हडप्पा के लोग थे द्रव-चलित अभियांत्रिकी (हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग) पारंगत !

भारतीय शोधकर्ताओं ने हडप्पा सभ्यता से जुडे प्रमुख स्थल धोलावीरा में रडार तकनीक से भूमि के नीचे छिपी अनेक पुरातात्विक विशेषताओं का पता लगाया है, जो यह संकेत करती हैं कि हडप्पा के लोगों को हाइड्रोलिक इंजीनियरिंग में महारत प्राप्त थी !

अक्षय्य तृतीया के पर्वपर ‘सत्पात्र दान’ देकर ‘अक्षय्य दान’ का फल प्राप्त करें !

‘२६.४.२०२० को ‘अक्षय्य तृतीया’ है । इस दिन किया जानेवाला दान और हवन का क्षय नहीं होता; जिसका अर्थ उनका फल मिलता ही है । इसलिए कई लोग इस दिन बडी मात्रा में दानधर्म करते हैं ।

पहरा देनेवाले पुलिसकर्मियों को ‘सनातन संस्था’ और ‘हिन्दू जनजागृति समिति’ द्वारा चाय और अल्पोपहार

‘लॉक डाउन’ बंदी के समय गोवा के फार्मागुडी और वारखंडे (फोंडा) में पहरा देनेवाली पुलिस को ‘सनातन संस्था’के साधक और ‘हिन्दू जनजागृति समिति’के कार्यकर्ताओं ने चाय और अल्पोपहार दिया ।

वारों का क्रम ‘सोमवार से रविवार’ क्यों ?

‘वार यह शब्द ‘होरा’ शब्द से बना है । होरा अर्थात ‘अहोरात्र ।’ इसका अर्थ है ‘सूर्योदय से अगले दिन के सूर्योदय तक !’ होरा अर्थात घंटा ।

प्रतिदिन आगे दिए आध्यात्मिक उपाय गंभीरता से करें !

‘वर्तमान में सर्वत्र प्रतिकूल परिस्थिति उत्पन्न हो गई है । साधकों के लिए इस काल में आगे दिए आध्यात्मिक उपाय प्रतिदिन करने अत्यंत आवश्यक हैं ।

साधक कालानुसार बगलामुखी देवी से भावपूर्ण प्रार्थना कर, सवेरे अथवा शाम को देवी का बगलादिगबंधन स्तोत्र सुनें !

साधकों के सगुण स्तर पर रक्षा होने के लिए उन्हें कालानुसार देवी से भावपूर्ण प्रार्थना करनी चाहिए ।

सब साधक प्रतिदिन अपने साथ ‘रक्षायंत्र’ रखें ।

‘वर्तमान में आपातकाल की तीव्रता अधिक होने से साधकों पर स्थूल से अथवा सूक्ष्म से आक्रमण होने की संभावना है । इसलिए सर्व साधक प्रतिदिन अपने साथ ‘रक्षायंत्र’ रखें ।

देशविघातक आततायीपन !

कोरोना की महामारी का प्रतिकार करने के लिए संपूर्ण विश्व में विलगीकरण (social distansing) चालू है, परंतु दूसरी ओर भारत की मस्जिदों में एकत्रीकरण हो रहा है ।

कोरोना विषाणु के कारण निर्माण हुए आपातकाल में हिन्दू धर्म के अनुसार आचरण करना जगत के लिए बंधनकारक होनेवाला है और उससे ही हिन्दू धर्म और संस्कृति का सर्वश्रेष्ठत्व और अलौकिकत्व प्रमाणित होगा !

‘वर्तमान में कोरोना विषाणुओं के कारण संपूर्ण जगत में उथल-पुथल मच गई है । इस विषाणु ने सभी को दहला दिया है ।

श्रीधरस्वामीकृत् श्रीहनुमत्स्तोत्रम्

अनेक सुखद स्थानों को सुशोभित करनेवाले, मदन का गर्वहरण करनेवाले, आत्मज्ञानविहीनों का अज्ञान दूर करनेवाले अंजनीसुत को हम भजते हैं ।