पेट साफ होने के लिए रामबाण घरेलु औषधि : मेथीदाना

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अनेक लोगों को पेट साफ न होने की समस्या होती है । इस समस्या के कारण अनेक शारीरिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं । अनेक लोग प्रतिदिन पेट साफ होने के लिए औषधि लेते हैं । इनमें से अनेक औषधियों के कारण अंतडियों में सूखापन उत्पन्न होता है । इससे पेट साफ न होने की समस्या बढ जाती है ।

वैद्य मेघराज माधव पराडकर

 

१. मेथी दाना खाने की पद्धति

‘मेथी के दाने पेट साफ होने के लिए रामबाण औषधि है । रात में सोते समय अथवा रात में भोजन होने के पश्चात आधा चम्मच मेथी के दाने थोडे से पानी के साथ बिना चबाए निगल जाएं । इससे सवेरे उठने पर पेट साफ होता है ।

 

२. मेथी के दाने कैसे कार्य करते हैं ?

मेथी के दाने पेट में जाने पर फूलते हैं और उनके लिसलिसेपन के कारण वे आंतों का मल आगे ढकेलते हैं । अंतडियों में आवश्यकतानुसार पानी की मात्रा मेथी के दानों के कारण रखी जाती है । इससे अंतडियां सूखती नहीं । वात, पित्त एवं कफ, इन तीनों दोषों का शमन करती है । मेथी आहार का पदार्थ है । इसलिए अनेक दिन मेथीदाना प्रतिदिन लेने पर भी कोई भी हानि नहीं । मेथीदाना खाने से नैसर्गिक ढंग से शौच होती है । जुलाब नहीं होते । मेथी शक्तिवर्धक भी है । इसलिए नियमित मेथी दाने के सेवन से थकान न्यून होती है ।

 

३. अंतडियों के अनुसार मेथी दाने लेने की मात्रा

प्रतिदिन आधा चम्मच मेथी के दाने खाएं । अगले सप्ताह में उसकी मात्रा अल्प कर देखें । न्यूनातिन्यून जितनी मात्रा में वह लागू होते हैं, उतनी मात्रा हमेशा लेते रहें । कुछ लोगों की अंतडियां बहुत अधिक भारी होती हैं । ऐसे लोग आधा चम्मच मेथीदाना लें और प्रतिदिन आधा चम्मच बढाकर देखें । जो प्रमाण लागू पडता है, उसे नियमित लें । कुछ को एक ही समय पर एकसाथ ३ से ४ चम्मचों तक मेथीदाना लेना पड रहा है ।

 

४. मेथी के दाने धोकर उपयोग करें !

अन्य पेट साफ होने के लिए उपयोग की जानेवाली औषधियों की तुलना में मेथीदाना बहुत सस्ता है । बाजार में जो मेथी का दाना मिलता है, उस पर रासायनों का भी उपयोग हो सकता है । इसलिए गर्मियों के दिनों में वर्षभर पर्याप्त रहे इतना मेथी दाना मंगवा कर, उसे धोकर और सुखाकर और ठीक से हवाबंद डिब्बों में भर कर रखें और आवश्यकता के अनुसार वर्षभर उपयोग करें ।’

 

५. मेथी वात, कफ एवं ज्वर (ताप) का नाश करता है

मेथिका वातशमनी श्लेष्मघ्नी ज्वरनाशिनी ।

– भावप्रकाशनिघंटु, वर्ग १, श्लोक ८५

अर्थ : मेथी वात, कफ एवं ज्वर (ताप) का नाश करता है । मेथी को ‘पित्तजित्ज’ अर्थात ‘पित्त पर विजय पानेवाला’ ऐसे भी कहा जाता है । इसका अर्थ है कि मेथी वात, पित्त एवं कफ, ये तीनों दोष यदि बढे हैं, तो उसे न्यून करती है ।

दोषा एव हि सर्वेषां रोगाणामेककारणम् ।

– अष्टांगहृदय, सूत्रस्थान, अध्याय १२, श्लोक ३२

अर्थ : वात, पित्त एवं कफ, ये तीन दोष ही सर्व रोगों का कारण हैं ।

‘कोई भी रोग वात, पित्त एवं कफ में विषमता आए बिना हो ही नहीं सकता’, यह आयुर्वेद का सिद्धांत है । निरोगी रहने के लिए प्रतिदिन वात, पित्त एवं कफ, इन त्रिदोषों में संतुलन रखना आवश्यक होता है । त्रिदोषों में संतुलन रहने से रोगप्रतिकारक शक्ति बढती है । प्रतिदिन रात में थोडे मेथीदाने पानी के साथ लेने से तीनों दोषों का शमन (संतुलन) होता है । इससे आरंभ किए गए उपचारों को बल मिलता है और रोगप्रतिकारक शक्ति बढती है । मेथीदाना आहार का घटक है और वह प्रतिदिन हमें लागू हो, इतनी ही मात्रा में लेना है । इससे मेथीदाने के सेवन से कोई दुष्परिणाम नहीं होता ।

– वैद्य मेघराज माधव पराडकर, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा.

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