ॐ नम: शिवाय

१. शिवजी के नामजप का महत्त्व     ‘नमः शिवाय ।’ यह शिवजी का पंचाक्षरी नामजप है । इस मंत्र का प्रत्येक अक्षर शिव की विशेषताओंका निदर्शक है । जहां गुण हैं वहां सगुण साकार रूप है । ‘नमः शिवाय ।’ इस पंचाक्षरी नामजप को निर्गुण ब्रह्म का निदर्शक ‘ॐ’कार जोडकर ‘ॐ नमः शिवाय’ यह … Read more

भगवान दत्तात्रेय

भगवान दत्तात्रेय के नामजप से निर्माण होनेवाली शक्‍ती से नामजप करनेवाले व्यक्ति के चारों ओर सुरक्षा-कवच निर्माण होता है ।

भगवान श्रीकृष्ण

१. व्युत्पत्ति एवं अर्थ अ. ‘(आ)कर्षणम् करोति इति ।’, अर्थात आकर्षित करनेवाला । ‘कर्षति आकर्षति इति कृष्णः ।’ अर्थात, जो खींचता है, आकर्षित कर लेता है, वह श्रीकृष्ण । आ. लौकिक अर्थसे श्रीकृष्ण अर्थात काला । कृष्णविवर (Blackhole) में प्रकाश है, इसका शोध आधुनिक विज्ञानने अब किया है ! कृष्णविवर ग्रह, तारे इत्यादि सबको अपनेमें खींचकर नष्ट कर … Read more

श्री हनुमते नम:

हनुमानजीकी उपासनाका उद्देश्य अन्य देवताओंकी तुलनामें हनुमानजीमें अत्यधिक प्रकट शक्ति है । अन्य देवताओंमें प्रकट शक्ति केवल १० प्रतिशत होती है, जबकि हनुमानजीमें प्रकट शक्ति ७० प्रतिशत होती है । अत: हनुमानजीकी उपासना अधिक मात्रामें की जाती है । हनुमानजीकी उपासनासे जागृत कुंडलिनीके मार्गमें आई बाधा दूर होकर कुंडलिनीको योग्य दिशा मिलती है । साथही … Read more

दुर्गादेवी का नामजप

ईश्वरप्राप्ति के लिए हर युग में विविध उपासना बताई गई है । ‘कलियुग में नाम ही आधार है’, ऐसे संतों ने बताया है । इसका अर्थ है कि कलियुग में नामजप ही श्रेष्ठ साधना है । नामजप का संस्कार मन पर होने के लिए बडे आवाज में (वैखरी में) करना लाभदायी होता है । भगवान … Read more

प्रभु श्रीरामजीका नामजप

श्रीविष्णु, श्रीराम एवं श्रीकृष्ण, अनेक श्रद्धालुओंके आस्थाकेंद्र हैं । कुछ हिंदुओंके ये सांप्रदायिक उपास्यदेवता हैं । बहुतांश उपासकोंको देवतासंबंधी जो थोडी-बहुत जानकारी रहती है, वह अधिकतर पढी-सुनी कथाओंसे होती है । ऐसी अल्प जानकारीके कारण देवताओंपर उनका विश्वास भी अल्प ही होता है । देवताओंकी अध्यात्मशास्त्रीय जानकारीसे उनके प्रति श्रद्धा निर्माण होती है एवं श्रद्धासे भावपूर्ण उपासना होती है । … Read more

श्री गणपति

१. व्युत्पत्ति एवं अर्थ गण ± पति · गणपति । संस्कृतकोशानुसार ‘गण’ अर्थात पवित्रक । पवित्रक अर्थात सूक्ष्मातिसूक्ष्म चैतन्यकण । ‘पति’ अर्थात स्वामी । ‘गणपति’ अर्थात पवित्रकोंके स्वामी । १. ‘ॐ गँ गणपतये नमः ।’ यह श्री गणेशजी का तारक नामजप सुनें । १. ‘श्री गणेशाय नमः ।’ यह श्री गणेशजी का तारक नामजप सुनें । … Read more

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