने का योग आया था, तब श्री कृष्णामाई के दर्शन हेतु जानेपर ध्यान में आए सूत्र यहां प्रस्तुत कर रहा हूं ।
पांडवों ने अज्ञातवास में इसका निर्माण किया था । तब उन्होंने जानबूझकर इस मंदिर की छत नहीं बनाई और खुले आकाशतले मूर्ति की स्थापना की थी ।
मंडी जिले के सिमस नामक गांव में सिमसा माता देवी का मंदिर है । यह देवी संतानहीन महिलाओं की मनोकामना पूर्ण करनेवाली होने से संतान दात्री नाम से विख्यात है ।
अल्मोडा (उत्तराखंड) इस जिले में कसारदेवी मंदिर की शक्ति के कारण विज्ञानवादी चकित हो गए हैं ।
शिमला, हिमाचल प्रदेश में स्थित ‘भलेई माता मंदिर’ के विषय में वहां के भक्तों की श्रद्धा है कि यहां की देवी की मूर्ति से जब पसीना निकलता है, तब पूजक की मनोकामना पूर्ण होती है ।
चितगांव जिले में निसर्गरम्य स्थान पर पहाडी की तलहटी में बसे सीताकुंड नामक गांव में एक शक्तिपीठ है । यहां की दुर्गादेवी को भवानी देवी कहते हैं । सीताकुंड में माता सती का दायां हाथ गिरा था ।
लोककथानुसार शाकुंतलम, मेघदूत आदि ग्रंथों के रचयिता तथा सम्राट विक्रमादित्य की सभामंडल के नवरत्नों में से एक प्रमुख रत्न (प्रमुख व्यक्ति) महाकवि कालिदास की श्री गढकालिकादेवी, इष्ट देवी (उपासनादेवी) मानी जाती है ।