ग्रन्थ-निर्मिति का कार्य और प्रकाशनकार्य

१. सर्वांगस्पर्शी ग्रन्थों का संकलन

१ अ. परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी द्वारा संकलित ग्रन्थों की कुछ अद्वितीय विशेषताएं

१ अ १. पृथ्वीपर पहली बार उपलब्ध ज्ञान ! : सनातन के अधिकांश ग्रन्थों में पृथ्वी पर पहली बार उपलब्ध ज्ञान की मात्रा लगभग ३० से ७० प्रतिशत है ।

  • परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी को ध्यानावस्था में प्राप्त होनेवाला ज्ञान : ग्रंन्थों में प्रतिशत के रूप में दिया ज्ञान (उदा. विविध देवताआें की उत्पत्ति, स्थिति और लय करने की क्षमता), प्रायोगिक विषयों के सन्दर्भ में ज्ञान (उदा. आदर्श पूजाघर के नाप) आदि ज्ञान परात्पर गुरु डॉक्टरजी को ध्यानावस्था में प्राप्त हुआ है । यह ज्ञान पृथ्वी पर कहीं भी उपलब्ध नहीं है तथा अनमोल है ।
  • परात्पर गुरु डॉक्टरजी की कृपा से कुछ ज्ञान-प्राप्तकर्ता साधकों को सूक्ष्म से प्राप्त होनेवाला गहन अध्यात्मशास्त्रीय दिव्य (ईश्‍वरीय) ज्ञान ! : परात्पर गुरु डॉक्टरजी की कृपा से कुछ साधकों के माध्यम से अध्यात्म के विविध विषयों पर सूक्ष्म से न भूतो न भविष्यति अर्थात न कभी भूतकाल में प्राप्त हुआ था और न ही कभी भविष्य में मिलेगा, ऐसा गहन अध्यात्मशास्त्रीय ज्ञान प्रतिदिन अनेक पृष्ठ मिल रहा है ।

१ अ २. अध्यात्म के प्रत्येक घटक से सम्बन्धित क्यों और कैसे के शास्त्रीय उत्तर : वर्तमान वैज्ञानिक युगकी पीढी को अध्यात्म के प्रत्येक घटक के सम्बन्ध में क्यों और कैसे समझाने पर वे अध्यात्म में शीघ्र विश्‍वास करते हैं और साधना की ओर प्रवृत्त होते हैं । इसलिए सनातन के प्रत्येक ग्रन्थ में अध्यात्मशास्त्र बताने पर बल दिया गया है ।

१ अ ३. वैज्ञानिक युग के पाठक सरलता से समझ सकें, ऐसी वैज्ञानिक परिभाषा में लेखन : वर्तमान वैज्ञानिक युग के पाठक वैज्ञानिक परिभाषा में लिखा लेखन शीघ्र समझते हैं, यह जानकर सनातन के ग्रन्थ वैज्ञानिक परिभाषा में (सारणी, प्रतिशत, आलेख स्वरूप आदि) लिखे गए हैं ।

१ अ ४. उन्नत वैज्ञानिक उपकरणों द्वारा किए शोध प्रयोग : व्यक्ति द्वारा साधना करने पर उसपर होनेवाला उचित परिणाम, अंग्रेजी नहीं अपितु देवनागरी अक्षर सात्त्विक होना, तीर्थक्षेत्रों की महत्ता आदि के सम्बन्ध में वैज्ञानिक उपकरणों द्वारा शोध सनातन के सम्बन्धित विषय के ग्रन्थ में किया जाता है । 

१ अ ५. सूक्ष्म-स्तरीय ज्ञान से सम्बन्धित परीक्षण और चित्र : सात्त्विक वेशभूषा, आहार, अलंकार, धार्मिक कृत्य इत्यादि के व्यक्तिपर होनेवाले अच्छे परिणाम आदि के सन्दर्भ में सूक्ष्म-स्तरीय प्रक्रिया दर्शानेवाले परीक्षण और चित्र सनातन के सम्बन्धित विषय के ग्रन्थ में प्रकाशित किए जाते हैं ।

१ अ ६. ग्रन्थों की कुछ अन्य विशेषताएं

  • आनन्दप्राप्ति एवं शीघ्र ईश्‍वरप्राप्ति के लिए कालानुसार आवश्यक उचित साधना की सीख !
  • अध्यात्म का सैद्धान्तिक विश्‍लेषण ही नहीं, अपितु इसे प्रत्यक्ष आचरण में लाने हेतु मार्गदर्शन !
  • मानवजाति की ८० प्रतिशत समस्याआें का मूल कारण है अनिष्ट शक्तियां । अनिष्ट शक्तियों के सन्दर्भ में पहले कहीं भी उपलब्ध नहीं ऐसा ज्ञान और अनिष्ट शक्तियों से होनेवाली पीडाआें पर उपचार !

१ आ. सनातन के ग्रन्थोंके कुछ विषय

परात्पर गुरु डॉक्टरजी द्वारा अभीतक एकत्रित किए लेखन से ८,००० से अधिक ग्रन्थ प्रकाशित हो सकते हैं । ग्रन्थों के कुछ विषय निम्नानुसार हैं ।

१ आ १. हिन्दू धर्म : सोलह संस्कार; त्योहार, उत्सव, व्रत और परम्परा, धर्म, धर्मरक्षा, कुम्भपर्व, खरे और पाखण्डी साधु-सन्त

१ आ २. आचारधर्म : आदर्श दिनचर्या, वेशभूषा, अलंकार, आहार और निद्रा

१ आ ३. धार्मिक कृत्य : देवता की पूजा, देवालय में दर्शन करना, श्राद्ध आदि धार्मिक कृत्य; धर्माचरण; तीर्थक्षेत्र इत्यादि

१ आ ४. विविध योगमार्ग : कर्मयोग, हठयोग, नामसंकीर्तनयोग और गुरुकृपायोग

१ आ ५. साधना : देवता (गुण-विशेषताएं, कार्य और उपासना का अध्यात्मशास्त्रीय आधार), गुरु, शिष्य, व्यष्टि और समष्टि साधना, स्वभावदोष-निर्मूलन एवं गुणसंवर्धन, अहं-निर्मूलन, भावजागृति, बालभाव, गोपीभाव इत्यादि

१ आ ६. ईश्‍वरप्राप्ति हेतु कला : सात्त्विक अक्षर, रंगोलियां, मेंहदी इत्यादि

१ आ ७. पारिवारिक विषय : बालसंस्कार और अभिभावकों के लिए मार्गदर्शक ग्रन्थमाला

१ आ ८. सामाजिक विषय : गोरक्षा एवं गोसंवर्धन, स्वभाषारक्षा, आदर्श शिक्षाव्यवस्था इत्यादि

१ आ ९. हिन्दू राष्ट्र : आदर्श राष्ट्ररचना, हिन्दू राष्ट्र क्यों आवश्यक है ? इत्यादि

१ आ १०. पंचमहाभूतों से सम्बन्धित अनुभूतियां और उनका अध्यात्मशास्त्रीय विश्‍लेषण

१ आ ११. अनिष्ट शक्तियों से होनेवाली पीडाआें पर किए जानेवाले आध्यात्मिक उपचार : कुदृष्टि (नजर) और उतारा

१ आ १२. आयुर्वेद

१ आ १३. आगामी आपातकाल के लिए संजीवनी : विकार-निर्मूलन के लिए सरल घरेलू आयुर्वेदीय उपचार, बिन्दुदाब उपचार, रिक्त गत्ते के बक्सों से उपचार, नामजप-उपचार, स्वसम्मोहन उपचार; प्राणशक्ति (चेतना) प्रणाली में अवरोधों के कारण उत्पन्न होनेवाले विकारों पर उपचार, अग्निहोत्र; अग्निशमन प्रशिक्षण; प्राथमिक उपचार प्रशिक्षण इत्यादि

२. प्रकाशित ग्रन्थों की संख्या

अप्रैल २०१७ तक सनातन के २९९ ग्रन्थ-लघुग्रन्थों की १५ भाषाआें में (मराठी, हिन्दी, अंग्रेजी, गुजराती, कन्नड, तमिल, तेलुगु, मलयालम, बंगला, ओडिया, असमिया एवं गुरुमुखी (पंजाबी), उक्त १२ भारतीय भाषाआें तथा सर्बियन, जर्मन और नेपाली, इन ३ विदेशी भाषाआें में) ६८ लाख ५१ सहस्र से अधिक प्रतियां प्रकाशित हो चुकी हैं । परात्पर गुरु डॉक्टरजी द्वारा संकलित किए ग्रन्थ-लघुग्रन्थ उनके द्वारा स्थापित अथवा उनकी प्रेरणा से स्थापित संस्थाआें ने प्रकाशित किए हैं ।

३. भावी महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय के पाठ्यक्रम की नींव बने ग्रन्थ !

परात्पर गुरु डॉक्टरजी द्वारा स्थापित किए जा रहे महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय को अध्यात्म के सभी अंगों का गहन ज्ञान देनेवाले क्रमिक पाठ्यपुस्तकों की आवश्यकता होेगी, जिसे परात्पर गुरु डॉक्टरजी द्वारा संकलित किए जा रहे ग्रन्थ निश्‍चित पूर्ण करेंगे ।

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