धर्मसंस्थापना हेतु साधना के रूप में हिन्दु राष्ट्र-स्थापना के कार्य में सम्मिलित रहें ! – श्री. चेतन राजहंस, प्रवक्ता, सनातन संस्था

प्रयाग में हिन्दु जनजागृति समिति द्वारा राष्ट्र एवं धर्म जागृति सम्मेलन का आयोजन

मार्गदर्शन सुनते हुए जिज्ञासु

प्रयाग – हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा आयोजित राष्ट्र-धर्म जागृति सम्मेलन में सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस वक्तव्य कर रहे थे । अपने वक्तव्य में उन्होंने यह प्रतिपादित किया कि, ‘वर्तमान की धर्मविहीन (सेक्युलर) व्यवस्था में साधारण नागरिकों के जीवन से धर्म विलुप्त हुआ है । अतः प्रातः दूध देनेवाले से डॉक्टर तक सभी समाज को लूटते हैं । प्रशासकीय अधिकारी ही नहीं, तो पुलिस तथा न्यायाधीश भी भ्रष्टाचारी है । प्रत्येक व्यक्तिपरपीडा देने का पापमय आचरण करता है । अतः सर्वत्र भ्रष्टाचार, अनाचार,अनैतिकता की मात्रा बढ गई है । धर्म को ग्लानी के समान परिस्थिती है । धर्मको ग्लानी आई है, अपितु अवतार, संत, महापुरुष इत्यादि द्वारा धर्म कीपुनर्स्थापना का कार्य होता है, यही हिन्दु धर्म की विशेषता है । वर्तमान समयमें धर्मसंस्थापना हेतु साधना के रूप में धर्माधिष्ठित हिन्दु राष्ट्र-स्थापना केकार्य में सम्मिलित होना चाहिए ।’

उस समय ‘साधना की प्रत्यक्ष कृती’ इस विषय पर मार्गदर्शन करते समयहिन्दू जनजागृति समिति के पूर्व भारत के मार्गदर्शक पू. नीलेश सिंगबाळ नेबताया कि, ‘‘हिन्दु धर्म यह बताता है कि, मनुष्यजन्म की सार्थकता मोक्षप्राप्तीमें ही है । मोक्षप्राप्ती के लिए प्रतिदिन करने के प्रयास अर्थात् साधना । नामजपही कलियुग में सबसे सुलभ साधना है । नामजप से प्राप्त होनेवाला आनंदसत्संग में आने के पश्चात् दुगना होता है । उसके लिए नियमित सत्संग में रहें ।अपने क्षेत्र में सत्संग देनेवाला धर्मशिक्षण वर्ग आयोजित करें! धर्मशिक्षणवर्ग आयोजित करना ही धर्मप्रसार की सेवा है ।

उस समय हिन्दू जनजागृति समिति के उत्तरप्रदेश-बिहार समन्वयक श्री.विश्वनाथ कुलकर्णी ने बताया कि, ‘प्रयाग में धर्मजागृति के कोई भी अभियान आयोजित किए जा सकते हैं ।’ इस कार्यक्रम का लाभ ४५ धर्माभिमानियों ने ऊठाया । इस कार्यक्रम में साप्ताहिक धर्मशिक्षण वर्ग आरंभ करने का निश्चित किया गया ।

स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात