सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति के कार्य से समाज में जागृति हो रही है ! – गणेशमूर्तिकार, देवगढ

हिन्दू जनजागृति समिति का गणेशोत्सव उद्बोधन अभियान

गणेशमूर्ति शाला में आए हुए लोगों को सनातन का ग्रंथ श्री गणपति देते हुए दार्इं आेर श्री. दत्तात्रय आचरेकर
श्री गणेशमूर्ति बनाते हुए श्री. सुधीर दहिबांवकर

देवगढ – गणेशोत्सव की पृष्ठभूमि पर हिन्दू जनजागृति समिति के डॉ. रविकांत नारकर, सनातन की श्रीमती ज्योत्स्ना नारकर एवं श्री. अशोक करंगुटकर तहसील की कुछ गणेशमूर्ति शालाआें में पहुंचे । इस समय गणेशोत्सव उद्बोधन अभियान के अंतर्गत उन्होंने गणेशमूर्तिकारों को विविध सूत्र बताकर उनका उद्बोधन किया । इस अवसर पर गणेशमूर्तिकारों ने मत व्यक्त किया कि सनातन तथा हिन्दू जनजागृति समिति का धर्मप्रसार का कार्य अच्छा है । यह जागृति हिन्दुआें को धर्मपालन करने में सहायक होगी ।

सनातन के गणपति से संबंधित ५० लघुग्रंथ खरीदकर
गणेशमूर्ति के साथ अन्यों को देनेवाले श्री. दत्तात्रय पुरुषोत्तम आचरेकर !

विष्णुनगर, जामसंडे के श्री. दत्तात्रय पुरुषोत्तम आचरेकर गत ६४ वर्षों से केवल शाडूमिट्टी से गणेशमूर्तियां बनाते हैं । उनका यह व्यवसाय है तथा वर्तमान में वे ५० मूर्तियां बनाते हैं । उद्बोधन अभियान के अंतर्गत उन्हें जानकारी देने पर उन्होंने मूर्तिशाला में गणेशमूर्ति शास्त्रानुसार होनी चाहिए, यह सनातन का फ्लेक्स लगाने की अनुमति दी तथा गणपति एवं गणेश पूजाविधी ये दो लघुग्रंथ उन्हें दिखाने पर उन्होंने उसमें दिया हुआ कुछ विवरण पढा । तत्पश्चात गणेशमूर्ति के साथ ग्रंथ देने के लिए कुल ५० ग्रंथ खरीदे । डॉ. नारकर ने बताया कि श्री आचरेकर बोले कि प्लास्टर ऑफ पैरिस की मूर्ति बनाने के लिए कितना भी मूल्य मिले; परंतु वे वैसी मूर्ति नहीं बनाएंगे ।

शाडूमिट्टी की मूर्ति से चैतन्य आैर सात्त्विकता मिलती है ! – सुधीर दहिबांवकर

जामसंडे, तरवाडी के श्री. सुधीर सदानंद दहिबांवकर ४२ वर्षों से मूर्ति बनाने की सेवा कर रहे हैं । उन्हें उनके बंधु से यह प्रेरणा मिली है । प्रारंभ में वे स्वयं के लिए एक ही मूर्ति बनाते थे; परंतु बाद में मूर्तियों की संख्या बढती गर्इ तथा अब वह ४० तक पहुंच गर्इ है । श्री. दहिबांवकर ने बताया कि श्री गणेशजी के प्रति भक्तिभाव बना रहे तथा मूर्तिकला की रक्षा के लिए वे मूर्ति बनाते हैं ।

गणेशोत्सव उद्बोधन अभियान के अतंर्गत श्री गणेशमूर्ति संबंधी शास्त्रीय जानकारी देने पर श्री. दहिबांवकर बोले कि हिन्दू जनजागृति समिति उद्बोधन करती है, यह १०० प्रतिशत ठीक है । लोग विविध रूपों की श्री गणेशमूर्ति की मांग करते हैं, तब मैं ही उनका उद्बोधन करता हूं । तब भी वे अपनी मांग पर दृढ रहते हैं, तब मजबूरी में मूर्ति बनाकर देनी पडती है । सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति लोगों को जो धर्मशिक्षा दे रही है, वह वास्तव में महान कार्य है । इसके द्वारा लोगों को योग्य तथा अयोग्य की जानकारी मिलने से धर्मपालन करने में सहायता होगी । इस कार्य के लिए मेरी शुभकामनाएं हैं । श्री गणेश इस कार्य की बाधाएं दूर करें !

प्लास्टर ऑफ पैरिस की मूर्ति के संबंध में श्री. दहिबांवकर बोले, यह व्यवसाय पैसे कमाने के लिए नहीं करता, तो मिट्टी से मूर्ति बनाना हमारी परंपरा है । उससे अधिक सात्त्विकता मिलती है । वह सात्त्विकता सभी को मिले, यह हमारा उद्देश्य है । लोभवश मैं प्लास्टर ऑफ पैरिस की मूर्तियां नहीं बनाऊंगा । मिट्टी की मूर्ति से मुझे चैतन्य मिलता है ।

डॉ. नारकर श्री. गणपत केशव वारीक, वारीकवाडी, पडेल; श्री. बाबीराम शांताराम माळगवे, शेवडीवाडी, पडेल, तथा सडेवाघोटन के श्री. मनोहर वानिवडेकर एवं श्री. राणे की मूर्तिशालाआेंमें पहुंचे । इस अवसर पर उनके साथ सनातन की श्रीमती ज्योत्स्ना नारकर एवं श्री. अशोक करंगुटकर उपस्थित थे ।

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात