आध्यात्मिक पहेली : वर्तुल, त्रिकोण, चौकोन, पंचकोण और षट्कोण
आगे दी प्रत्येक आकृति की ओर १ – २ मिनट देखने पर क्या प्रतीत होता है, इसका अध्ययन करें ।
आगे दी प्रत्येक आकृति की ओर १ – २ मिनट देखने पर क्या प्रतीत होता है, इसका अध्ययन करें ।
स्वाधीनता आंदोलन के प्रयासों को सबल बनाने हेतु उन्होंने जनवरी १९०५ से इंडियन सोशियोलोजिस्ट नामक मासिक पत्र निकालना प्रारंभ किया और १८ फरवरी, १९०५ को इंडियन होमरूल सोसाइटी की स्थापना इस उद्देश्य से की कि भारतीयों के लिए भारतीयों के द्वारा भारतीयों की सरकार स्थापित हो ।
आज विश्व के प्रत्येक कोने में हिन्दू संस्कृति के प्रचार में रामायण, गीता, वेदोपनिषद से लेकर प्राचीन भारत के ऋषि-मुनियों की कथाओं को पहुंचाने का एकमात्र श्रेय भाईजी को है ।
वंदे मातरम व स्वतंत्रतालक्ष्मी की जय कहने मात्र से अंग्रेज सरकार ने उन्हें दंडित किया था । ऐसी कठिन परिस्थितियों में भी अपना कार्य आरंभ रखनेवाले बाबाराव सावरकरजी अर्थात,स्वतंत्रतावीर विनायक दामोदर सावरकर के अग्रज थे ।
आगामी आपातकाल में साधकों की रक्षा हो व ब्रह्मांड से आनेवाले देवताआें के स्पंदन साधकों को मिलें, जिससे वे चैतन्यमय हों, इस हेतु महर्षि ने मंत्रशक्ति से प्रभारित तीन कलश भेजे हैं ।
वर्ष २०१६ में भारत में विपुल सुवृष्टि हो व आपात्काल का निवारण हो, इस हेतु महाराष्ट्र के बार्शी (सोलापुर) स्थित श्री योगीराज वेद विज्ञान आश्रम की ओर से अश्वमेधयाजी प.पू. नाना काळे गुरुजी के मार्गदर्शन में सौमिक सुवृष्टि योजनांतर्गत २५ सोमयागों का नियोजन किया गया है ।
सनातन प्रभात आध्यात्मिक नियतकालिक होने से इस लेखमाला में आध्यात्मिक स्तर की पहेलियां दी हैं । इन पहेलियों से यह समझ में आएगा कि मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक स्तर की पहेलियां क्या होती हैं ।
आगामी महायुद्धकाल में चिकित्सा-सुविधाएं दुर्लभ होंगी, तब इस ग्रंथमाला का महत्त्व समझ में आएगा ! समाज की सहायता हेतु आगामी आपातकाल की संजीवनी का प्रचार अत्यावश्यक !
वर्तमान स्थिति को देखते हुए लगता है कि अब देश विनाश की ओर ही जानेवाला है । इस स्थिति में परिवर्तन लाने के लिए हिन्दू राष्ट्र लाना ही एकमात्र पर्याय है ।
तमिलनाडू के तंजावुर स्थित ७८ वर्षीय परम पूजनीय रामभाऊस्वामीजी ने वर्ष १९७५ से जलप्राशन नहीं किया है । वर्ष १९७७ से वे केवल दो केले और एक प्याली दूध, दिन में केवल एक ही बार ले रहे हैं । ऐसा होते हुए भी वे पूर्णतः कार्यक्षम हैं ।