तीखा न खाने पर भी कुछ लोगों को पित्त का कष्ट क्यों होता है ?

‘अपने जठर में पाचक स्राव का रिसाव होता रहता है । इस पाचक स्राव के अन्ननलिका में आने पर, पित्त का कष्ट होता है । खट्टा, नमकीन, तीखा और तैलीय पदार्थ खाने से पित्त बढता है; परंतु ऐसा कुछ न खाते हुए भी कुछ लोगों को गले में और छाती में जलन होती है, अर्थात … Read more

शरीर निरोगी रहने के लिए अयोग्य समय पर खाना टालें !

क्या आयुर्वेद में चटपटा एवं स्वादिष्ट खाना मना है ? इसका उत्तर है नहीं ! इसके विपरीत रुचि लेकर खाने से संतोष होता है ।

साधना अच्छी होने के लिए आयुर्वेद के अनुसार अभ्यास करने की आवश्यकता

मनुष्यजन्म बहुत पुण्य से मिलता है । साधना कर ईश्वरप्राप्ति करने में ही मनुष्यजन्म की सार्थकता है । शरीर निरोगी होगा, तो साधना करना सरल हो जाता है ।

शरीर निरोगी रखने के लिए केवल इतना ही करें !

आजकल अनेक लोग चलना, यह व्यायाम स्वरूप करते हैं; परंतु कुछ का चलना आराम से होता है । अनेक लोग चलते समय एक-दूसरे से बात करते हुए चलते हैं । इससे व्यायाम का लाभ नहीं होता ।

अणुयुद्ध के कारण होनेवाले प्रदूषण से रक्षा के उपाय : अग्निहोत्र

अग्निहोत्र के परिणाम स्वरूप भौतिकरीति से वायु की शुद्धि होने से मानवी मन की शुद्धि होती है । मन शुद्ध होने पर अपनेआप ही उसका विचार-आचार पर प्रभाव पडता है और अंतिमत: मनुष्य आनंदी होता है ।

२५.१०.२०२२ को दिखाई देनेवाला खंडग्रास सूर्यग्रहण, ग्रहण की अवधि में पालन किए जानेवाले नियम तथा ग्रहण का राशि के आधार पर मिलनेवाला फल !

ग्रहणकाल में की जानेवाली साधना का फल सहस्रों गुना मिलता है । इसके लिए ग्रहणकाल में साधना को प्रधानता देना महत्त्वपूर्ण है । सूतकारंभ से लेकर ग्रहण समाप्त होने तक नामजप, स्तोत्रपाठ, ध्यानधारणा इत्यादि धार्मिक कार्याें में व्यस्त रहने से उसका लाभ मिलता है ।

चेहरे पर कष्टदायक शक्ति का आवरण प्रतीत होने पर किए जानेवाले आध्यात्मिक स्तर के उपाय !

अनिष्ट शक्तियां साधकों की पंचज्ञानेंद्रियां अपने नियंत्रण में लेने के लिए साधकों के मुख पर कष्टदायक (काला) आवरण निर्माण करती हैं । इससे साधकों का मुखमंडल काला-सा दिखाई देना, चेहरा अस्पष्ट दिखाई देना, आंखों में आग होना, चेहरे पर फुंसियां आना, चेहरे पर काले दाग-धब्बे पडना

आध्यात्मिक उपायों के लिए दी सामग्री के उपयोग की अवधि

वर्तमान में आपातकाल की तीव्रता बढती जा रही है । इसलिए साधकों को होनेवाले आध्यात्मिक कष्टों में भी वृद्धि हो रही है । साधकों का आध्यात्मिक कष्ट न्यून (कमी) होने हेतु परात्पर गुरु डॉक्टरजी ने आध्यात्मिक उपायों की सामग्री उपलब्ध करवाकर साधकों को चैतन्य दिया है ।

विषमुक्त अन्न के लिए घर के घर ही में हरे शाक-तरकारी का रोपण करें !

घर के घर ही में प्राकृतिक पद्धति से हरे शाक-तरकारी का रोपण कर न्यूनतम (कम से कम) अपने कुटुंब के लिए तो विषमुक्त अन्न उगाना हमारे लिए सहज संभव है । तो चलिए ! सनातन के घर-घर रोपण अभियान में सहभागी होकर विषमुक्त अन्न का संकल्प करेंगे !